सावन का महीना आते ही बड़ी संख्या में लोग मांस, मछली और शराब का सेवन छोड़ देते हैं. आमतौर पर इसे धार्मिक परंपरा और भगवान शिव की पूजा से जोड़कर देखा जाता है. लेकिन इसके पीछे सिर्फ आस्था ही नहीं, स्वास्थ्य से जुड़ी कई वैज्ञानिक वजहें भी हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है. इससे बैक्टीरिया, वायरस और दूसरे सूक्ष्म जीव तेजी से पनपते हैं. ऐसे में खान-पान में थोड़ी सावधानी रखने से कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है.
विज्ञान क्या कहता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के दौरान नमी बढ़ने से भोजन जल्दी खराब होने लगता है. खासकर मांस, मछली और दूसरे पशु उत्पादों में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं.
अगर ऐसे खाद्य पदार्थ ठीक तरह से सुरक्षित या पकाए नहीं गए हों तो फूड पॉइजनिंग, पेट का संक्रमण, उल्टी, दस्त, बुखार और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
प्रजनन का मौसम भी है मानसून
बारिश का मौसम कई जीवों के प्रजनन का समय माना जाता है. इस दौरान मछलियां और कई दूसरे जीव अंडे देते हैं या प्रजनन प्रक्रिया में होते हैं.
इसी वजह से कई राज्यों में हर साल कुछ समय के लिए समुद्र में मछली पकड़ने पर रोक भी लगाई जाती है, ताकि समुद्री जीवों की संख्या बनी रहे और पर्यावरण का संतुलन खराब न हो.
मछली खाने में क्यों बरतें सावधानी?
मानसून के दौरान समुद्री पानी और नदियों में कई तरह के बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं. ऐसे में अगर मछली संक्रमित हो या सही तरीके से सुरक्षित न रखी गई हो, तो उसे खाने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
इसी कारण विशेषज्ञ इस मौसम में सीफूड खाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं.
सावन में मीट से परहेज क्यों?
बारिश के मौसम में शरीर की पाचन क्षमता पहले की तुलना में कुछ कमजोर हो सकती है. मांस को पचाने में सामान्य भोजन की तुलना में ज्यादा समय लगता है.
अगर मीट लंबे समय तक खुले में रखा जाए या सही तापमान पर सुरक्षित न रखा जाए तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं. ऐसा भोजन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
शराब से दूरी रखना क्यों बेहतर?
विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून में शराब पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.
इसके अलावा शराब शरीर में पानी की कमी भी बढ़ा सकती है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है. यह पाचन तंत्र, नींद और लिवर पर भी अतिरिक्त दबाव डालती है.
आयुर्वेद भी देता है यही सलाह
आयुर्वेद में भी सावन के दौरान हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन खाने की सलाह दी गई है. माना जाता है कि इस मौसम में शरीर का पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर रहता है.
इसी वजह से तला-भुना, ज्यादा मसालेदार भोजन, मांस और शराब से परहेज करने की सलाह दी जाती है. कई लोग सावन के सोमवार का व्रत भी रखते हैं, जिसे शरीर को आराम देने और पाचन शक्ति बनाए रखने से जोड़कर देखा जाता है.
सावन में क्या रखें ध्यान?
बारिश के मौसम में ताजा और साफ भोजन खाना सबसे बेहतर माना जाता है. भोजन हमेशा अच्छी तरह पकाकर खाएं और लंबे समय तक खुले में रखा खाना खाने से बचें.
अगर मांस, मछली या शराब का सेवन करते हैं, तो उनकी गुणवत्ता और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें. वहीं, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी जीवनशैली अपनाकर इस मौसम में खुद को स्वस्थ रखा जा सकता है.