जब भावनाएं आहत होती हैं, तो लोग सिर्फ शब्दों से नहीं, अपने व्यवहार से जवाब देते हैं. कुछ ऐसा ही हाल है इस समय भारतीय पर्यटकों का, जिन्होंने पाकिस्तान के समर्थन में खुलकर खड़े होने वाले तुर्की और अज़रबैजान को करारा जवाब दिया है. अब कोई नारा नहीं, कोई प्रदर्शन नहीं बल्कि भारतीयों ने अपनी चुप्पी से विरोध जताया है. पर्यटन बहिष्कार बन गया है नया विरोध का तरीका, जो सीधे इन दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है.
अज़रबैजान जो अब तक भारतीय पर्यटकों के लिए एक चमकता हुआ विकल्प था, आज एक गहरी गिरावट का शिकार हो चुका है. जून 2025 में अज़रबैजान पहुंचे भारतीय पर्यटकों की संख्या 66% तक कम हो गई, जो कि एक सीधा संकेत है कि भारतीय अब भावनात्मक फैसले लेने लगे हैं.
जहां पिछले साल जून में 28,315 भारतीय पर्यटक अज़रबैजान गए थे, वहीं इस बार यह संख्या घटकर महज़ 9,934 रह गई. यह गिरावट सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, यह एक राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब है, जिसने दुनिया को बता दिया है कि भारत अब सिर्फ राजनीतिक स्तर पर नहीं, बल्कि आम लोगों के स्तर पर भी अपने सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा.
तुर्की का भी वही हाल: बहिष्कार से उड़ी नींद
तुर्की, जो भारत पर टिप्पणी करने और पाकिस्तान को खुलकर समर्थन देने में पीछे नहीं रहा, उसे भी भारतीयों ने खामोश मगर असरदार जवाब दिया है. जहां मई 2025 में तुर्की में 31,659 भारतीय पर्यटक पहुंचे थे, वहीं जुलाई में यह संख्या घटकर सिर्फ 16,244 रह गई यानी लगभग 44% की गिरावट.
यह वही तुर्की है जिसने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को ड्रोन और रणनीतिक समर्थन देकर भारत की संप्रभुता पर सवाल उठाए थे. अब भारतीयों ने उस समर्थन का जवाब अपने तरीके से दिया है अपना पैसा वहां खर्च न करके.
पाकिस्तान से दोस्ती का खामियाजा भुगतते दोनों देश
अज़रबैजान और तुर्की दोनों ने हाल के समय में पाकिस्तान के साथ नज़दीकी बढ़ाई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख ने बाकू का दौरा किया, त्रिपक्षीय बैठकें हुईं और भारत के खिलाफ एकजुटता जाहिर की गई. ये सभी घटनाएं भारतीय जनमानस में नाराजगी का कारण बन गईं.
एक समय था जब अज़रबैजान का टूरिज्म डिपार्टमेंट भारत को “टॉप टारगेट मार्केट” कहा करता था. लेकिन जब देश के आत्मसम्मान की बात आई, तो भारतीयों ने उस बाजार से खुद ही बाहर निकलने का फैसला कर लिया.
ट्रैवल वेबसाइट्स का भी रुख बदल गया है
पर्यटकों की भावनाओं का असर अब ऑनलाइन ट्रैवल एजेंसियों पर भी साफ नजर आने लगा है. रिपोर्ट के अनुसार, MakeMyTrip और EaseMyTrip जैसी प्रमुख ट्रैवल वेबसाइट्स ने तुर्की और अज़रबैजान के लिए अधिकांश बुकिंग को कम या बंद कर दिया है.
यह कोई सरकारी प्रतिबंध नहीं, बल्कि जनता की ओर से एक सांकेतिक 'डिजिटल बॉयकॉट' है, जो दिखाता है कि अब भारतीय हर मोर्चे पर जागरूक और संवेदनशील हो चुके हैं.
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