नई दिल्ली/प्रयागराज : प्रयागराज में 12 साल में लगने वाला महाकुंभ 2025 इस बार पहले से काफी खास होगा. गूगल मैप की मदद से लेकर टॉयलेट की सुविधा और यात्रियों के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था, जिसमें AC बस सेवा शामिल होगी आदि से लेकर इस बार के महाकुंभ में लोग एक वर्ल्ड क्लास फीसिलिटीज का अनुभव कर सकेंगे
वहीं, खास दिनों में होने वाले स्नान पर प्रयागराज के इस तंबुओं के शहर वाले महाकुंभ में 6 करोड़ से ज्यादा लोगों की आने की उम्मीद है, जो कि इस देश के बड़े महानगरों और दुनिया के कई देशों से बड़ी आबादी होगी.
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3 दिन तक दुनिया के 41 देशों से ज्यादा जनसंख्या वाला बनेगा प्रयगाराज
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले शहर प्रयागराज में इस बार 2025 के महाकुंभ में खास स्नान वाले 3 दिन तक दुनिया के 41 देशों की आबादी ज्यादा लोग मौजूद होंगे, जो कि पर्यटन के लिहाज से एक बड़ा रिकॉर्ड बनेगा.
ये 3 दिन 29 जनवरी 2025 को मुख्य शाही स्नान पर्व मौनी अमावस्या से शुरू होकर इससे पहले और बाद में होने वाले स्नान के दिन होंगे. इन तीन दिनों में लगभग साढ़े 6 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटककों के प्रयागराज में होने और बड़ी संख्या आने और काफी संख्या में लोगों के संगम में डुबकी लगाने की उम्मीद है.
देश के बड़े महानगरों से अधिक आबादी वाल शहर बनेगा प्रयागराज
यही नहीं, प्रयागराज देश के दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई सहित दुनिया के कई बड़े देश से अधिक आबादी वाला शहर बनने का भी रिकॉर्ड बनाएगा.
सुरक्षा के लिहाज से लगभग सवा लाख जवानों की तैनाती की जा रही है. जो कि बड़ी संख्या है. 12 लाख कल्पवासी (तंबुओं में रहने वाले श्रद्धालु) महाकुंभ में जप-तप और स्ना करेंगे, जो कि दुनिया के कई छोटे देशों की आबादी के बराबर है.
यूपी के परिवहन निगम ने की है लोगों की सुविधा के लिए खास तैयारियां
वहीं, पर्यटकों को इस बार उत्तर प्रदेश का परिवहन निगम खास अनुभव देने जा रहा है. यूपी परिवहन निगम की घोषणा के मुताबिक, दिव्य, भव्य एवं ग्रीन महाकुंभ मेला-2025 को लेकर 7 हजार बसें चलाएगा. इनमें एसी बसें भी शामिल हैं.
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए खास सुविधा देने की योजना है. इस लिहाज से निगम ने महाकुंभ 2025 के दौरान लगभग 6800 बसें, लगभग 200 वातानुकूलित (एयर कंडीशनर) बसों चलाने की योजना है.
मौनी अमवस्या से लेकर पड़ने वाले खास दिनों के प्रमुख स्नान इस तरह होंगे
महाकुंभ मेला 2025 के दौरान मुख्य स्नान 13 जनवरी से 26 फरवरी, 2025 के बीच होंगे, जिसमें मौनी अमावस्या का शाही स्नान 29 जनवरी एवं बसंत पंचमी का शाही स्नान 3 फरवरी, 2025 को होगा. ये स्नान सांस्कृतिक लिहाज से खास महत्व रखते हैं.
मेला क्षेत्र में एक भी जानवर नहीं आएंगे नजर, की गई है ऐसी व्यवस्था
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार के कुंभ में जानवरों से होने वाली मुश्किल को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में 'जीरो एनिमल जोन' लागू किया गया है. इसका मतलब है कि कोई जानवर मेले में नजर नहीं आएगा. इसको लेकर बड़ी योजना बनाई गई है. इस बार के महाकुंभ में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की उम्मीद है.
मेला अधिकारी कुंभ क्षेत्र में आने-जाने वाले सभी मार्गों पर सफाई और व्यवस्था सुनिश्चित करने का खास प्लान बनाए हुए हैं. जिसके तहत पहली बार मेला क्षेत्र में जीरो एनिमल जोन लागू किया जाएगा और एक भी जानवर नजर नहीं आएगा.
एक रिपोर्ट में प्रयागराज नगर निगम (पीएमसी) के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी विजय अमृत राज के बयान के मुताबिक, संगम, नैनी, झूंसी और सिविल लाइंस समेत पूरा शहर और कुंभ क्षेत्र में पशु नजर नहीं आएंगे. हर तरह के जानवर पर प्रतिबंध लगाया गया है.
यह नहीं, निगम कुंभ के आसपास के इलाकों से जानवरों को हटाने का अभियान चला रहा है और पशुपालन करने वाले लोगों को साफ निर्देश है कि वे किसी भी हालत में इस दौरान कोई भी जानवर सड़कों पर ना छोड़ें.
कुत्ते और बिल्लियों जैस छोटे जानवरों के रहने के लिए बनाए जा रहे 5 आश्रय स्थल
वहीं, मेला क्षेत्र में छोटे जानवर जैसे कि कुत्ते, बिल्ली भी नजर ना आएं इसके लिए खास व्यवस्था की गई है. इस अभियान के तहत इन छोटे जानवरों के लिए 5 आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं.
इनमें से दो परेड ग्राउंड में, जबकि 1-1 नैनी, झूंसी और फाफामऊ में बनेंगे, जो कि गंगा नदी के उस पार और इस पार पड़ते हैं. इन आश्रय स्थलों पर इन जानवरों के लिए खाने-पीने की पूरी व्यवस्था की जाएगी.
प्रमुख मार्गों पर भी बड़े जानवर नहीं आएंगे नजर, इसके लिए भी खास व्यवस्था
इसके अलावा, कुंभ क्षेत्र को जोड़ने वाले सभी प्रमुख मार्गों-मिर्जापुर मार्ग, रीवा रोड, लखनऊ मार्ग, कानपुर रोड और चित्रकूट मार्ग पर बड़े जानवर नहीं दिखेंगे. यहां के बड़े इलाके दारागंज से लेकर फाफामऊ तक रिवरफ्रंट से सटे इलाकों में चल रही डेयरी मालिकों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने जानवरों को या तो आसपास से हटा लें या फिर उन्हें शहर से बाहर लेकर चले जाएं, वरना सख्त कार्रवाई की जाएगी. रिवरफ्रंट क्षेत्र में 5 डेयरियों पर कार्रवाई की गई और उन्हें हटा दिया गया है.
पशुपालन विभाग ने जीरो एनिमल जोन योजना को लागू करने के लिए 12 टीमें बनाई हैं. नगर निगम के पशुधन अधिकारी के अनुसार, 7 टीमें जोन से बड़े जानवरों को हटाने के काम में लगेंगी, जिनमें से हर टीम में 4 लोग होंगे.
इसके अलावा, निगम ने छोटे पशुओं के आश्रयों की देखरेख के लिए 5 टीमें बनाई हैं, साथ ही जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी उपलब्ध रहेंगी. यह व्यवस्था जनवरी 2025 से 31 मार्च 2025 तक प्रभावी रहेगी.
यूपी सरकार ने पर्यटकों के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी किया है लॉन्च
इस दौरान यूपी सरकार ने पर्यटकों के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है, ताकि उन्हें शहर की सारी सुविधाओं और जगहों के सटीक और बेहतर जानकारी मिल सके और किसी को भटकना ना पड़े.
राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ 2025 की वेबसाइट http://kumbh.gov.in और ऐप Mahakumbhmela 2025 को लॉन्च किया है. महाकुंभ 2025 के लोगो का इस्तेमाल महाकुंभ की वेबसाइट और ऐप के साथ ही बाकी प्रचार माध्यमों के लिए किया जाएगा. ऐप और वेबसाइट श्रद्धालुओं और पर्यटकों को महाकुंभ पहुंचने में मदद करेंगी.
इस तरह 30 सेकेंड के वीडियो में समुद्र मंथन होता है, जिसमें से निकलता है लोगो
सीएम योगी ने जब महाकुभ 2025 का लोगो लॉन्च किया इसमें करीब 30 सेकेंड का एक वीडियो के जरिए, जिसमें पहले समुद्र मंथन दिखता है, जिसे एक ओर देवता और दूसरी ओर दैत्य यानि दानव मथ रहे थे और उश मंथन से निकली चीजें दिखाई गई हैं.
इसके बाद वीडियो से लोगो निकलता दिखता है. इस लोगो पर लिखा है, "सर्वसिद्धप्रदः कुम्भः" और "प्रयागराज महाकुंभ 2025."
कुंभ पर्व 2025 शाही स्नान की तिथियां (Kumbh 2025 Snan Dates) इस प्रकार हैं
महाकुंभ 2025 की शुरुआत पौष पूर्णिमा स्नान के साथ होगी है, जो कि 13 जनवरी 2025 को है. वहीं महाशिवरात्रि के दिन 26 फरवरी 2024 को इसका आखिरी स्नान होगा और महाकुंभ का समापन भी. इस दौरान शाही स्नान की जो तारीखें इस तरह हैं.
14 जनवरी 2025 - मकर संक्रांति पर स्नान
29 जनवरी 2025 - मौनी अमावस्या पर स्नान
3 फरवरी 2025 - बसंत पंचमी पर स्नान
12 फरवरी 2025 - माघी पूर्णिमा पर स्नान
26 फरवरी 2025 - महाशिवरात्रि पर होने स्नान
जानें क्यों 12 साल बाद आयोजित होता महाकुंभ, ये जुड़ी है इससे कथा
महाकुंभ की पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है. इस कथा के अनुसार, जब एक बार असुरों और देवताओं ने समुद्र मंथन किया, तो इस दौरान मंथन में बहुत सारे रत्न निकले. सभी रत्नों को बांटने की बात तय हुई. देवताओं और असुरों ने आपसी सहमति से इनको बांट लिया, लेकिन इस दौरान निकेल अमृत को लेकर युद्ध छिड़ गया था.
ऐसे में असुरों के हाथ अमृत ना लग जाए, भगवान विष्णु ने अमृत का पात्र अपने वाहन गरुड़ को दे दिया. असुरों ने जब देखा कि अमृत गरुड़ के पास है, तो वह इसे छीनने का प्रयास में लग गए. इस छीना-झपटी में पात्र से छलकर अमृत की कुछ बूंदें धरती की चार जगहों- प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में गिरीं. तब से इन जगहों पर 12 सालों के अंतराल में कुंभ मेले के आयोजन की परंपरा है.
समुद्र मंथन से निकले अमृत को लेकर आपस में लड़ाई 12 दिन तक चली
समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों के बीच अमृत के लिए लड़ाई 12 दिनों तक चली थी. वहीं, शास्त्रों के अनुसार, देवताओं के 12 दिन मनुष्य के 12 सालों के बराबर होते हैं. इसलिए महापर्व कुंभ पर्व इन जगहों पर 12 साल बाद लगता है.
वहीं, 12 साल में कुंभ लगने का एक कारण बृहस्पति ग्रह की गति को भी माना जाता है, जो इस प्रकार है -
जब बृहस्पति ग्रह, वृषभ राशि में हों और इस दौरान सूर्य मकर राशि में आए, तो कुंभ मेले का आयोजन प्रयागराज में होता है.
इसी तरह जब बृहस्पति, कुंभ राशि में हों और इस दौरान सूर्य मेष राशि में हो, तो कुंभ का आयोजन हरिद्वार में होता है.
सूर्य और बृहस्पति जब सिंह राशि में हों तब महाकुंभ मेला नासिक में लगता है.
जब बृहस्पति सिंह राशि में हों और सूर्य मेष राशि में हों, तो कुंभ का मेला मध्य प्रदेश के उज्जैन लगता है.
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