तीसरे विश्व युद्ध की आहट! अमेरिका बना रहा दुनिया का सबसे ताकतवर जंगी जहाज, जानें इस बैटलशिप की खासियत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है. इस बार उनका ऐलान समुद्र से जुड़ा है, जहां उन्होंने अपने नाम पर एक नई श्रेणी के जंगी जहाज बनाने की योजना का ऐलान किया है, जिन्हें "ट्रंप-क्लास बैटलशिप" कहा जाएगा.

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वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया है. इस बार उनका ऐलान समुद्र से जुड़ा है, जहां उन्होंने अपने नाम पर एक नई श्रेणी के जंगी जहाज बनाने की योजना का ऐलान किया है, जिन्हें "ट्रंप-क्लास बैटलशिप" कहा जाएगा. यह युद्धपोत अमेरिकी नौसेना के इतिहास में सबसे शक्तिशाली और घातक माने जा रहे हैं. आइए जानते हैं इस युद्धपोत के बारे में विस्तार से, जो समुद्र में अपनी ताकत का लोहा मनवाने के लिए तैयार है.

आकार और ताकत

अमेरिकी नौसेना के मुताबिक, ट्रंप-क्लास बैटलशिप का आकार बेहद विशाल होगा. इसकी लंबाई लगभग 880 फीट तक होगी, जो इसे अब तक के सबसे बड़े सतही युद्धपोतों में से एक बनाएगा. इन युद्धपोतों का वजन 30,000 से 40,000 टन के बीच रहने की उम्मीद है, जो इसे सबसे भारी और शक्तिशाली बनाएगा. अगर तुलना करें तो, द्वितीय विश्व युद्ध के समय के प्रसिद्ध USS मिसूरी की लंबाई 887 फीट थी, जबकि मौजूदा अमेरिकी युद्धपोतों में सबसे बड़ा जुमवाल्ट क्लास डिस्ट्रॉयर है, जिसका वजन केवल 15,000 टन है.

अत्याधुनिक हथियारों से होगा लैस 

ट्रंप-क्लास बैटलशिप की सबसे बड़ी खासियत इसकी अपार मारक क्षमता होगी. इस जहाज में ऐसी मिसाइलें होंगी जो दुश्मन पर पहले के मुकाबले 80 गुना ज्यादा दूरी से हमला कर सकेंगी. इस युद्धपोत में 12 लॉन्च सेल होंगे, जिनसे न्यूक्लियर क्षमता वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें दागी जा सकेंगी. ये मिसाइलें आवाज की गति से पांच गुना तेज होंगी और रास्ते में दिशा बदलकर दुश्मन के डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकेंगी. इसके अलावा, 128 वर्टिकल लॉन्च सेल भी होंगे, जिनसे टॉमहॉक मिसाइल, एंटी-शिप मिसाइल और मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर छोड़े जा सकेंगे.

नई तकनीकी शक्तियां

इस जंगी जहाज में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ताकत से चलने वाले रेलगन लगाए जाएंगे, जो तेज प्रक्षिप्त प्रक्षेपास्त्रों को लॉन्च करेंगे. साथ ही, पांच इंच की पारंपरिक तोपें, लेजर हथियार और छोटे कैलिबर की गन भी इस जहाज का हिस्सा होंगी. ट्रंप का दावा है कि ट्रंप-क्लास बैटलशिप द्वितीय विश्व युद्ध के मुकाबले करीब 100 गुना ज्यादा ताकतवर होगा.

खर्च और बजट की चुनौती

इन युद्धपोतों की ताकत और आकार का अंदाजा उनकी कीमत से लगाया जा सकता है. जहां मौजूदा अर्ले बर्क क्लास डिस्ट्रॉयर की लागत लगभग 2 अरब डॉलर है, वहीं एक ट्रंप-क्लास बैटलशिप की कीमत 15 अरब डॉलर तक जा सकती है. यह उच्च लागत अमेरिकी नौसेना के लिए एक चुनौती हो सकती है, क्योंकि इससे बजट में भारी बढ़ोतरी होगी और इसे सही समय पर पूरा करना मुश्किल हो सकता है.

निर्माण की चुनौतियां

अमेरिकी नौसेना पहले ही अपने शिपबिल्डिंग सिस्टम की गड़बड़ियों को मान चुकी है. कई प्रोजेक्ट समय से पीछे चल रहे हैं और बजट से ज्यादा खर्च हो चुका है. इतना बड़ा जहाज बनाने के लिए नए डॉकयार्ड, अत्यधिक कुशल मजदूर और एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी. इसके अलावा, हर जहाज पर लगभग 650 से 850 नौसैनिक तैनात करने की योजना है, जो अपने आप में एक बड़ी चुनौती है.

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