तीसरा विश्व युद्ध भड़का रहा अमेरिका! कलिनिनग्राद पर कब्जे की धमकी के बाद क्या रूस करेगा जंग का ऐलान?

जनरल डोनह्यू ने खुलासा किया कि नाटो के पास अब एक रणनीतिक योजना है, जिसके तहत वह कलिनिनग्राद, एक रूसी सैन्य किले पर कब्जा कर सकता है.

America provoking Third World War Russia Kaliningrad
ट्रंप-पुतिन | Photo: AI

अमेरिकी सेना और नाटो सहयोगियों ने हाल ही में एक नई सैन्य रणनीति शुरू की है, जिसका उद्देश्य नाटो की जमीनी रक्षा क्षमता को मजबूत करना और रूस के बढ़ते खतरे का मुकाबला करना है. इसे ईस्टर्न फ्लैंक डिटरेंस लाइन कहा गया है, और इसका मुख्य उद्देश्य यूरोप में नाटो की सैन्य तैयारी और अंतर-संचालन को और बढ़ाना है. अमेरिकी सेना के यूरोप और अफ्रीका कमांडर जनरल क्रिस्टोफर डोनह्यू ने जर्मनी के विस्बाडेन में अमेरिकी सेना संघ के दौरान इस पहल के बारे में जानकारी दी.

इस रणनीतिक कदम का मुख्य लक्ष्य रूस के खिलाफ नाटो की रक्षा स्थिति को सुदृढ़ करना और विशेष रूप से कलिनिनग्राद जैसे रणनीतिक स्थानों पर रूस के संभावित हमलों का मुकाबला करना है. इसके साथ ही, इसने एक नई विवाद की शुरुआत कर दी है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा भी पैदा हो गया है.

रूस के कलिनिनग्राद पर नाटो का रुख

जनरल डोनह्यू ने खुलासा किया कि नाटो के पास अब एक रणनीतिक योजना है, जिसके तहत वह कलिनिनग्राद, एक रूसी सैन्य किले पर कब्जा कर सकता है. यह क्षेत्र पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है, लेकिन रूस से यह भूमि हद तक कटी हुई है. नाटो और पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस इस क्षेत्र का इस्तेमाल यूरोप में हमले के लिए कर सकता है. विशेष रूप से, सुवाल्की गैप पर नियंत्रण करने की संभावना है, जो बाल्टिक देशों को नाटो से जोड़ने वाली 60 मील चौड़ी जमीन है.

रूस के खिलाफ हमला: योजना और प्रतिक्रिया

अमेरिकी जनरल डोनह्यू ने डिफेंस न्यूज से बातचीत में कहा कि नाटो ने इस क्षेत्र पर कब्जा करने के लिए पहले ही विस्तृत योजना बना ली है. उन्होंने कहा, "अब, आप कलिनिनग्राद को उतनी तेजी से गिरा सकते हैं, जितना पहले कभी नहीं देखा गया. हमने इसके लिए योजना बना ली है और रूस को रोकने की क्षमता भी विकसित कर ली है."

लेकिन इस धमकी के बाद, रूस की प्रतिक्रिया तीव्र रही. क्रेमलिन ने इसे एक खतरनाक कदम मानते हुए कड़ी आलोचना की है. रूस के नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान तीसरे विश्व युद्ध को भड़काने के बराबर हैं.

रूस का रुख: तीसरे विश्व युद्ध की आशंका

रूस के लेनिनग्राद समिति के अध्यक्ष लियोनिद स्लट्स्की ने चेतावनी दी है कि अगर कलिनिनग्राद पर हमला हुआ, तो यह रूस पर हमला होगा और रूस अपने सभी क़ानूनी उपायों के तहत इसका जवाब देगा, जिसमें परमाणु हमले का विकल्प भी शामिल है.

साथ ही, सर्गेई मुराटोव ने कहा कि रूस अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी खतरे का सामना करने को तैयार है, लेकिन इस तरह के संघर्ष में कोई विजेता नहीं होगा. आंद्रेई कोलेसनिक, जो कलिनिनग्राद के सांसद हैं, ने भी नाटो को चुनौती दी और कहा कि नाटो में इतनी ताकत नहीं है कि वह रूस से सीधे मुकाबला कर सके.

सैन्य विशेषज्ञ इवान कोनोवालोव ने भी इस क्षेत्र की सामरिक महत्वता पर जोर देते हुए कहा कि कलिनिनग्राद पूरी तरह से रूस के नियंत्रण में है और यह बेहद सुरक्षित है. इस क्षेत्र पर किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई का विरोध किया जाएगा.

रूस की स्थिरता और बढ़ता वैश्विक तनाव

इस स्थिति में, रूस ने अपने आप को एक मजबूत और सुरक्षित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया है, जबकि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और नाटो, ने अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाने की योजना बनाई है. रूस का यह कहना है कि वह यूक्रेन के खिलाफ संघर्ष में मनुष्यता के आधार पर काम कर रहा है, लेकिन नाटो के साथ पूर्ण युद्ध एक अलग मामला होगा.

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