World Spine Day 2025: हर साल 16 अक्टूबर को 'वर्ल्ड स्पाइन डे' मनाया जाता है. इस दिन का उद्देश्य लोगों को रीढ़ की हड्डी की सेहत और उससे जुड़ी बीमारियों के प्रति जागरूक करना है. आज की दौड़ती-भागती जिंदगी में, जहां घंटों कंप्यूटर या मोबाइल पर काम करना सामान्य हो गया है, वहीं पीठ और गर्दन का दर्द भी आम परेशानी बनती जा रही है.
कई बार हम इस दर्द को नजरअंदाज कर देते हैं या मामूली समझकर घरेलू उपायों से निपटने की कोशिश करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सामान्य लगने वाला पीठ दर्द असल में किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा कर सकता है? चलिए जानते हैं, वो कौन-सी स्थितियां हैं जब पीठ दर्द को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.
1. अचानक और तीव्र दर्द को नजरअंदाज न करें
अगर आपकी पीठ में दर्द हल्का-फुल्का नहीं बल्कि तेज, अचानक और चुभने वाला हो, तो यह महज मांसपेशियों की थकान नहीं, बल्कि लिगामेंट में चोट या किसी आंतरिक समस्या का संकेत हो सकता है. ऐसे में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है.
2. जब दर्द कूल्हे या पैरों तक फैल जाए
कई बार पीठ में शुरू हुआ दर्द पैरों या कूल्हों तक फैलने लगता है. इसे मेडिकल भाषा में ‘रेडिएटिंग पेन’ कहा जाता है, जो अक्सर नसों पर दबाव पड़ने के कारण होता है. अगर समय पर इलाज न हो, तो यह स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्क जैसी जटिल स्थितियों में बदल सकता है.
3. पैरों में कमजोरी या झुनझुनी होना
अगर चलते समय पैरों में बार-बार कमजोरी, सुन्नपन या झुनझुनी महसूस हो, तो इसे भी नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. यह साइटिका या स्पाइनल स्टेनोसिस जैसी स्थितियों की तरफ इशारा कर सकता है, जहां रीढ़ की नसों पर गंभीर दबाव बनता है.
4. पेशाब या मल पर नियंत्रण खत्म होना
पीठ दर्द के साथ अगर आप महसूस करें कि आपको पेशाब या मल पर कंट्रोल नहीं रह रहा, तो यह रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी हो सकती है, जैसे कौडा इक्विना सिंड्रोम, डिस्काइटिस या मेनिन्जाइटिस. इस स्थिति में तुरंत इलाज जरूरी है.
5. कूल्हे या जननांगों में सुन्नता (Saddle Anaesthesia)
अगर किसी व्यक्ति को कूल्हे, जांघों के अंदरूनी हिस्से या जननांगों में सुन्नता महसूस हो रही है, तो यह ‘सैडल एनेस्थेसिया’ कहलाती है, जो रीढ़ की हड्डी में गहरी नसों के दबने का लक्षण हो सकता है.
रीढ़ और पीठ को हेल्दी रखने के आसान टिप्स
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