अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के प्रति टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही सियासी बवंडर खड़ा हो गया है. ट्रंप की आर्थिक रणनीतियों को लेकर जहां भारतीय उद्योग जगत में नाराजगी रही है, वहीं अब अमेरिका की राजनीति में भी विरोध के सुर तेज़ हो गए हैं.
हाल ही में अमेरिका के करीब दो दर्जन सांसदों ने ट्रंप को पत्र लिखकर भारत-अमेरिका संबंधों में आई दरार को लेकर चिंता जताई है. इसी कड़ी में डेमोक्रेटिक पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजनयिक रहम इमैनुएल ने भी डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोला है.
रहम इमैनुएल का आरोप: ‘अहंकार और लालच ने रिश्ते खत्म कर दिए’
बराक ओबामा प्रशासन में चीफ ऑफ स्टाफ और जापान में अमेरिका के पूर्व राजदूत रह चुके रहम इमैनुएल ने कहा कि ट्रंप ने अपने अहंकार और पाकिस्तान से मिले कथित आर्थिक लालच में भारत-अमेरिका के बीच चार दशकों से चले आ रहे रणनीतिक संबंधों को तहस-नहस कर दिया. उन्होंने ट्रंप की नीतियों को राजनयिक चूक और रणनीतिक भूल करार देते हुए कहा कि इसका सीधा फायदा चीन को मिला है.
'पाकिस्तान के प्रति नरमी क्यों?'
इमैनुएल ने सवाल उठाया कि ट्रंप बार-बार पाकिस्तान के प्रति नरमी क्यों बरतते हैं. उन्होंने आशंका जताई कि ट्रंप के परिवार को पाकिस्तान से आर्थिक लाभ मिल रहे हैं, जिससे उनके फैसले प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप की यह कोशिश थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुले तौर पर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार का श्रेय दें, जिसे भारत ने खारिज कर दिया.
‘भारत था चीन के खिलाफ सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार’
रहम इमैनुएल ने कहा कि अमेरिका के लिए भारत न केवल तकनीक और निर्माण के क्षेत्र में, बल्कि सुरक्षा और सैन्य साझेदारी के लिहाज से भी एक अहम रणनीतिक भागीदार रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को साथ लेकर चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला किया जा सकता था, लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इन संभावनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया.
“40 साल की मेहनत पर पानी फेर दिया”
अपने साक्षात्कार में इमैनुएल ने यह भी कहा कि ट्रंप ने वह सबकुछ बर्बाद कर दिया, जिसे अमेरिकी सरकारों ने बीते 40 वर्षों में बड़ी मेहनत से बनाया था. उन्होंने कहा कि ट्रंप का मकसद खुद को हीरो बनाना है, चाहे इसके लिए किसी भी रिश्ते को दांव पर क्यों न लगाना पड़े.
रहम इमैनुएल कौन हैं?
रहम इमैनुएल अमेरिका की डेमोक्रेटिक राजनीति के एक अहम चेहरा हैं. वह शिकागो के मेयर, बराक ओबामा के चीफ ऑफ स्टाफ और जापान में अमेरिकी राजदूत जैसे पदों पर रह चुके हैं. उनके बयानों को अमेरिकी विदेश नीति पर गहरा असर डालने वाला माना जाता है.
ट्रंप के बदले सुर भी चर्चा में
इन तमाम आलोचनाओं के बीच डोनाल्ड ट्रंप का भारत को लेकर बदला हुआ रुख भी सुर्खियों में है. कभी वे भारत को "महान देश" और मोदी को "बेहद अच्छे नेता और दोस्त" बताते हैं, तो कभी उनके ही खिलाफ टैरिफ और डिप्लोमैटिक दबाव की नीति अपनाते हैं.
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