हिंदुओं को बर्दाश्त करते हैं… जरदारी के बयान से मचा बवाल, पाकिस्तान की सोच पर उठे सवाल

Asif Ali Zardari On Hindu: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ‘अखंड भारत’ और पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर चर्चा तेज हो गई है. जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की सोच की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय ‘अखंड भारत’ में विश्वास रखते हैं, जबकि पाकिस्तान की सोच दूसरे धर्मों के लोगों को स्वीकार करने और उन्हें सहने की है.

Zardari statement sparks an uproar questions raised about Pakistan mindset
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Asif Ali Zardari On Hindu: पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने ‘अखंड भारत’ और पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिस पर चर्चा तेज हो गई है. जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की सोच की तुलना करते हुए कहा कि भारतीय ‘अखंड भारत’ में विश्वास रखते हैं, जबकि पाकिस्तान की सोच दूसरे धर्मों के लोगों को स्वीकार करने और उन्हें सहने की है.

उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश में हिंदू आबादी आजाद है और वे यहां रहना पसंद करेंगे. हालांकि, उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं.

जरदारी ने अखंड भारत को लेकर क्या कहा?

जरदारी ने कहा कि भारतीय ‘अखंड भारत’ की सोच में विश्वास रखते हैं. इसके मुकाबले पाकिस्तान की मुस्लिम सोच दूसरों को स्वीकार करने और उन्हें साथ लेकर चलने की है. उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं का भी जिक्र किया. जरदारी के मुताबिक, देश में करीब 4 फीसदी हिंदू आबादी रहती है और वे पूरी तरह आजाद हैं.

राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत की तुलना में पाकिस्तान में रहना ज्यादा पसंद करेंगे. हालांकि, उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति को लेकर बहस शुरू हो गई है.

हिंदुओं के पलायन को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया?

जरदारी के दावों के बीच पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति पर अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों का भी जिक्र हो रहा है. यूरोपीय कंट्री ऑफ ओरिजिन इंफॉर्मेशन नेटवर्क यानी ECOI की रिपोर्ट में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने आने वाली समस्याओं का उल्लेख किया गया है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धार्मिक उत्पीड़न और बढ़ती कट्टरता की वजह से हर साल बड़ी संख्या में हिंदू पाकिस्तान छोड़ने को मजबूर होते हैं. इनमें से कई लोग भारत का रुख करते हैं. पलायन करने वाले हिंदुओं में बड़ी संख्या सिंध प्रांत से बताई जाती है. सिंध पाकिस्तान का वह इलाका है जहां देश की सबसे बड़ी हिंदू आबादी रहती है.

‘बर्दाश्त’ शब्द पर क्यों उठे सवाल?

जरदारी के बयान में ‘बर्दाश्त’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ रहे हैं. आलोचकों का कहना है कि किसी देश के राष्ट्रपति का अपने ही नागरिकों के लिए ‘बर्दाश्त’ जैसे शब्द का इस्तेमाल करना अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता पैदा करता है.

पाकिस्तान का संविधान अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा की बात करता है. लेकिन दूसरी तरफ वहां इस्लाम को राज्य का आधिकारिक धर्म माना गया है. ऐसे में जरदारी का बयान यह सवाल खड़ा करता है कि पाकिस्तान में हिंदुओं और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों को बराबर नागरिक के तौर पर किस तरह देखा जाता है.

पाकिस्तान में कितने हिंदू रहते हैं?

पाकिस्तान में हिंदू आबादी को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं. 2023 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 52 लाख हिंदू रहते हैं. पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़ों में कुल हिंदू आबादी करीब 52.1 लाख बताई गई है. इसमें हिंदू जाति और अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज लोग भी शामिल हैं.

यह आंकड़ा राष्ट्रपति जरदारी की ओर से बताए गए 3 से 4 फीसदी के आंकड़े से अलग है. पाकिस्तान में हिंदू आबादी मुख्य रूप से सिंध प्रांत में रहती है. यहां कई जिलों में हिंदू समुदाय की बड़ी संख्या मौजूद है.

सिर्फ हिंदू ही नहीं, दूसरे अल्पसंख्यक भी परेशान

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों से जुड़े सवाल केवल हिंदू समुदाय तक सीमित नहीं हैं. कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने ईसाई और अहमदिया समुदाय की स्थिति पर भी चिंता जताई है. अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी USCIRF की रिपोर्टों में पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और हमलों का जिक्र किया गया है.

रिपोर्टों के अनुसार, ईसाई और अहमदिया समुदाय को भी कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा हिंदू और ईसाई लड़कियों के जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े मामले भी लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं.

ऐसे में जरदारी के ताजा बयान के बाद एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है. एक तरफ पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों को अधिकार देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में उनके सामने मौजूद चुनौतियों की तस्वीर अलग नजर आती है.

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