चीन मिडिल ईस्ट में भूमिका निभाने के लिए तैयार... BRICS समिट के मंच से बोले जिनपिंग

BRICS Summit 2026: दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर अहम बयान दिया.

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BRICS Summit 2026: दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर अहम बयान दिया. शनिवार (12 सितंबर, 2026) को सदस्य देशों को संबोधित करते हुए उन्होंने ब्रिक्स समूह से मिडिल ईस्ट के संघर्ष में शांति लाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया. शी ने कहा कि चीन मध्य पूर्व और खाड़ी क्षेत्रों में शांति और स्थिरता लाने में अपनी उचित भूमिका निभाना चाहता है और इसके लिए दूसरे सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार है.

युद्ध से लोगों को भारी नुकसान: शी जिनपिंग

चीन की सरकारी न्यूज चैनल सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन इस भूमिका में अन्य ब्रिक्स सदस्यों के साथ मिलकर काम करेगा. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों के लिए सही नहीं है और इससे पूरे इलाके के लोगों को भारी नुकसान हुआ है. शी ने यह भी कहा कि चीन अगले साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता संभालेगा और 19वें ब्रिक्स समिट की मेजबानी करेगा.

7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे शी जिनपिंग का यह सात साल बाद पहला भारत दौरा है. ऐसे में ब्रिक्स मंच से पश्चिम एशिया को लेकर दिया गया उनका बयान काफी अहम माना जा रहा है. भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का पहला दिन उपलब्धियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा और सभी सदस्य देशों ने संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति जताई.

मतभेदों के बावजूद संयुक्त बयान पर बनी सहमति

ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच कई अहम और विवादित मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए, लेकिन भारत ने सकारात्मक कूटनीति के जरिए इन मतभेदों को दूर करने का प्रयास किया. इसके बाद सुबह चार बजे तक चली बातचीत के बाद सभी सदस्य देशों के बीच संयुक्त बयान पर सहमति बन गई. यह सहमति ऐसे समय में बनी, जब समूह के भीतर पश्चिम एशिया से जुड़े कई मुद्दों पर अलग-अलग राय मौजूद थी.

ईरान, सऊदी अरब और UAE की मौजूदगी अहम

सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त बयान पर सहमति इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ब्रिक्स के सदस्य देश हैं और पश्चिम एशिया के कई मुद्दों को लेकर इनके बीच काफी मतभेद हैं. इसके बावजूद तीनों देशों समेत सभी सदस्य देशों का एक साझा बयान पर सहमत होना भारत की कूटनीतिक कोशिशों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

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