बॉर्डर पर 100 से ज्यादा मिसाइलें तैनात, तेजी से बना रहा परमाणु हथियार... किस जंग की तैयारी कर रहा चीन?

चीन ने अपनी परमाणु सैन्य क्षमता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ गई है.

China deployed more than 100 nuclear missiles on the border
प्रतिकात्मक तस्वीर/ FreePik

चीन ने अपनी परमाणु सैन्य क्षमता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ गई है. अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन की एक नई ड्राफ्ट रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने मंगोलिया की सीमा के पास स्थित मिसाइल साइलो क्षेत्रों में 100 से अधिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) तैनात कर दी हैं. इस खुलासे की जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के जरिए सामने आई है, जिसने वॉशिंगटन में रणनीतिक हलचल पैदा कर दी है.

रिपोर्ट के अनुसार, ये मिसाइलें DF-31 श्रेणी की ठोस ईंधन से चलने वाली ICBM हैं, जिन्हें तीन अलग-अलग साइलो फील्ड्स में ऑपरेशनल स्थिति में रखा गया है. यह पहली बार है जब इन साइलो में मौजूद मिसाइलों की वास्तविक संख्या और उनकी तैनाती को लेकर इतना स्पष्ट आकलन सामने आया है.

क्या होते हैं मिसाइल साइलो और क्यों हैं अहम?

मिसाइल साइलो जमीन के नीचे बनाए गए अत्यधिक मजबूत और सुरक्षित बंकर होते हैं, जिनका इस्तेमाल लंबी दूरी की बैलिस्टिक और परमाणु मिसाइलों को रखने के लिए किया जाता है. इन संरचनाओं को मोटी कंक्रीट और स्टील से बनाया जाता है ताकि वे दुश्मन के हमलों, यहां तक कि परमाणु हमले को भी सहन कर सकें.

मिसाइल साइलो का सबसे बड़ा रणनीतिक महत्व यह है कि ये किसी देश को ‘सेकंड स्ट्राइक क्षमता’ प्रदान करते हैं. इसका मतलब यह है कि अगर किसी देश पर पहले परमाणु हमला हो भी जाए, तब भी वह जवाबी हमला करने की स्थिति में बना रहता है. इसके अलावा, कई साइलो जानबूझकर खाली रखे जाते हैं, ताकि दुश्मन को यह भ्रम बना रहे कि असली मिसाइलें कहां तैनात हैं.

कितनी तेजी से बढ़ रहा है चीन का परमाणु शस्त्रागार?

पेंटागन के आकलन के मुताबिक, चीन इस समय दुनिया का एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश है, जो सबसे तेज गति से अपने परमाणु हथियारों का आधुनिकीकरण और विस्तार कर रहा है.

  • वर्तमान में चीन के पास लगभग 600 परमाणु वॉरहेड बताए जा रहे हैं.
  • अगर मौजूदा रुझान जारी रहे, तो 2030 तक यह संख्या 1,000 से ज्यादा हो सकती है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसाइल साइलो नेटवर्क, मोबाइल लॉन्च सिस्टम और नई पीढ़ी की ICBM की तैनाती यह संकेत देती है कि चीन की रणनीति केवल क्षेत्रीय रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक स्तर पर शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता विकसित कर रहा है.

हथियार नियंत्रण पर बातचीत के मूड में नहीं चीन

ड्राफ्ट रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन फिलहाल हथियार नियंत्रण (Arms Control) को लेकर किसी भी गंभीर बातचीत के लिए तैयार नहीं दिख रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से चीन, रूस और उत्तर कोरिया के साथ एक व्यापक परमाणु समझौते की बात करते रहे हैं, लेकिन पेंटागन का मानना है कि बीजिंग में ऐसी किसी पहल को लेकर कोई खास रुचि नहीं दिखाई दे रही.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि चीन ने इस तरह की रिपोर्टों को अक्सर “चीन को बदनाम करने और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने की कोशिश” बताकर खारिज किया है.

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