'इस्लामिक NATO' के पहले सैन्य कमांडर बनेंगे असीम मुनीर? पाकिस्तान-तुर्की-सऊदी समझौते से उठे सवाल

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए सैन्य समझौते को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. तुर्की ने कहा है कि इस समझौते की गवर्निंग बॉडी में तीनों देशों के सैन्य प्रमुख शामिल होंगे.

Will Asim Munir become the commander of Islamic NATO Pakistan Saudi Arabia Turkey
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अंकारा: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए सैन्य समझौते को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है. तुर्की ने कहा है कि इस समझौते की गवर्निंग बॉडी में तीनों देशों के सैन्य प्रमुख शामिल होंगे. इसके बाद सवाल उठने लगा है कि क्या पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर इस नए गठबंधन के पहले सैन्य कमांडर बन सकते हैं.

तीनों देशों की सेनाओं में असीम मुनीर सबसे वरिष्ठ और अनुभवी सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि अगर इस गठबंधन में किसी सैन्य कमांडर की नियुक्ति होती है तो असीम मुनीर का नाम सबसे आगे हो सकता है.

पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की समझौते की NATO से तुलना

रॉयटर्स के मुताबिक, तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने सैन्य गठबंधन की व्यवस्था में तीनों देशों के सैन्य प्रमुख भी शामिल होंगे.

इससे पहले तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान ने कहा था कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौता तकनीकी रूप से NATO के अनुच्छेद 5 जैसा है. NATO के इस नियम के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमला होने को सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है.

गठबंधन के कामकाज के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई जाएगी और इसका सामान्य सचिवालय सऊदी अरब में होगा.

मक्का समझौते में शामिल होंगे सेना प्रमुख

तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस व्यवस्था में तीनों देशों के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख शामिल होंगे. इसके साथ ही तीनों देश समझौते के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास भी करेंगे.

मंत्रालय के अनुसार, रणनीतिक और सैन्य स्तर पर तीनों देशों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए एक व्यवस्था तैयार की जाएगी. इसमें रक्षा और विदेश मंत्रियों के साथ जनरल स्टाफ प्रमुख या सशस्त्र बलों के कमांडर शामिल होंगे.

तीनों देश बढ़ाएंगे सैन्य सहयोग

तुर्की के बयान से संकेत मिलता है कि तीनों देश अपनी सेनाओं के बीच सहयोग और तालमेल को और मजबूत करना चाहते हैं. इसके तहत थल सेना, नौसेना और वायु सेना के साथ एयर डिफेंस और बिना पायलट वाले सिस्टम को लेकर भी संयुक्त अभ्यास किए जाएंगे.

इसके अलावा रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है. इसमें सिर्फ हथियार और सैन्य सामान की खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि नई तकनीक का विकास, संयुक्त उत्पादन और लंबे समय तक रखरखाव से जुड़ा सहयोग भी शामिल है.

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए सैन्य गठबंधन में असीम मुनीर को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी. हालांकि, अभी तक उन्हें कमांडर बनाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

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