नई दिल्ली: दिल्ली में प्रदूषण का मौसम इस बार दिवाली से पहले ही जोर पकड़ने लगा है. राजधानी की हवा में बढ़ते जहर के बीच अब पड़ोसी देश पाकिस्तान के खेतों में लगने वाली आग भी चर्चा में है. सैटेलाइट से मिले आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर के दौरान पाकिस्तान के पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं भारतीय पंजाब से चार गुना से भी ज्यादा रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सीमा पार से आने वाला धुआं भी दिल्ली की हवा को खराब करने में भूमिका निभा रहा है?
मौसम की मौजूदा स्थिति इस चिंता को और बढ़ा रही है. उत्तर-पश्चिम दिशा से आने वाली हवाएं खेतों में जलाए जा रहे फसल अवशेषों का धुआं अपने साथ ला सकती हैं. इसका असर पंजाब, हरियाणा से लेकर दिल्ली-NCR तक देखने को मिल सकता है. राजधानी में AQI का तेजी से बढ़ना इसी चिंता की एक वजह है.
बारिश के बाद साफ हुई हवा, फिर लौट आया प्रदूषण
अक्टूबर के आखिरी दिनों में हुई बारिश से दिल्ली को कुछ समय के लिए राहत मिली थी. 30 अक्टूबर को राजधानी का AQI घटकर 60 तक पहुंच गया था. पूरे अक्टूबर का औसत AQI 167 दर्ज किया गया, जिसे पिछले आठ साल में इस महीने का सबसे साफ स्तर बताया गया है.
लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सकी. मौसम बदलते ही प्रदूषण का स्तर फिर चढ़ने लगा. सोमवार को इस सीजन में पहली बार दिल्ली की हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंची. मंगलवार को औसत AQI करीब 330 रहा, जबकि तीन से ज्यादा निगरानी केंद्रों पर यह 400 के पार चला गया. इसका मतलब है कि कुछ इलाकों में हवा 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच चुकी थी.
इस बार दिवाली से पहले ही लागू करना पड़ा GRAP-II
दिल्ली में आमतौर पर दिवाली के आसपास या उसके बाद प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है. पिछले साल 19 अक्टूबर को, दिवाली से एक दिन पहले, AQI पहली बार 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंचा था. इसके बाद GRAP के दूसरे चरण के उपाय लागू किए गए थे.
इस साल स्थिति उससे पहले ही बिगड़ गई. दिवाली से करीब एक सप्ताह पहले AQI 300 के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने GRAP-II के तहत कदम उठाने शुरू कर दिए. सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल और निर्माण स्थलों पर निगरानी जैसे उपाय किए जा रहे हैं.
CPCB के तय मानकों के अनुसार, AQI 301 से 400 के बीच होने पर हवा 'बहुत खराब' और 401 से 500 के बीच होने पर 'गंभीर' मानी जाती है.
सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के पंजाब की बड़ी भूमिका
पाकिस्तान में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 'डॉन' ने नासा के फायर इंफॉर्मेशन फॉर रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (FIRMS) के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. इसके अनुसार, 1 से 29 अक्टूबर के बीच पाकिस्तान के पंजाब में खेतों में आग लगने की 13,241 घटनाएं दर्ज हुईं. इसके मुकाबले भारतीय पंजाब में ऐसी 3,158 घटनाएं सामने आईं. यानी दोनों क्षेत्रों के आंकड़ों में करीब 4.2 गुना का अंतर रहा.
महीने के आखिरी सप्ताह में पाकिस्तान के पंजाब में आग की घटनाएं अचानक बढ़ीं. 24 से 30 अक्टूबर के बीच ही 6,655 मामले दर्ज किए गए. यह अक्टूबर में सामने आई कुल घटनाओं का लगभग आधा है. रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से ज्यादातर आग लाहौर के आसपास के धान उगाने वाले इलाकों में लगीं.
प्रदूषण का असर पाकिस्तान के अपने शहरों में भी दिखा. 2 नवंबर को लाहौर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शीर्ष पर रहा. वहां के कई इलाकों में AQI 500 से ऊपर दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई.
कभी भारत में ज्यादा जलती थी पराली, अब बदले आंकड़े
पराली जलाने के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच आंकड़ों का अंतर हमेशा ऐसा नहीं रहा. साल 2019 में भारतीय पंजाब में खेतों में आग लगाने की घटनाएं पाकिस्तान के पंजाब से करीब पांच गुना अधिक थीं.
इसके बाद तस्वीर में बदलाव आया. 'डॉन' की रिपोर्ट में शामिल विश्लेषण के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच भारतीय पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 95 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, पाकिस्तान के पंजाब में 2019 से 2025 के दौरान ऐसी घटनाएं 33 फीसदी बढ़ीं.
हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर दिल्ली के प्रदूषण का पूरा दोष पाकिस्तान पर नहीं डाला जा सकता. राजधानी की हवा पर स्थानीय वाहनों, निर्माण कार्यों, धूल, औद्योगिक गतिविधियों और भारत के पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने का भी असर पड़ता है. हवा की दिशा और मौसम की स्थिति भी प्रदूषण के स्तर को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
धुआं दिल्ली तक कैसे पहुंच रहा है?
इस समय उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल रही हैं. इन हवाओं के चलते पाकिस्तान और भारतीय पंजाब के खेतों में लगी आग का धुआं दिल्ली-NCR की तरफ आ सकता है. परेशानी सिर्फ धुएं के आने तक सीमित नहीं है. हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषण के कण वातावरण से बाहर नहीं निकल पाते और जमीन के करीब जमा होने लगते हैं.
तापमान में गिरावट के साथ यह समस्या और बढ़ जाती है. उत्तरी मैदानी इलाकों में धीमी हवाओं और मौसम की स्थिति के कारण प्रदूषक लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं. यही वजह है कि दिल्ली में धुंध और स्मॉग की मोटी परत देखने को मिलती है.
दिवाली पर पटाखे बढ़ा सकते हैं परेशानी
आने वाले दिनों में दिल्ली की हवा कैसी रहेगी, यह काफी हद तक मौसम और पराली जलाने की घटनाओं पर निर्भर करेगा. पंजाब और हरियाणा में खेतों में आग लगाने का सिलसिला जारी है. वहीं, चक्रवात 'अरनाब' के कारण उत्तर भारत में हुई बेमौसम बारिश ने फसल कटाई को प्रभावित किया था. कई किसान समय पर फसल नहीं काट पाए. अब कटाई का काम तेज होने के साथ खेतों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
IMD के अनुमान के मुताबिक, अगले चार दिनों तक उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल सकती हैं. इससे खेतों का धुआं दिल्ली की ओर आने की संभावना है. हवा की गति कम रही तो प्रदूषण के कण वातावरण में जमा रहेंगे. नवदीप दहिया ने भी अगले तीन दिनों में AQI के 'गंभीर' स्तर तक पहुंचने की आशंका जताई है.
ऐसे में दिल्ली के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ पराली और स्थानीय प्रदूषण से निपटना है, तो दूसरी तरफ दिवाली पर पटाखों से निकलने वाला धुआं भी हवा को और खराब कर सकता है.