चीन ने दी धमकी तो आगबबूला हुआ जापान, पहुंच गया UN; क्या छिड़ेगी नई जंग!

एशिया के दो सबसे प्रभावशाली देशों चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ताइवान को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में चल रही खटास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुलकर सामने आ रही है. 

Xi jinping action on letter over clash with china
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एशिया के दो सबसे प्रभावशाली देशों चीन और जापान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. ताइवान को लेकर दोनों देशों के रिश्तों में चल रही खटास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुलकर सामने आ रही है. 

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा हाल ही में दिया गया बयान इस विवाद की जड़ बन गया, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि “यदि चीन ताइवान पर सैन्य हमला करता है, तो यह जापान के अस्तित्व के लिए खतरा होगा और ऐसी स्थिति में जापान सामूहिक आत्मरक्षा का अधिकार इस्तेमाल कर सकता है.”जापान के इस बयान से चीन आगबबूला हो गया और उसने इस मुद्दे को सीधे संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सामने रख दिया.

चीन ने यूएन में दर्ज कराई आपत्ति  ‘जापान का बयान बेहद खतरनाक’

चीनी स्थायी प्रतिनिधि फू कोंग ने UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक औपचारिक पत्र भेजा है. इस पत्र में चीन ने जापानी प्रधानमंत्री के ताइवान पर दिए गए बयान को “भ्रामक, गैर-जिम्मेदाराना और युद्धोत्तर विश्व व्यवस्था के खिलाफ” बताया. चीन का आरोप है कि ताकाइची के बयान ने 1945 के बाद पहली बार जापान को ताइवान के सैन्य मुद्दों से जोड़ दिया है, जिसे वह “खतरनाक खेल” मानता है.

जापान के बयान के बाद चीन की सख्त कार्रवाई

ताकाइची की टिप्पणी के बाद चीन ने जापान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए जापानी सीफूड आयात पर पुनः प्रतिबंध लगाया. अपने नागरिकों के लिए जापान यात्रा के खिलाफ चेतावनी जारी की यूएन तक मामला ले जाकर वैश्विक मंच पर दबाव बनाया. चीन का कहना है कि जापान जानबूझकर ताइवान मुद्दे में आग लगाने की कोशिश कर रहा है, जबकि यह मामला उसकी “आंतरिक संप्रभुता” से जुड़ा है.

फू कोंग का तीखा आरोप  “यह 1.4 अरब चीनी नागरिकों का अपमान”

चीन द्वारा यूएन को भेजे गए पत्र में कहा गया. ताकाइची का बयान अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.यह द्वितीय विश्व युद्ध के पीड़ित एशियाई देशों के लिए अपमान है.जापान को अपनी “युद्धकालीन आक्रामकता” को ध्यान में रखते हुए ज्यादा जिम्मेदारी दिखानी चाहिए.यदि जापान ताइवान पर सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो चीन इसे “आक्रमण” मानेगा. चीन ने यहां तक कह दिया कि “जापान सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए पूरी तरह अयोग्य है.” यह पत्र अब संयुक्त राष्ट्र महासभा के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में सभी देशों को भेजा जाएगा.

जापान का पलटवार  “हम अपना बयान वापस नहीं लेंगे”

चीन की सख्ती के बीच जापान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. टोक्यो ने साफ कर दिया है कि “हमारी टिप्पणी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं पर आधारित है. इसे वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता.” जापान का तर्क है कि ताइवान पर हमला पूरे पूर्वी एशिया की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा, जिसमें जापान सीधे प्रभावित होगा.

ताइवान सवाल पर टकराव कहां जा रहा है?

यह विवाद सिर्फ दो देशों का नहीं है. ताइवान की सुरक्षा. एशिया में शक्ति संतुलन. अमेरिका-जापान बनाम चीन का रणनीतिक खेल. इन सभी मुद्दों को यह बयान और चीन की प्रतिक्रिया और अधिक विस्फोटक बना रहे हैं. स्पष्ट है कि ताइवान को लेकर टकराव अब कूटनीति से हटकर वैश्विक स्तर की राजनीतिक भिड़ंत बन गया है. चीन UN में जा चुका है. जापान पीछे हटने को तैयार नहीं और ताइवान इस संघर्ष का केंद्र बना हुआ है.

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