America Advisory:मध्य-पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और बढ़ती हिंसा को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए सख्त ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है. अमेरिकी प्रशासन ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान में मौजूद उसके नागरिक बिना देर किए देश छोड़ दें, क्योंकि मौजूदा हालात किसी भी समय और गंभीर हो सकते हैं.
दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन जनवरी 2026 में पूरे ईरान में फैल चुके हैं. ये आंदोलन गहराते आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक असंतोष के खिलाफ भड़के हैं. अमेरिका की वर्चुअल एंबेसी ने चेतावनी दी है कि ये प्रदर्शन कभी भी हिंसक रूप ले सकते हैं, जिनमें गिरफ्तारियां, गंभीर चोटें और जान जाने का खतरा भी शामिल है.
संचार व्यवस्था ठप, यातायात पर ब्रेक
ईरान सरकार ने हालात पर काबू पाने के लिए मोबाइल नेटवर्क, लैंडलाइन और इंटरनेट सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इससे देशभर में संचार व्यवस्था लगभग ठप हो गई है.कई प्रमुख सड़कें बंद कर दी गई हैं, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हैं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी असर पड़ा है. कई एयरलाइंस ने ईरान के लिए अपनी फ्लाइट्स रद्द या सीमित कर दी हैं, जिससे देश छोड़ना और मुश्किल हो गया है.
अमेरिकी नागरिकों को क्या सलाह
अमेरिकी प्रशासन ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे किसी भी स्थिति में अमेरिकी सरकार की त्वरित मदद पर निर्भर न रहें, क्योंकि ईरान में अमेरिका का कोई दूतावास मौजूद नहीं है. यदि संभव हो, तो जमीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की की ओर सुरक्षित निकलने की कोशिश करें.विशेष रूप से दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी गई है, क्योंकि उन्हें हिरासत में लिए जाने का खतरा अधिक बताया जा रहा है.
ईरान में आंदोलन की भयावह तस्वीर
मौजूदा विरोध प्रदर्शन बीते कई वर्षों में ईरान के सबसे बड़े आंदोलनों में गिने जा रहे हैं. ये 31 प्रांतों तक फैल चुके हैं. प्रदर्शनकारी सीधे तौर पर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और इस्लामी शासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों को गिरफ्तार किया गया है. इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण सटीक आंकड़े सामने आना मुश्किल है, लेकिन कई रिपोर्ट्स में प्रदर्शनकारियों पर सीधी गोलीबारी की बात कही गई है.
अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़ने की आशंका
ईरान सरकार ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ होने का आरोप लगाया है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे आर्थिक बदहाली और मानवाधिकार हनन के खिलाफ जनआक्रोश बता रहे हैं.इस बीच अमेरिका भी दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है और सैन्य विकल्पों का संकेत देकर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं संभले, तो यह संकट पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है.
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