चीन-कनाडा पर 'वार', तालिबान से 'मोहब्बत'... सिराजुद्दीन हक्कानी मामले में ट्रंप ने क्यों दिखाई दरियादिली?

वाशिंगटनः खबरें आ रही हैं कि ट्रंप प्रशासन ने हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख सिराजुद्दीन हक्कानी और उसके कुछ करीबी नेताओं के खिलाफ रखे गए इनाम को हटा दिया है.

China-Canada Taliban Why did Trump show generosity in Sirajuddin Haqqani case
डोनाल्ड ट्रंप | Photo: ANI

वाशिंगटनः  अमेरिका ने अफगानिस्तान में तालिबान के प्रमुख धड़े हक्कानी नेटवर्क की एक बड़ी मांग पूरी की है. खबरें आ रही हैं कि ट्रंप प्रशासन ने हक्कानी नेटवर्क के प्रमुख और तालिबान सरकार के गृह मंत्री, सिराजुद्दीन हक्कानी और उसके कुछ करीबी नेताओं के खिलाफ रखे गए इनाम को हटा दिया है. हालांकि, अमेरिका ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. अगर यह सही है तो यह हक्कानी नेटवर्क के लिए बड़ी सफलता होगी. हक्कानी नेटवर्क एक खतरनाक आतंकवादी संगठन है, जिसने अफगानिस्तान में कई आत्मघाती हमले किए हैं, जिनमें भारतीय दूतावास पर हुआ हमला भी शामिल है.

"मोस्ट वांटेड" आतंकवादियों में शामिल

टोलो न्यूज ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक गृह मंत्री के करीबी सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिकी सरकार ने कुछ तालिबान अधिकारियों से इनाम हटा लिया है. सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों पर से इनाम हटाया गया है, उनमें सिराजुद्दीन हक्कानी, अब्दुल अजीज हक्कानी और याह्या हक्कानी शामिल हैं. एफबीआई पिछले दो दशकों से इन आतंकवादियों की तलाश कर रही थी.

एफबीआई की वेबसाइट पर अभी भी सिराजुद्दीन हक्कानी का नाम "मोस्ट वांटेड" आतंकवादियों में है. वेबसाइट पर लिखा है कि "सिराजुद्दीन हक्कानी की गिरफ्तारी के लिए 10 मिलियन डॉलर तक का इनाम दिया जा सकता है." एफबीआई का मानना है कि वह पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान क्षेत्र में छिपा हुआ है और तालिबान और अल कायदा के साथ उसके घनिष्ठ संबंध हैं.

कई हमलों में शामिल होने का आरोप

सिराजुद्दीन हक्कानी पर कई हमलों में शामिल होने का आरोप है, जिनमें 2008 में अफगानिस्तान के काबुल में एक होटल पर हुआ हमला भी शामिल है, जिसमें एक अमेरिकी नागरिक समेत छह लोग मारे गए थे. उसे अफगानिस्तान में अमेरिकी और गठबंधन बलों के खिलाफ हमलों का समन्वय करने और उसमें भाग लेने का भी आरोपी माना जाता है. वह अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या के प्रयास की योजना में भी शामिल था.

अब, ट्रंप प्रशासन अफगानिस्तान में अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता है और तालिबान के दो धड़ों के बीच फूट का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है. एक धड़ा तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे धड़े की कमान सिराजुद्दीन हक्कानी के हाथ में है. ट्रंप की पिछली सरकार के दौरान कतर में तालिबान के साथ समझौता हुआ था, जिसके तहत अगस्त 2021 में अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान से वापस लौटे थे. इस वापसी के बाद अफगानिस्तान की नागरिक सरकार गिर गई और तालिबान ने पूरे देश पर कब्जा कर लिया.

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