किन मिस्ट्री वेपन का इस्तेमाल कर अमेरिका ने मादुरो को किया गिरफ्तार, खून की उल्टियां करने लगे थे सैनिक

लैटिन अमेरिका की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर सामने आई एक सनसनीखेज कहानी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है.

America Used Which Mystery weapons against maduro security and arrested
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लैटिन अमेरिका की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर में है. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर सामने आई एक सनसनीखेज कहानी ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. दावा किया जा रहा है कि वेनेजुएला की धरती पर उतरकर अमेरिकी बलों ने एक गुप्त सैन्य अभियान को अंजाम दिया, जिसका मकसद मादुरो और उनकी पत्नी को किडनैप कर अमेरिका ले जाना था. इस कथित ऑपरेशन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा उस रहस्यमयी हथियार की हो रही है, जिसके इस्तेमाल से वेनेजुएला के सैकड़ों सैनिक बेबस हो गए.


न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट में मादुरो की सुरक्षा में तैनात रहे एक सुरक्षाकर्मी के इंटरव्यू का हवाला दिया गया है. इस गार्ड ने दावा किया कि उसने अपनी आंखों से वह सब देखा, जो आज भी उसे डरा देता है. उसके मुताबिक, बेहद सीमित संख्या में अमेरिकी सैनिकों ने सैकड़ों वेनेजुएलाई सैनिकों को कुछ ही पलों में निष्क्रिय कर दिया. सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई गई कि पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई.

जब अचानक खामोश हो गए रडार

सुरक्षाकर्मी के अनुसार, ऑपरेशन वाले दिन हालात बिल्कुल सामान्य थे. राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था अपने तय ढर्रे पर चल रही थी. तभी अचानक सभी रडार और निगरानी सिस्टम बंद हो गए. किसी को समझ नहीं आया कि तकनीकी खराबी है या किसी बड़े हमले की शुरुआत. इसी भ्रम के बीच आसमान में हलचल दिखने लगी.गार्ड का कहना है कि कुछ ही सेकंड में उनके सिर के ऊपर कई ड्रोन मंडराने लगे. संख्या इतनी ज्यादा थी कि उन्हें गिन पाना मुश्किल था. वे ड्रोन इतने करीब थे कि ऐसा लग रहा था मानो आसमान पूरी तरह उनके कब्जे में चला गया हो.

हेलिकॉप्टरों से उतरे सैनिक

ड्रोन के तुरंत बाद हेलिकॉप्टर नजर आए. गार्ड के मुताबिक, करीब आठ हेलिकॉप्टर थे, जिनसे लगभग बीस अमेरिकी सैनिक नीचे उतरे. संख्या कम थी, लेकिन उनके हथियार और रणनीति असाधारण लग रही थी. सुरक्षाकर्मी ने बताया कि जैसे ही वे जमीन पर उतरे, हालात तेजी से बदल गए. उसका कहना है कि वेनेजुएलाई सैनिक संख्या में कहीं ज्यादा थे, लेकिन किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. अमेरिकी सैनिक असाधारण सटीकता और रफ्तार से फायरिंग कर रहे थे. ऐसा प्रतीत हो रहा था कि हर सैनिक मिनटों में सैकड़ों राउंड चला रहा है. मुकाबला एकतरफा होता चला गया.

रहस्यमयी हमला जिसने शरीर को तोड़ दिया

कहानी का सबसे डरावना हिस्सा तब सामने आता है, जब सुरक्षाकर्मी उस “मिस्ट्री हथियार” का जिक्र करता है. उसके अनुसार, अचानक अमेरिकी सैनिकों ने कुछ लॉन्च किया. वह इसे ठीक से शब्दों में बयां नहीं कर पाता, लेकिन कहता है कि एक तेज, असहनीय आवाज गूंजी. ऐसा लगा जैसे सिर फट जाएगा. गार्ड ने बताया कि उसके बाद हालात भयावह हो गए. सैनिकों की नाक से खून बहने लगा, कुछ लोग खून की उल्टियां करने लगे. कई जवान जमीन पर गिर पड़े और उठने की हालत में नहीं थे. शरीर ने जैसे काम करना बंद कर दिया था. वह दावा करता है कि शायद यह कोई सोनिक हथियार था या उससे मिलती-जुलती कोई तकनीक, जिसे उसने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं देखा था. उसके शब्दों में, “हम खड़े तक नहीं हो पा रहे थे. हमारे शरीर ने जवाब दे दिया था. वे कुछ ही सैनिक हम सब पर भारी पड़ गए.”

तकनीक के सामने बेबस सुरक्षा बल

सुरक्षाकर्मी का मानना है कि जिस तरह की तकनीक का इस्तेमाल किया गया, उसके सामने पारंपरिक हथियार और संख्या दोनों ही बेकार साबित हुए. उसने कहा कि उस दिन के बाद उसका अमेरिका को लेकर नजरिया पूरी तरह बदल गया. वह चेतावनी भरे लहजे में कहता है कि जो भी देश यह सोचते हैं कि वे अमेरिका का सैन्य रूप से मुकाबला कर सकते हैं, उन्हें अंदाजा नहीं है कि अमेरिका किस स्तर की ताकत रखता है. “मैंने जो देखा, उसके बाद मैं कभी भी उनसे भिड़ने की कल्पना नहीं कर सकता,” ऐसा उसका कहना है.

क्या अगला निशाना मेक्सिको?

इंटरव्यू में उससे यह भी पूछा गया कि अगर अमेरिका की लिस्ट में अगला लक्ष्य मेक्सिको होता है, तो क्या इसका असर पूरे लैटिन अमेरिका पर पड़ेगा. इस पर उसने कहा कि इसमें कोई शक नहीं. उसके मुताबिक, इस कथित ऑपरेशन के बाद पूरे क्षेत्र में डर और चर्चा दोनों फैल गई हैं. कोई भी देश वह अनुभव नहीं चाहता, जो वेनेजुएला के सुरक्षा बलों ने झेला. उसने कहा कि अब हर सरकार दो बार सोचेगी, क्योंकि यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि ताकत का खुला प्रदर्शन था.

व्हाइट हाउस तक पहुंची कहानी

इस पूरे मामले को तब और हवा मिली, जब मादुरो के सुरक्षाकर्मी की यह आंखों देखी गवाही व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की. हालांकि आधिकारिक तौर पर अमेरिका की ओर से इस कथित ऑपरेशन या हथियार की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन कहानी ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है.

हकीकत या मनोवैज्ञानिक दबाव?

विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी रिपोर्टें कई बार रणनीतिक संदेश देने का जरिया भी हो सकती हैं. चाहे यह दावा पूरी तरह सच हो या अतिरंजित, इतना तय है कि इस कहानी ने अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को लेकर एक बार फिर रहस्य और डर का माहौल बना दिया है.वेनेजुएला की इस कथित घटना ने यह सवाल छोड़ दिया है कि आधुनिक युद्ध अब सिर्फ गोलियों और बमों का खेल नहीं रह गया, बल्कि तकनीक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव ही असली हथियार बन चुके हैं.

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