US Midterm Election Results: अमेरिका की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हरा दिया है. इस जीत के साथ वह अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं. खास बात यह है कि चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब्दुल को 'जिहादी' तक कह दिया था. ट्रंप ने उनकी देश के प्रति वफादारी पर भी सवाल उठाए थे. लेकिन अब चुनावी नतीजों ने पूरी तस्वीर बदल दी है. जिस नेता को ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था, वही अब अमेरिकी सीनेट में पहुंचने जा रहे हैं.
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे सामने आ रहे हैं. सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को कड़ी चुनौती दी है. ऐसे में मिशिगन की यह जीत ट्रंप के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है.
1.27 लाख से ज्यादा वोटों से जीते अब्दुल
मिशिगन सीनेट चुनाव में अब्दुल एल-सैयद को कुल 18,72,595 वोट मिले. उन्हें 50.74 फीसदी मतदाताओं का समर्थन हासिल हुआ. वहीं, रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को 17,45,183 वोट मिले और उनका वोट शेयर 47.29 फीसदी रहा. इस तरह अब्दुल ने 1,27,412 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
डिसीजन डेस्क मुख्यालय (Decision Desk HQ) ने भी उनकी जीत की पुष्टि की है. इस नतीजे के साथ मिशिगन की वह सीनेट सीट डेमोक्रेटिक पार्टी के पास बनी रहेगी, जिसका प्रतिनिधित्व फिलहाल रिटायर हो रहे सीनेटर गैरी पीटर्स कर रहे हैं.
मिस्र मूल के परिवार से आते हैं अब्दुल
42 साल के अब्दुल एल-सैयद का परिवार मूल रूप से मिस्र का रहने वाला है. राजनीति में आने से पहले वह सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर चुके हैं. वह डेट्रॉयट और वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.
साल 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर का चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए थे. बाद में व्हिटमर राज्य की गवर्नर बनीं.
इस बार चुनाव में अब्दुल ने स्वास्थ्य सेवाओं को अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया. वह 'मेडिकेयर फॉर ऑल' योजना के समर्थक हैं. इस योजना के तहत अमेरिका के सभी नागरिकों को सरकार की मदद से स्वास्थ्य सुविधाएं देने की बात कही जाती है.
ट्रंप ने जिहादी और आतंकियों का समर्थक बताया था
अब्दुल एल-सैयद की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने उनके खिलाफ कई विवादित बयान दिए थे. ट्रंप ने उन्हें 'जिहादी' कहा था और आरोप लगाया था कि वह आतंकवादियों का समर्थन करते हैं.
ट्रंप ने यहां तक कहा था कि अब्दुल को सीनेट में प्रवेश करने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना चाहिए. उन्होंने उनकी अमेरिकी संसद में मौजूदगी और देश के प्रति वफादारी पर भी सवाल उठाए थे. ट्रंप के इन बयानों की काफी आलोचना हुई थी. एक पूर्व वरिष्ठ अरब-अमेरिकी सहयोगी ने भी उनकी टिप्पणी पर नाराजगी जताई थी.
अब चुनाव में जीत के बाद ट्रंप के ये बयान फिर चर्चा में आ गए हैं. जिस उम्मीदवार को उन्होंने निशाना बनाया था, वही अब अमेरिका की राजनीति में नई पहचान बनाने जा रहे हैं.
2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है असर
अब्दुल की जीत को सिर्फ मिशिगन तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है. इसे डेमोक्रेटिक पार्टी में प्रगतिशील राजनीति की बढ़ती ताकत के तौर पर भी देखा जा रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं को सभी के लिए उपलब्ध कराने और इजरायल की नीतियों की आलोचना जैसे मुद्दे उनके चुनाव प्रचार का हिस्सा रहे हैं.
उनकी जीत से सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति मजबूत होगी. साथ ही 2028 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है. माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं और दूसरे प्रगतिशील मुद्दों को अपनी राजनीति का अहम हिस्सा बना सकती है.
अब्दुल की जीत से ट्रंप को क्यों लगा झटका?
मिशिगन अमेरिका के उन राज्यों में शामिल है जहां चुनावी मुकाबला काफी करीबी रहता है. इसे स्विंग स्टेट कहा जाता है. यहां मतदाता हर बार किसी एक पार्टी को समर्थन नहीं देते. कभी डेमोक्रेटिक पार्टी जीतती है तो कभी रिपब्लिकन पार्टी.
मिशिगन की सीनेट सीट इसलिए भी अहम थी क्योंकि इसके नतीजे से सीनेट में दोनों पार्टियों की ताकत पर असर पड़ सकता था. फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में बहुमत है और राष्ट्रपति ट्रंप भी इसी पार्टी से हैं. ऐसे में इस सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार की जीत पार्टी के लिए बड़ी कामयाबी है.
अब्दुल का जन्म मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में हुआ था. उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे. वह डॉक्टर हैं और स्वास्थ्य विभाग में अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वह सभी नागरिकों के लिए सरकारी स्वास्थ्य बीमा की वकालत करते हैं. इसके अलावा वह राजनीति में बड़े उद्योगपतियों के पैसे के प्रभाव को कम करने और इजरायल को बिना शर्त अमेरिकी सैन्य मदद देने का विरोध करते हैं.
मिशिगन में मुस्लिम आबादी की भूमिका क्यों अहम?
मिशिगन में अरब और मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है. खासकर डियरबॉर्न इलाके में बड़ी संख्या में अरब मूल के लोग रहते हैं. यहां मस्जिदों के साथ कई जगह अरबी भाषा में बोर्ड भी दिखाई देते हैं. ईद के मौके पर सार्वजनिक छुट्टी भी दी जाती है.
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में इस इलाके से पहले भी मुस्लिम सांसद चुने जा चुके हैं. अब्दुल की जीत ने इस समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को एक नया मुकाम दिया है.
मिशिगन जैसे अहम राज्य से एक मुस्लिम उम्मीदवार का सीनेट तक पहुंचना अमेरिकी राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. यह जीत ट्रंप की उस राजनीति के लिए भी चुनौती है, जिसमें वह मुस्लिम और प्रवासी समुदायों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं. अब्दुल की जीत ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम समुदाय की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है.
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