दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर समेत देश के कई राज्यों में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई. जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में एक के बाद एक दो झटके आए, जिससे लोग सहम उठे. वहीं, दिल्ली-एनसीआर में भी लोगों ने अचानक भूकंप के झटके महसूस किए और नोएडा में दफ्तरों के कर्मचारी बाहर निकल आए. रिहायशी इलाकों में भी लोग घरों से बाहर आ गए, लेकिन राहत की बात यह रही कि इस भूकंप में अब तक किसी प्रकार के बड़े नुकसान की खबर नहीं है. इस भूकंप के झटके केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान में भी महसूस किए गए. भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान की सीमा क्षेत्र था, जहां 5.9 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया.
#WATCH | Jammu & Kashmir: An earthquake was felt in Srinagar. Chandeliers and fans were seen moving. pic.twitter.com/iFx5OTZ7uB
— ANI (@ANI) April 3, 2026
भूकंप का केंद्र 71.01 डिग्री पूर्वी देशांतर और 36.52 डिग्री उत्तरी अक्षांश पर था, जबकि इसकी गहराई 175 किलोमीटर थी. इस भूकंप ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले को भी प्रभावित किया, जहां कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई.
दिल्ली-एनसीआर में इस साल यह तीसरी बार है, जब भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. इससे पहले जनवरी में दो बार भूकंप आया था. पहले 19 जनवरी को 2.8 तीव्रता का भूकंप दिल्ली के नॉर्थ इलाके में महसूस हुआ था, जिसके बाद 30 जनवरी को रात में 3.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र दिल्ली के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में था. इन दोनों झटकों में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन इस बार के भूकंप के बाद से लोगों में फिर से चिंता का माहौल है. हालांकि, राहत की बात यह है कि किसी भी स्थान से अब तक कोई बड़ा नुकसान नहीं होने की जानकारी सामने आई है.
भूकंप के कारण और पृथ्वी की प्लेट टेक्टोनिक्स
भूकंप पृथ्वी की सतह का अचानक हिलना या कांपना होता है, जो मुख्य रूप से टेक्टोनिक प्लेटों की गति के कारण होता है. पृथ्वी की बाहरी परत (लिथोस्फीयर) कई बड़ी-बड़ी टेक्टोनिक प्लेटों में बंटी हुई है. ये प्लेटें बहुत धीमी गति से घूमती या खिसकती रहती हैं. जब इन प्लेटों के किनारे घर्षण के कारण अटक जाते हैं, तो तनाव बढ़ने लगता है. जब यह तनाव इतना ज्यादा हो जाता है कि चट्टानें इसे सहन नहीं कर पातीं, तो वे टूटने या खिसकने लगती हैं, जिससे भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जो पृथ्वी की सतह पर कंपन पैदा करती हैं. इस प्रक्रिया को ही हम भूकंप के रूप में अनुभव करते हैं.