कोलकाता : कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा प्रायोजित और सहायता प्राप्त माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में 2016 की भर्ती प्रक्रिया जरिए भर्ती हुए सभी उम्मीदवारों के चयन को कानूनन अमान्य घोषित कर दिया है.
कोर्ट ने स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) को नई भर्ती करने का आदेश दिया है.
अदालत ने कहा- अवैध भर्ती हुए लोग 6 हफ्ते में वापस करें अपना वेतन
कोर्ट ने आगे आदेश दिया कि जो लोग अवैध भर्ती हुए हैं उन्हें छह सप्ताह के भीतर अपना वेतन वापस करना होगा.
राज्यस्तरीय चयन परीक्षा-2016 (एसएलएसटी) के माध्यम से कक्षा 9, 10, 11 और 12 के शिक्षकों और समूह-सी और डी कर्मचारियों की श्रेणियों में एसएससी द्वारा सभी नियुक्तियां जहां अनियमितताएं पाई गईं, उन्हें भी कानूनन अमान्य घोषित कर दिया गया है.
कलकत्ता HC ने प्रशासन को अगले 15 दिनों में नई नियुक्तियों पर कदम उठाने का भी निर्देश दिया है.
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अदालत ने कैंसर से पीड़ित की नौकरी रखी बरकार
इस मामले में अदालत ने एक अपवाद (रेयर मामला) कैंसर पीड़ित सोमा दास के मामले का जिक्र किया है. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि दास की नौकरी सुरक्षित रहेगी.
अधिवक्ता विक्रम बनर्जी ने कहा, "विशेष रूप से, निविदा प्रक्रिया एक ब्लैकलिस्टेड कंपनी, अर्थात् एनवाईएसए को दी गई थी और यह प्रक्रिया अवैध है. अवैध नियुक्तियों की संख्या का पता नहीं लगाया जा सकता है, जिसके मद्देनजर पूरी चयन प्रक्रिया रद्द कर दी गई है. इस अवैध प्रक्रिया के लाभार्थियों को अपना वेतन वापस करना होगा. पश्चिम बंगाल के सभी जिलों के जिला कलेक्टरों को 4 सप्ताह के भीतर वसूली प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है और एक नई निविदा सार्वजनिक रूप से विज्ञापित (एडवर्टाइज) की जानी चाहिए."
उन्होंने कहा, "प्रक्रिया के दौरान, पश्चिम बंगाल राज्य द्वारा एक सुपर-न्यूमेरिकल पद बनाया गया था. अवैध नियुक्तियों के लिए बंगाल सरकार ने उन्हें समायोजित करने की कोशिश की, लेकिन यह पूरी तरह से अवैध था. डिवीजन बेंच ने जांच करने और पता लगाने का निर्देश दिया है कि किसने सुपर-न्यूमेरिकल पोस्ट बनाई, यदि आवश्यक हुआ तो प्रभाव डालने वाले व्यक्ति को सीबीआई द्वारा हिरासत में लिया जाएगा."
SC के निर्देश पर एचसी की खंडपीठ कर रही थी मामले की सुनवाई
अदालत ने 2016 की भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों के चयन में कथित अनियमितताओं से संबंधित याचिकाओं और अपीलों पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया है.
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा गठित खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी.
मामले में सुनवाई 20 मार्च को पूरी हो गई थी और खंडपीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.
बंगाल बीजेपी नेता की गिरफ्तारी के बाद सामने आया मामला
पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) शिक्षक भर्ती घोटाला बंगाल भाजपा नेता पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बाद सामने आया है, जो 23 जुलाई, 2022 को अपनी गिरफ्तारी तक तृणमूल कांग्रेस के नेता के तौर पर ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यरत थे.
इससे पहले 16 फरवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक टीम ने कोलकाता में पार्थ चटर्जी के करीबियों पर छापेमारी की थी.
पूर्व शिक्षा मंत्री की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के कोलकाता आवास से 21 करोड़ रुपये नकद और 1 करोड़ रुपये से अधिक के आभूषण बरामद होने के बाद चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था.
चटर्जी और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) भर्ती घोटाले की जांच का सामना कर रहे हैं.