नई दिल्ली: वायु प्रदूषण आजकल दुनिया के विभिन्न हिस्सों में एक गंभीर समस्या बन चुका है. जहां इसके असर का सबसे बड़ा शिकार हमारे फेफड़े होते हैं, वहीं अब एक नई स्टडी में यह भी सामने आया है कि प्रदूषण का दिमाग पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है. खासकर बुजुर्गों में अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों के खतरे को बढ़ाने में प्रदूषण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है. एक नई रिसर्च ने प्रदूषण के दिमागी स्वास्थ्य पर होने वाले असर को और भी स्पष्ट किया है. आइए जानते हैं इस स्टडी के बारे में और यह कैसे वायु प्रदूषण को दिमागी बीमारियों से जोड़ता है.
स्टडी में क्या सामने आया?
अमेरिका में किए गए एक बड़े अध्ययन के अनुसार, प्रदूषण में पाए जाने वाले सूक्ष्म कण (particulate matter) अल्जाइमर जैसी दिमागी बीमारियों के रिस्क को बढ़ाते हैं. इस रिसर्च को Emory University की टीम ने 2.78 करोड़ बुजुर्गों पर किया. 2000 से 2018 तक किए गए इस अध्ययन में 65 साल और उससे अधिक उम्र के नागरिकों को शामिल किया गया. रिसर्च के मुताबिक, प्रदूषण में मौजूद ये सूक्ष्म कण सीधे तौर पर दिमाग तक पहुंचते हैं और ब्रेन फंक्शन पर असर डालते हैं. इन कणों के दिमाग में जाने से सूजन बढ़ती है, जिससे न्यूरो डिसऑर्डर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. खासतौर पर बुजुर्गों में यह रिस्क अधिक है.
प्रदूषण से किसे सबसे ज्यादा खतरा है?
यह रिसर्च इस बात पर भी रोशनी डालती है कि जिन व्यक्तियों को पहले से ही कोई स्वास्थ्य समस्या जैसे स्ट्रोक या हाई ब्लड प्रेशर हो चुका है, उन्हें प्रदूषण के कारण अल्जाइमर का खतरा ज्यादा होता है. हालांकि, प्रदूषण के कारण हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक, और डिप्रेशन जैसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा भी हो सकता है, लेकिन इनकी दर काफी कम है. प्रदूषण के कारण अल्जाइमर का खतरा सबसे अधिक देखा गया है.
रिसर्च में यह भी बताया गया कि प्रदूषण में पाए जाने वाले छोटे-छोटे कण सांस के माध्यम से शरीर में प्रवेश करते हैं और खून तक पहुंच जाते हैं. इसके बाद यह कण दिमाग में सूजन पैदा करते हैं, जिससे न्यूरोडिसऑर्डर और अल्जाइमर जैसे गंभीर रोगों का खतरा बढ़ता है. प्रदूषण के कण दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच संचार को कमजोर कर देते हैं, और इस वजह से मस्तिष्क में "टाउ" प्रोटीन का जमाव होने लगता है, जो धीरे-धीरे याददाश्त पर असर डालता है और अल्जाइमर का कारण बन सकता है.
प्रदूषण से कैसे बचें?
रिसर्च में यह साफ तौर पर कहा गया है कि जिन इलाकों में प्रदूषण अधिक है, वहां रहने वाले लोगों को खास सावधानी बरतने की जरूरत है. प्रदूषण न सिर्फ लंग्स कैंसर और अस्थमा जैसी फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है, बल्कि यह दिमाग को भी नुकसान पहुंचाता है और अल्जाइमर जैसी गंभीर बीमारियों के रिस्क को बढ़ाता है. ऐसे में जिन इलाकों में प्रदूषण ज्यादा है, वहां रहने वाले लोगों को जितना हो सके बाहर की हवा से बचने की कोशिश करनी चाहिए और अपने घर के अंदर हवा को शुद्ध करने के उपायों को अपनाना चाहिए.
ये भी पढ़ें: Sleep Disorder: आधी रात में अचानक खुल जाती है आपकी नींद, जान लें क्या है इसका मतलब?