अपने ब्रिटेन दौरे के अंतिम दिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक तीखा रुख अपनाया और सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आलोचना की. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने कहा कि उन्हें पुतिन से उम्मीदें थीं, लेकिन उन्होंने विश्वास तोड़ा.
“मैंने सोचा था कि पुतिन से मेरे पुराने संबंध इस युद्ध को रोकने में मदद करेंगे, लेकिन उन्होंने मुझे गहराई से निराश किया,”डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति बनने के बाद जल्द ही शांति समझौता कराने की योजना बनाई थी, लेकिन पुतिन के रुख ने हालात को उलझा दिया.
रूस को भी हो रहा है भारी नुकसान
अपने बयान में ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि रूस खुद भी इस युद्ध में भारी नुकसान झेल रहा है. पुतिन भले ही हमला कर रहे हैं, लेकिन उनके भी हजारों सैनिक मारे जा रहे हैं. ये युद्ध सभी के लिए विनाशकारी साबित हो रहा है. ट्रंप के मुताबिक, युद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां किसी को भी फायदा नहीं हो रहा न रूस को, न यूक्रेन को.
ब्रिटेन यात्रा में ट्रंप का शाही स्वागत
डोनाल्ड ट्रंप इस समय दो दिवसीय ब्रिटेन दौरे पर थे. उन्होंने विंडसर कैसल में किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला से मुलाकात की. उन्होंने ब्रिटेन को "एक शानदार और सुंदर द्वीप" कहकर सराहा और अपने दौरे को “यादगार” बताया. अन्य मुद्दों पर भी बोले ट्रंप संवाददाता सम्मेलन में ट्रंप ने सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति ही नहीं, बल्कि अन्य समसामयिक विषयों पर भी अपनी राय खुलकर रखी.
पुनः अमेरिका में हवा से बनने वाली ऊर्जा को उन्होंने "बहुत महंगा मजाक" बताया और कहा कि यह व्यावहारिक विकल्प नहीं है. टीवी होस्ट जिमी किमेल पर हमला बोलते हुए उन्हें “प्रतिभा रहित इंसान” कहा. उन्होंने यह टिप्पणी किमेल द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणी के जवाब में दी, जो चार्ली किर्क की मौत से जुड़ी थी. उस विवाद के बाद किमेल का शो अस्थायी रूप से ऑफ एयर कर दिया गया है. जो बाइडेन पर कटाक्ष करते हुए ट्रंप ने कहा कि "वे कभी भी होशियार लोगों में नहीं गिने गए."
पुतिन-यूक्रेन युद्ध पर बदला ट्रंप का रुख
गौर करने वाली बात यह रही कि जहां पहले ट्रंप यूक्रेन या बाइडेन प्रशासन को युद्ध के लिए जिम्मेदार मानते थे, वहीं अब उन्होंने अपना रुख बदला है. उन्होंने कहा, रूस इस युद्ध में आक्रामक है, और इसके लिए पुतिन ही जिम्मेदार हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंधों के पक्ष में नहीं हैं. उनका तर्क है कि यदि तेल की वैश्विक कीमतें कम हो जाती हैं, तो पुतिन को आर्थिक दबाव झेलते हुए युद्ध से पीछे हटने को मजबूर होना पड़ेगा.
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