नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को गर्भपात की अनुमति मांगने वाली एक महिला की याचिका पर सुनवाई हुई. महिला छह महीने से अधिक की गर्भवती है और पति के साथ विवाद के चलते गर्भपात कराना चाहती है. हालांकि, उसके पति ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि गर्भ में पल रहे बच्चे पर उसका भी अधिकार है.
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि बलात्कार, यौन उत्पीड़न या भ्रूण में किसी तरह की समस्या होने पर गर्भपात की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है. लेकिन इस मामले की स्थिति अलग है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पति या ससुराल वालों के साथ विवाद और खराब व्यवहार को गर्भपात का आधार बनाया जा सकता है?
गर्भ में पल रहे बच्चे पर पिता के अधिकार का भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने महिला से गर्भपात कराने की जिद छोड़ने को कहा. पीठ ने कहा कि गर्भ में पल रहा बच्चा प्यार की निशानी है और उस पर पिता का भी अधिकार है. पति-पत्नी के बीच अनबन होना अलग बात है, लेकिन केवल इसी वजह से गर्भपात कराना उचित आधार नहीं हो सकता.
कोर्ट ने कहा कि यह न तो यौन उत्पीड़न का मामला है और न ही किसी अकेली महिला की गर्भावस्था से जुड़ा मामला है. अगर पति और ससुराल वालों के साथ झगड़े के कारण कोई महिला गर्भपात कराना चाहे, तो ऐसे में पिता के अधिकारों का क्या होगा?
महिला ने कहा- गर्भपात के बाद लेना चाहती हूं तलाक
सुनवाई के दौरान महिला ने कहा कि वह बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती और अपने पति से तलाक लेना चाहती है. वहीं, पति ने कोर्ट को बताया कि बच्चे के जन्म के बाद वह उसकी देखभाल करने और उसे अपने पास रखने के लिए तैयार है. उसने अदालत से गर्भपात की अनुमति नहीं देने की अपील की.
मामले में पति की ओर से महिला के चरित्र को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी विवाद सामने आया. इस पर पीठ ने महिला से कहा कि वह सुलह की दिशा में पहला कदम उठाते हुए हलफनामा दाखिल करे और अपने सभी आरोप वापस ले. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की है.
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