स्पीड, रेंज, टारगेट, तबाही... बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइल में कौन ज्यादा खतरनाक? भारत के पास कितनी?

बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों में अधिक प्रभावी और खतरनाक कौन है? इस सवाल का उत्तर केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक और भूराजनीतिक विश्लेषण की मांग करता है.

Which is more dangerous among ballistic and hypersonic missiles
प्रतीकात्मक तस्वीर/Photo- FreePik

नई दिल्ली: ईरान और इज़राइल के बीच हालिया टकराव ने वैश्विक रक्षा समुदाय को एक बार फिर इस बहुप्रचलित प्रश्न की ओर मोड़ा है: बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों में अधिक प्रभावी और खतरनाक कौन है? इस सवाल का उत्तर केवल तकनीकी नहीं, बल्कि रणनीतिक और भूराजनीतिक विश्लेषण की मांग करता है.

जब तेहरान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों ने इज़राइली शहरों को निशाना बनाया और इज़राइल की ओर से जवाब में रडार चकमा देती हाइपरसोनिक क्षमताएं सक्रिय हुईं, तब दुनिया ने आधुनिक मिसाइल युद्ध की सबसे जटिल और विनाशकारी झलक देखी.

बैलिस्टिक मिसाइलें: पुरानी लेकिन प्रासंगिक

बैलिस्टिक मिसाइलें पारंपरिक और परमाणु हथियार प्रणाली का एक प्रमुख आधार रही हैं. इन्हें रॉकेट के माध्यम से ऊपरी वायुमंडल या उप-कक्षा तक ले जाया जाता है, और फिर ये गुरुत्वाकर्षण बल की मदद से उच्च गति से लक्षित क्षेत्र पर गिरती हैं.

  • भारत की अग्नि-5 मिसाइल 5,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता रखती है और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है.
  • ईरान की सेजिल मिसाइल, जो इज़राइल के बीर्शेबा एयरबेस पर हमले में प्रयुक्त हुई, क्षेत्रीय स्तर पर बैलिस्टिक मिसाइलों के उपयोग का स्पष्ट उदाहरण है.

कमजोरी: एक बार प्रक्षेपण के बाद, इनकी उड़ान दिशा निर्धारित होती है और इन्हें इंटरसेप्ट करना तुलनात्मक रूप से आसान हो सकता है, यदि समय रहते पता चल जाए.

हाइपरसोनिक मिसाइलें: विनाशकारी शक्ति

हाइपरसोनिक मिसाइलें, जिनकी गति मैक 5 (6,000 किमी/घंटा) से अधिक होती है, युद्ध की दिशा को अप्रत्याशित रूप से बदल सकती हैं. ये मिसाइलें उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती हैं और सतह से सतह या हवा से सतह दोनों प्रकार की हो सकती हैं.

इनका सबसे घातक पहलू है रडार और डिटेक्शन सिस्टम को चकमा देने की क्षमता. अधिकांश पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम हाइपरसोनिक गति और मार्ग परिवर्तन को ट्रैक करने में असमर्थ होते हैं.

  • यह मिसाइल दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरबेस, रडार स्टेशन और रणनीतिक ठिकानों को अत्यंत कम समय में निशाना बना सकती है.
  • दुनिया में केवल कुछ देश- रूस, चीन और आंशिक रूप से अमेरिका इस तकनीक को पूरी तरह तैनात करने में सक्षम हैं.

भारत की स्थिति: बैलिस्टिक में अग्रणी

भारत ने पिछले दो दशकों में बैलिस्टिक मिसाइल प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति की है. 'अग्नि', 'शौर्य', 'पृथ्वी' और 'धनुष' जैसी मिसाइलें विभिन्न दूरी की श्रेणियों में कार्यरत हैं और 'नो फर्स्ट यूज़' सिद्धांत के अंतर्गत भारत की परमाणु नीति को धार देती हैं.

हाइपरसोनिक मिसाइलों के क्षेत्र में:

  • DRDO ने Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle (HSTDV) का सफल परीक्षण किया है.
  • भारत और रूस की संयुक्त परियोजना ब्रह्मोस-II (हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल) पर विकास कार्य जारी है, जो लगभग मैक 7 तक की गति से लैस हो सकती है.

हालांकि, भारत इस तकनीक के अंतिम परिचालन चरण तक अभी नहीं पहुंचा है, लेकिन यह दिशा भारत को आने वाले वर्षों में रणनीतिक लाभ की ओर ले जा सकती है.

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