अरबों डॉलर के कारोबार की बात... भारत-अमेरिका ट्रेड डील क्यों है इतना जरूरी, किसे कितना होगा फायदा?

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है.

Why is India-US trade deal so important who will benefit
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Bharat 24

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है. गुरुवार को कॉमर्स सेक्रेट्री राजेश अग्रवाल ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की पहली किस्त (ट्रांश) पर लगभग सहमति बन चुकी है और इसे जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है. हालांकि, इस समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर कब होंगे, इसकी कोई तय समयसीमा फिलहाल सामने नहीं आई है.

यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में भारत में नए अमेरिकी राजदूत और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सर्जियो गोर ने कहा था कि अमेरिका के लिए भारत जितना महत्वपूर्ण कोई दूसरा देश नहीं है. ऐसे में यह ट्रेड डील सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है.

अमेरिका क्यों है भारत का सबसे अहम ट्रेड पार्टनर

भारत के लिए अमेरिका सामान और सेवाओं के क्षेत्र में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है और ट्रेड डील के लागू होने के बाद इसमें और तेज़ी आने की उम्मीद है. इस समझौते से भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और भारतीय उत्पाद कम कीमतों पर वहां उपलब्ध हो सकेंगे.

अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों और सेवाओं की आसान और सस्ती एंट्री से भारत के निर्यातकों को सीधा फायदा होगा. इससे भारत का एक्सपोर्ट बेस मजबूत होगा और लंबे समय में विदेशी मुद्रा आय में भी इजाफा होगा.

टैरिफ में राहत से भारतीय कंपनियों को मिलेगी बढ़त

प्रस्तावित ट्रेड डील का एक बड़ा फायदा यह है कि कई उत्पादों पर आयात शुल्क या तो पूरी तरह हट सकता है या बेहद कम हो सकता है. भारत में पहले से ही कई ऐसी कंपनियां हैं जो वैश्विक स्तर की गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाती हैं. अगर अमेरिकी बाजार इनके लिए खुलता है, तो ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में और मजबूत स्थिति में आ सकती हैं.

कम टैरिफ का मतलब यह भी है कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा. इससे न केवल बड़ी कंपनियों को, बल्कि मझोले और छोटे उद्योगों को भी नए अवसर मिल सकते हैं.

निवेश और सप्लाई चेन के लिहाज से क्यों अहम है डील

भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट अमेरिकी ट्रेड और निवेश समुदाय के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. इससे यह संदेश जाएगा कि भारत विदेशी निवेशकों के लिए खुला है और कारोबार को बढ़ावा देने के लिए तैयार है.

यह डील भारत को मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद कर सकती है. साथ ही, भारत को चीन के विकल्प के रूप में एक मजबूत ग्लोबल सप्लाई चेन हब बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है, जो भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है.

अरबों डॉलर के कारोबार से जुड़ा है भारत-अमेरिका व्यापार

भारत के करीब 30 ऐसे प्रमुख सेक्टर्स हैं, जिनसे अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात किया जाता है. इनमें छह सेक्टर कृषि आधारित हैं, जबकि बाकी 24 औद्योगिक उत्पादों से जुड़े हुए हैं.

भारत अमेरिका को कपड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, केमिकल्स और ऑटोमोबाइल से जुड़े सामान निर्यात करता है. आंकड़ों के मुताबिक भारत अमेरिका को लगभग 4.39 अरब डॉलर के कपड़े भेजता है. इसके अलावा 11.88 अरब डॉलर का सोना, चांदी और हीरे का निर्यात होता है. वहीं मोबाइल, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस का निर्यात 14.39 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है.

ट्रेड डील लागू होने के बाद इन सभी सेक्टर्स में कारोबार के और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

रोजगार और रणनीतिक साझेदारी भी दांव पर

यह समझौता अब केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है. इसका सीधा असर रोजगार सृजन, विदेशी निवेश, तकनीक के आदान-प्रदान और भारत-अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी पर भी पड़ेगा.

अमेरिका के साथ मजबूत आर्थिक रिश्ते भारत को वैश्विक मंच पर और प्रभावशाली बनाएंगे. वहीं देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपोर्ट और सर्विस सेक्टर में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

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