World Boxing Cup Finals: भारत के लिए एक ऐतिहासिक पल सामने आया है जब विश्व मुक्केबाजी कप 2025 के फाइनल मुकाबलों में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने पांच स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया. ग्रेटर नोएडा के विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में हुए इस शानदार मुकाबले में निकहत जरीन, मीनाक्षी हुड्डा, प्रीति पवार, अरुंधति और नूपुर शेओरन ने अपनी शानदार जीत से पूरे देश को गर्व महसूस कराया. आइए जानते हैं इन शानदार प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों के बारे में.
निकहत जरीन ने जीता स्वर्ण
निकहत जरीन (51 किग्रा) ने अपने शानदार खेल से भारतीय टीम को पहला स्वर्ण दिलाया. उन्होंने चीनी ताइपे की मुक्केबाज जुआन यी गुओ को हराकर गोल्ड जीता. यह जीत भारतीय मुक्केबाजी में एक और नई उपलब्धि जुड़ने की ओर इशारा करती है. इस ऐतिहासिक जीत के बाद निकहत ने अपनी कड़ी मेहनत और संघर्ष की सराहना की.
मीनाक्षी हुड्डा की बेहतरीन जीत
मीनाक्षी हुड्डा (48 किग्रा) ने उज्बेकिस्तान की फोजिलोवा फारजोना को 5-0 से हराकर स्वर्ण पदक जीता. मीनाक्षी की जीत ने सभी को प्रभावित किया और उनके लिए यह एक शानदार उपलब्धि थी. मैच के बाद मीनाक्षी ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं और मैं अपने डिस्ट्रिक्ट कोच विजय हुड्डा को धन्यवाद देना चाहूंगी, जिन्होंने हमेशा मेरा समर्थन किया."
प्रीति पवार ने किया कमाल
इसी प्रकार प्रीति पवार (54 किग्रा) ने भी इटली की सिरीन चाराबी को 5-0 से हराकर भारत के खाते में एक और स्वर्ण डाला. प्रीति की जीत ने भारतीय मुक्केबाजी को और भी मजबूती प्रदान की और उनकी कड़ी मेहनत को मान्यता दी.
अरुंधति चौधरी की शानदार जीत
अरुंधति चौधरी (70 किग्रा) ने भी अपनी जीत से भारतीय टीम को गर्व महसूस कराया. उन्होंने उज्बेकिस्तान की जोकिरोवा अजीजा को 5-0 से हराकर भारत का तीसरा स्वर्ण पदक जीता. अरुंधति की यह जीत देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
नूपुर शेओरन का स्वर्ण पदक
नूपुर शेओरन (80 किग्रा) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए उज्बेकिस्तान की सोटिम्बोएवा ओल्टिनोय को 5-0 से हराकर चौथा स्वर्ण भारत के नाम किया. नूपुर की जीत से टीम इंडिया का उत्साह और भी बढ़ा और उन्होंने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला मुक्केबाजों की ताकत अब वैश्विक स्तर पर महसूस की जा रही है.
कुल मिलाकर भारत ने जीते पांच स्वर्ण पदक
इस तरह से, भारतीय महिला मुक्केबाजों ने कुल पांच स्वर्ण पदक जीतकर न केवल देश को गौरवांवित किया, बल्कि विश्व मुक्केबाजी कप में भारत के दबदबे को भी साबित किया. इन खिलाड़ियों ने साबित किया कि भारतीय महिला खिलाड़ी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं और उनका हौंसला और संघर्ष हर मुकाम पर विजयी हो सकता है.
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