Zelenskyy On Trump-Putin Meet: यूक्रेन में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए एक नई कूटनीतिक पहल की सुगबुगाहट तेज हो गई है. हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में संभावित रूप से होने वाली पुतिन-ट्रंप वार्ता के बीच अब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी संकेत दिए हैं कि अगर उन्हें आमंत्रित किया गया, तो वह इस बहुप्रतीक्षित शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए तैयार हैं.
जेलेंस्की का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध पर दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए बुडापेस्ट में मिलने की घोषणा की है. ट्रंप ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि वह इस लंबी लड़ाई को खत्म करने के लिए पुतिन से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करेंगे.
वार्ता के लिए तैयार, लेकिन हंगरी पर उठाए सवाल
20 अक्टूबर को पत्रकारों से बातचीत करते हुए जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि, "अगर मुझे बुडापेस्ट में आमंत्रित किया जाता है और अगर यह बातचीत किसी ऐसे प्रारूप में होती है जिसमें हम तीनों मैं, ट्रंप और पुतिन शामिल हों या फिर शटल डिप्लोमेसी के रूप में, तो मैं किसी भी रूप में सहमत होने को तैयार हूं."
हालांकि, उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि यह शिखर वार्ता हंगरी में क्यों हो रही है.जेलेंस्की ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की आलोचना करते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि एक ऐसा प्रधानमंत्री, जो हर मोर्चे पर यूक्रेन का विरोध करता है, वो हमारे लिए कोई सकारात्मक योगदान कर सकता है."
पुतिन-ट्रंप की वार्ता पर दुनियाभर की निगाहें
डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच यह प्रस्तावित वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब यूक्रेन युद्ध को शुरू हुए साढ़े तीन साल से अधिक हो चुके हैं. युद्ध ने यूरोप की सुरक्षा संरचना, वैश्विक तेल और अनाज आपूर्ति, और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है.
ट्रंप ने बीते हफ्ते स्पष्ट किया कि वे "एक बार फिर वार्ता के ज़रिए शांति" की संभावना तलाशना चाहते हैं. इससे पहले भी उन्होंने अलास्का में एक शिखर वार्ता की मेज़बानी की थी, लेकिन वह प्रयास बेनतीजा रहा.
बुडापेस्ट को लेकर क्यों है विवाद?
बुडापेस्ट को वार्ता स्थल के तौर पर चुनना अपने आप में विवादास्पद है. हंगरी के प्रधानमंत्री ओरबान पर लंबे समय से रूस समर्थक होने और यूरोपीय यूनियन की यूक्रेन नीति के विरोध का आरोप लगता रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बुडापेस्ट में यह त्रिपक्षीय या द्विपक्षीय वार्ता होती है, तो यह ना सिर्फ युद्ध की दिशा बदल सकती है, बल्कि यह पश्चिमी देशों के बीच नई राजनयिक समीकरणों को भी जन्म दे सकती है.
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