अमेरिका जल्द हटाएगा 25% टैरिफ, रेसिप्रोकल ड्यूटी भी होगी कम... भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर का दावा

अगर आप व्यापार से जुड़े हैं, खासतौर पर अगर आपका कारोबार अमेरिका में एक्सपोर्ट से जुड़ा है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है.

America will remove 25% tariff reciprocal duty will also be reduce
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

अगर आप व्यापार से जुड़े हैं, खासतौर पर अगर आपका कारोबार अमेरिका में एक्सपोर्ट से जुड़ा है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकती है. लंबे समय से भारतीय निर्यातकों पर अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% अतिरिक्त पेनल टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब इस दिशा में राहत मिलने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं.

भारत सरकार के एक बड़े अधिकारी ने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही यह टैरिफ हटा सकता है. इससे न सिर्फ भारतीय कंपनियों को सीधा लाभ मिलेगा, बल्कि भारत-अमेरिका के व्यापारिक संबंधों में भी एक नई ऊर्जा का संचार होगा.

मुख्य आर्थिक सलाहकार का बड़ा बयान

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने हाल ही में कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि आने वाले कुछ महीनों में या संभव है उससे भी पहले अमेरिका भारतीय सामानों पर लगाया गया 25% पेनल टैरिफ हटा देगा.

उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका द्वारा लागू की गई रेसिप्रोकल ड्यूटी को भी मौजूदा 25% से घटाकर 10% से 15% के बीच लाया जा सकता है.

यह न सिर्फ एक आर्थिक फैसला होगा, बल्कि यह भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देगा. यदि ये बदलाव होते हैं, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.

अमेरिका में फिर से खुल सकते हैं रास्ते

इन टैरिफों के हटने से खासकर स्टील, एल्युमिनियम और इंडस्ट्रियल गुड्स से जुड़ी कंपनियों को सीधा फायदा मिलेगा.

अमेरिका में इन क्षेत्रों में पहले से डिमांड है, लेकिन अधिक टैरिफ के चलते भारतीय सामान वहां महंगा पड़ता था, जिससे खरीदार दूसरे विकल्पों की ओर मुड़ते थे. अब अगर ये टैरिफ हटा दिए जाते हैं तो भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक कीमतों पर उपलब्ध होंगे, जिससे निर्यात में तेज उछाल आ सकता है.

भारत-अमेरिका की रणनीतिक बातचीत का नतीजा

यह बयान उस वक्त सामने आया है जब हाल ही में भारत के चीफ ट्रेड नेगोशिएटर और वाणिज्य मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल की मुलाकात अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच से हुई थी.

नई दिल्ली में हुई इस आमने-सामने की बातचीत को दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. खासतौर पर तब, जब ट्रंप प्रशासन के दौरान लगाए गए टैरिफ्स ने भारत के कई एक्सपोर्टर्स की कमर तोड़ दी थी.

कैसे पिछड़ रहे थे भारतीय एक्सपोर्टर्स?

ट्रंप सरकार के समय लगाए गए डबल लेयर टैरिफ सिस्टम ने भारतीय निर्यातकों को गहरी परेशानी में डाल दिया था. कई ऐसे प्रोडक्ट्स थे जिन पर कुल टैक्स 50% तक पहुंच गया था, जिससे उनकी प्रॉफिटेबिलिटी और मार्जिन पर सीधा असर पड़ा.

सबसे ज्यादा नुकसान टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फूड प्रोडक्ट्स जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स को हुआ, जहां उत्पादन लागत तो पहले से ही अधिक होती है और मार्जिन कम होता है.

इस टैरिफ के चलते भारतीय कंपनियों की अमेरिकी बाजार में पकड़ कमजोर होती जा रही थी और वहां की कंपनियां सस्ते विकल्पों की ओर मुड़ने लगी थीं.

अगर टैरिफ हटे तो क्या बदलेगा?

अगर अमेरिका अपने टैरिफ निर्णय को वापस लेता है या उसे कम करता है, तो इसका असर सिर्फ भारत के व्यापारिक आंकड़ों पर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका पर पड़ेगा.

भारत में एक्सपोर्ट सेक्टर केवल व्यापार नहीं, एक रोजगार जनक प्रणाली भी है, जिससे लाखों लोग जुड़े हुए हैं- कारखाने में काम करने वाले श्रमिकों से लेकर बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स में लगे कर्मियों तक.

टैरिफ कम होने से उत्पादन बढ़ेगा, ऑर्डर आएंगे, फैक्ट्रियां चलेंगी और लोगों को काम मिलेगा. इसके अलावा डॉलर में निर्यात बढ़ने से भारत के लिए विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत होगा.

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