
रथ यात्रा से पहले 15 दिनों तक क्यों बंद रहते हैं जगन्नाथ मंदिर के कपाट? जानिए अनसर काल की रहस्यमयी और धार्मिक परंपरा

स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के जल से भव्य अभिषेक किया जाता है. यह रथ यात्रा से पहले होने वाली सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है.

मान्यता है कि इस दिव्य स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को ज्वर हो जाता है. इसी कारण वे 15 दिनों तक विश्राम करते हैं और इस दौरान भक्तों को उनके दर्शन नहीं होते.

इन 15 दिनों को अनसर काल कहा जाता है. इस अवधि में श्रीमंदिर के गर्भगृह के कपाट बंद रहते हैं और भगवान का विशेष उपचार किया जाता है.

अनसर काल में भगवान को सामान्य भोग नहीं लगाया जाता उनकी सेवा में काढ़ा, जड़ी-बूटियां और आयुर्वेदिक औषधियों से तैयार विशेष भोग अर्पित किया जाता है.

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ ने अपने परम भक्त माधव दास की बीमारी अपने ऊपर ले लिया था इसी घटना की स्मृति में अनसर काल की परंपरा निभाई जाती है.

15 दिन पूरे होने के बाद भगवान स्वस्थ होकर नवयौवन दर्शन देते हैं . इसके बाद वे भव्य रथ यात्रा के लिए अपने भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसका लाखों श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करते हैं.