India EU Free Trade Agreement: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में एक नया अध्याय खुलने वाला है. 27 जनवरी 2026 को दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर एक अहम बैठक होने जा रही है. यह बैठक दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है. बीते गुरुवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा था कि महत्वाकांक्षी भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के 24 चैप्टरों में से 20 को अंतिम रूप दे दिया गया है, जबकि कुछ मुद्दों पर अभी बातचीत जारी है.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को इस समझौते को लेकर एक बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने इसे "सभी समझौतों की जननी" यानी Mother of All Deals बताया. गोयल ने कहा कि यह सौदा केवल व्यापार और निवेश का नहीं, बल्कि भारत और EU के बीच आर्थिक सहयोग का प्रतीक होगा. उनका मानना है कि यह समझौता दोनों पक्षों को लाभान्वित करेगा और भारत की विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों में अहम भूमिका को दर्शाएगा.
भारत-ईयू FTA एक ऐतिहासिक सौदा
पीयूष गोयल ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारत अब विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौतों पर बढ़ते आत्मविश्वास के साथ काम कर रहा है. उन्होंने कहा, “हमने अब तक सात विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं. यह समझौता (ईयू FTA) सभी समझौतों की जननी होगी. इसमें दुनिया की दो सबसे बड़ी और शक्तिशाली अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. हमारे पास विकास की बहुत अच्छी संभावनाएं हैं.”
FTA का महत्व और भारत की रणनीति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए फायदे का सौदा होगा. खास बात यह है कि भारत और यूरोपीय संघ एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं हैं, बल्कि सहयोगी हैं. गोयल ने इस तथ्य पर जोर दिया कि भारत के सभी मुक्त व्यापार समझौते विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ हैं, जो प्रतिस्पर्धा के बजाय निवेश और विकास के अवसरों को बढ़ावा देते हैं.
भारत-ईयू FTA के तहत प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार और निवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार, सेवा क्षेत्र, कृषि और विनिर्माण शामिल हैं. दोनों पक्ष लगातार दिन-प्रतिदिन एक-दूसरे के संपर्क में हैं और कोशिश कर रहे हैं कि नेताओं की बैठक से पहले निर्धारित समय सीमा को पूरा किया जा सके.
आर्थिक और रणनीतिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के लिए आर्थिक तौर पर लाभकारी होने के साथ-साथ रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. यूरोपीय संघ दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ब्लॉकों में से एक है, और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई अवसर खोलना तय है. यह समझौता भारतीय निर्यातकों को नए बाजार उपलब्ध कराएगा, साथ ही उच्च तकनीक और निवेश के अवसर भी प्रदान करेगा.
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह FTA दोनों देशों के लिए संतुलित और निष्पक्ष सौदा होगा. इसका उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि सतत विकास और सहयोग के नए आयाम खोलना है.
Mother of All Deals, क्या है इसका संदेश?
इस समझौते को 'सभी समझौतों की जननी' कहकर पीयूष गोयल ने साफ संदेश दिया कि भारत अब वैश्विक स्तर पर विकसित देशों के साथ व्यापार और निवेश के मामलों में निर्णायक भूमिका निभा रहा है. यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक आर्थिक पहचान को मजबूत करने और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग की नई मिसाल पेश करने वाला कदम है.
अगले कुछ हफ्तों में यह देखना रोचक होगा कि भारत-ईयू FTA पर 27 जनवरी की बैठक से क्या निष्कर्ष निकलता है और इस समझौते से भारतीय और यूरोपीय कारोबारियों के लिए नए अवसर कैसे खुलते हैं. यह सौदा निश्चित रूप से दोनों पक्षों के लिए आर्थिक प्रगति और रणनीतिक मजबूती का प्रतीक बनेगा.
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