लश्कर ने खुद ही क्यों गिरा दिया अपना हेडक्वार्टर मरकज तैयबा? ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने किया था तबाह

भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया था, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के लाहौर के निकट स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय मरकज़ तैयबा पर एक अत्यधिक सटीक हवाई हमला किया.

Why did Lashkar itself demolish its headquarters Markaz Taiba
प्रतिकात्मक तस्वीर/ Social Media

इस्लामाबाद: भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया था, जब भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के लाहौर के निकट स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय मरकज़ तैयबा पर एक अत्यधिक सटीक हवाई हमला किया. इस सैन्य अभियान को भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" नाम दिया था, और यह सीधे तौर पर आतंकवाद के खिलाफ भारत की एक निर्णायक कार्रवाई मानी गई.

इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने उस परिसर को निशाना बनाया जो दशकों से लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों का केंद्र था- प्रशिक्षण, हथियारों का भंडारण और टॉप कमांडरों की बैठकों का गढ़.

भारतीय स्ट्राइक से मरकज़ तैयबा हुआ खंडहर

  • इस हमले में लश्कर के मुख्यालय की तीन प्रमुख इमारतें लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गईं.
  • एक लाल रंग की दो मंजिला इमारत, जिसे आतंकी ठहरने और हथियार छिपाने के लिए इस्तेमाल करते थे, बुरी तरह नष्ट हो गई.
  • दो पीले रंग की इमारतें, जिनमें से एक का नाम "उम उल क़ुरा" था, लश्कर के उच्चस्तरीय ट्रेनिंग कार्यक्रमों और नेताओं के रहने के लिए आरक्षित थीं.

स्ट्राइक के बाद इन इमारतों की हालत इतनी खराब थी कि केवल ढांचा बचा था, दीवारें दरक चुकी थीं, छतें ढह चुकी थीं और परिसर चारों ओर मलबे से घिर गया था.

अपने ही अड्डे को क्यों गिराया लश्कर ने?

7 मई की स्ट्राइक के बाद, पाकिस्तान सरकार और लश्कर दोनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी: क्या इस तबाह हो चुके मुख्यालय को फिर से खड़ा किया जा सकता है?

सूत्रों के अनुसार, मरकज़ तैयबा की इमारतें इतनी क्षतिग्रस्त थीं कि उन्हें ठीक करना संभव नहीं था. इसके अलावा, भारत द्वारा की गई स्ट्राइक की निशानियां मिटाने और नए सिरे से सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के उद्देश्य से लश्कर ने खुद ही यह फैसला लिया कि इन इमारतों को जेसीबी मशीनों से पूरी तरह गिरा दिया जाए.

कब-कब और क्या-क्या गिराया गया?

  • 18 अगस्त, 2025: पुनर्निर्माण की योजना के तहत लश्कर ने जेसीबी के जरिए मरकज़ परिसर में तोड़फोड़ शुरू की.
  • 20 अगस्त तक: ‘उम उल क़ुरा’ इमारत का अधिकांश हिस्सा ढहाया गया.
  • 4 सितंबर: पीली इमारतें पूरी तरह समतल कर दी गईं.
  • 7 सितंबर: लाल रंग की बहु-स्तरीय इमारत भी गिरा दी गई.

अब मरकज़ तैयबा का लगभग 1.09 एकड़ में फैला पूरा क्षेत्र मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है.

पाकिस्तान सरकार दे रही है पुनर्निर्माण के लिए सहायता

जब भारत द्वारा की गई स्ट्राइक के बाद लश्कर के अड्डे को भारी नुकसान हुआ, तो पाकिस्तान सरकार की ओर से एक चौंकाने वाला बयान आया. सरकार ने घोषणा की कि वह इन इमारतों के पुनर्निर्माण में आर्थिक मदद देगी. इस कथन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए.

7 से 10 मई के बीच चले भारत-पाक संघर्ष के दौरान, पाकिस्तान की तरफ से यह स्पष्ट किया गया था कि लश्कर के हेडक्वार्टर की मरम्मत "सामाजिक संगठनों की मदद से" की जाएगी, हालांकि सभी जानते हैं कि ये सामाजिक संगठन लश्कर के मुखौटे हैं.

5 फरवरी 2026 तक तैयार करना है नया हेडक्वार्टर

सूत्रों के अनुसार, लश्कर की योजना है कि 5 फरवरी, 2026 तक मरकज़ तैयबा का कम-से-कम एक हिस्सा तैयार हो जाए, ताकि उस दिन उनका वार्षिक ‘कश्मीर जिहाद कार्यक्रम’ वहीं आयोजित किया जा सके.

पाकिस्तान में यह दिन अक्सर "कश्मीर सॉलिडैरिटी डे" के रूप में मनाया जाता है, और लश्कर इस अवसर पर बड़ी सभाएं करता है.

पुनर्निर्माण कार्य मौलाना अबू जार (प्रमुख ट्रेनर) और कमांडर यूनुस शाह बुखारी की निगरानी में किया जा रहा है.

अस्थायी शिफ्टिंग: आतंकियों की नई पनाहगाहें

जब मरकज़ तैयबा पर भारत की एयरस्ट्राइक हुई, तो लश्कर को अपने आतंकी ढांचे को अस्थायी रूप से स्थानांतरित करना पड़ा.

पहले आतंकियों को बहावलपुर के मरकज़ अक्सा में ले जाया गया.

फिर जुलाई 2025 से इन्हें पंजाब प्रांत के कसूर जिले के पतोकी शहर में स्थित मरकज़ यरमूक में स्थानांतरित किया गया.

यहां प्रशिक्षण, हथियारों का भंडारण और स्लीपर सेल्स की गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है. इस नई जगह की जिम्मेदारी कमांडर अब्दुल राशिद मोहसिन को सौंपी गई है.

आतंक के हर अड्डे को नेस्तनाबूद करेगा भारत

भारत द्वारा की गई इस स्ट्राइक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब आतंकी संगठनों के सुरक्षित ठिकाने नहीं रहेंगे. खासतौर पर वे जो सीमा पार से भारत में घुसपैठ, हमले और प्रशिक्षण की योजना बनाते हैं.

भारतीय खुफिया एजेंसियों का यह दावा रहा है कि मरकज़ तैयबा पिछले 25 वर्षों से आतंकवाद की फैक्ट्री बना हुआ था. यही वो जगह थी जहां:

  • जैश और लश्कर के आतंकी एक साथ ट्रेनिंग लेते थे
  • कारगिल युद्ध से लेकर उरी और पुलवामा हमलों तक की साजिशें रची गईं
  • ISI और लश्कर के बीच तालमेल से कश्मीर में आतंकी हमलों की योजना बनाई जाती थी.

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