बलूच विद्रोहियों के पास कहां से आते हैं हथियार, पाकिस्तान में कैसे करते हैं हमला? जानें इनकी ताकत

पाकिस्तान के कई शहरों और कस्बों में एक साथ हुए हालिया हमलों ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Where do Baloch rebels get weapons to attack in Pakistan
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पाकिस्तान के कई शहरों और कस्बों में एक साथ हुए हालिया हमलों ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इन हमलों की टाइमिंग, एक साथ कई जगहों पर कार्रवाई और भारी नुकसान ने यह साफ कर दिया कि बलूच विद्रोही संगठन अब पहले से कहीं ज्यादा संगठित और सशक्त नजर आ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन हमलों के लिए इस्तेमाल किए गए आधुनिक हथियार आखिर बलूच विद्रोहियों तक पहुंचे कैसे?

एक साथ कई इलाकों में हमले

हाल के दिनों में बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के करीब एक दर्जन शहरों और कस्बों को निशाना बनाया. इन हमलों में 80 से ज्यादा लोगों की मौत की खबरें सामने आईं. मरने वालों में आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षाबलों के जवान भी शामिल थे. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन घटनाओं में कम से कम 67 विद्रोही और 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए.

एक साथ इतने बड़े पैमाने पर हमलों से यह जाहिर हुआ कि विद्रोहियों की योजना केवल प्रतीकात्मक हिंसा तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका मकसद पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को सीधी चुनौती देना भी था.

कौन हैं बलूच विद्रोही और क्यों करते हैं संघर्ष?

बलूच विद्रोही संगठन लंबे समय से बलूचिस्तान क्षेत्र में सक्रिय हैं. उनका दावा है कि वे अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों का अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अलग पहचान की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. बलूचिस्तान का इलाका भौगोलिक रूप से पहाड़ी और दुर्गम है, जो विद्रोहियों को छिपने और संगठन फैलाने में मदद करता है.

कुछ इलाकों में उन्हें सीमित स्थानीय समर्थन भी मिलता है, जिससे उनका नेटवर्क समय-समय पर कमजोर पड़ने के बावजूद पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है.

हथियारों का स्रोत: काले बाजार और सीमा पार तस्करी

बलूच विद्रोहियों को हथियार मिलने का सबसे बड़ा जरिया क्षेत्रीय काला बाजार माना जाता है. सुरक्षा विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अफगानिस्तान से सटे सीमावर्ती इलाकों में अवैध हथियारों की तस्करी लंबे समय से जारी है. इन इलाकों की सीमाएं पहाड़ी और दूर-दराज होने के कारण पूरी तरह सील नहीं हो पातीं.

इन्हीं रास्तों का फायदा उठाकर हथियार एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाए जाते हैं. छोटे हथियारों से लेकर भारी हथियारों तक, अवैध बाजारों में आसानी से उपलब्ध होने की खबरें सामने आती रही हैं.

अफगानिस्तान से जुड़े हथियारों की भूमिका

2021 में अमेरिकी सेना के अफगानिस्तान से हटने के बाद वहां बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य उपकरण छोड़े जाने की चर्चा हुई थी. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई गई कि इन हथियारों का एक हिस्सा अवैध बाजारों में पहुंच गया.

हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि ये हथियार सीधे बलूच विद्रोहियों तक पहुंचे, लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि अफगानिस्तान में फैले अवैध हथियारों का नेटवर्क पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन चुका है और बलूच विद्रोही भी इससे अछूते नहीं हैं.

अमेरिकी और रूसी हथियारों की मौजूदगी

रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे संगठनों के पास अलग-अलग देशों में बने हथियार मौजूद हैं. इनमें अमेरिकी और रूसी मूल के हथियारों का जिक्र किया जाता है.

एम16ए4 राइफल, एम240बी मशीन गन और आरपीजी-7 जैसे हथियारों के नाम सामने आने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि विद्रोहियों के पास केवल हल्के हथियार ही नहीं, बल्कि भारी और घातक हथियार भी उपलब्ध हैं. इससे उनकी हमलों को अंजाम देने की क्षमता और घातकता दोनों बढ़ जाती हैं.

स्थानीय नेटवर्क भी है ताकत की बड़ी वजह

सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि स्थानीय नेटवर्क भी बलूच विद्रोहियों की ताकत का अहम हिस्सा है. पहाड़ी इलाकों में बने ठिकाने, इलाके की भौगोलिक जानकारी और कुछ क्षेत्रों में मिलने वाला सीमित समर्थन उन्हें लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करता है.

कई बार सैन्य अभियान चलाए जाने के बावजूद इन संगठनों का पूरी तरह सफाया नहीं हो पाता, क्योंकि वे आसानी से इलाकों में बिखर जाते हैं और फिर नए सिरे से संगठित हो जाते हैं.

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