विश्व युद्ध 3 की शुरुवात! ईरान ने ब्रिटिश सेना को बनाया निशाना, दागी कई मिसाइलें; पीएम स्टार्मर का बयान आया सामने

Iran Attack On Britain Army: मध्य-पूर्व में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. इसी बीच एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है, क्या ब्रिटेन भी इस संघर्ष में शामिल हो गया है या वह सिर्फ दूरी बनाकर स्थिति पर नजर रख रहा है.

World War 3 begins Iran targeted the British Army fired several missiles PM Starmer statement
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Iran Attack On Britain Army: मध्य-पूर्व में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. इसी बीच एक बड़ा सवाल लगातार उठ रहा है, क्या ब्रिटेन भी इस संघर्ष में शामिल हो गया है या वह सिर्फ दूरी बनाकर स्थिति पर नजर रख रहा है.

तनाव के बीच साइप्रस में स्थित ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर दो मिसाइलें दागी गईं. हालांकि इस हमले में कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने यह जरूर साफ कर दिया कि क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य ठिकाने भी अब खतरे से बाहर नहीं हैं. इस तरह की घटनाएं पूरे इलाके में असुरक्षा की भावना को और बढ़ा रही हैं.

ब्रिटेन का आधिकारिक रुख

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि उनका देश ईरान पर हुए अमेरिकी-इजरायली हमलों का हिस्सा नहीं है. उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की भूमिका पूरी तरह रक्षात्मक है और उसका मकसद सिर्फ अपने नागरिकों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. आपात बैठक के बाद उन्होंने यह भी कहा कि सरकार हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार है.

क्षेत्र में सक्रिय ब्रिटिश सेना

प्रधानमंत्री के अनुसार, ब्रिटिश सेनाएं इस समय मध्य-पूर्व में सक्रिय हैं, लेकिन उनका कार्य आक्रामक नहीं बल्कि रक्षात्मक अभियानों तक सीमित है. उन्होंने बताया कि ब्रिटिश लड़ाकू विमान लगातार निगरानी कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम हैं. यह भी स्पष्ट किया गया कि ब्रिटेन अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ही अपने कदम उठा रहा है और किसी भी प्रकार की सीधी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है.

मध्य-पूर्व में मजबूत सैन्य मौजूदगी

भले ही ब्रिटेन ने सीधे हमलों में हिस्सा न लिया हो, लेकिन उसकी सैन्य उपस्थिति इस पूरे क्षेत्र में काफी मजबूत है. दोहा के पास स्थित अल उदैद एयरबेस पर टाइफून लड़ाकू विमानों की तैनाती की गई है, जिनका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. इसके अलावा बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और साइप्रस में भी ब्रिटेन के सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जो उसे रणनीतिक रूप से मजबूत बनाते हैं.

ईरान पर ब्रिटेन का नजरिया

प्रधानमंत्री स्टार्मर ने अपने बयान में ईरान की नीतियों पर चिंता जताते हुए कहा कि उसे परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उन्होंने इसे ब्रिटेन और उसके सहयोगियों की प्राथमिकता बताया. हालांकि उन्होंने अमेरिकी-इजरायली हमलों पर सीधी आलोचना नहीं की, लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जरूर व्यक्त की.

डिएगो गार्सिया की भूमिका

डिएगो गार्सिया भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा का केंद्र बना हुआ है. यह ब्रिटेन और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा है, जहां से लंबी दूरी के बमवर्षक विमान आसानी से मध्य-पूर्व तक पहुंच सकते हैं.

हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने इस अड्डे का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए करने की अनुमति नहीं दी है, जिससे यह साफ होता है कि ब्रिटेन फिलहाल सीधे टकराव से बचना चाहता है.

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