Strait of Hormuz: यूरोपीय संघ के नौसैनिक मिशन यूरोपीयन यूनियन नेवल फोर्स मेडिटेरेनियन (EU NAVFOR MED) के अधिकारियों ने बताया कि उनके जहाजों को रेडियो संदेश मिल रहे हैं, जिनमें ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकता. हालांकि, ईरान सरकार ने अभी तक इस तरह के किसी आधिकारिक आदेश की पुष्टि नहीं की है.
होर्मुज स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है. यह मार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. इसी रास्ते से सऊदी अरब, ईरान, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश अपना तेल निर्यात करते हैं. इसकी लंबाई लगभग 161 किलोमीटर है और सबसे संकरे हिस्से में यह केवल 33 किलोमीटर चौड़ा है.
ईरान की चेतावनी और सुरक्षा स्थिति
वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग 27 प्रतिशत और कुल तेल उत्पादन का करीब 20.5 प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है. अनुमान है कि प्रतिदिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल इस रास्ते से ट्रांसपोर्ट होता है. इसके अलावा, ग्लोबल LNG व्यापार का लगभग 22 प्रतिशत भी इसी मार्ग से गुजरता है.
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पहले भी संकेत दिए थे कि यदि देश पर हमला होता है, तो वे होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर सकते हैं. यह स्थिति न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का कारण है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर भी सीधा असर डाल सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेट बंद होने की स्थिति में तेल और LNG की आपूर्ति में भारी व्यवधान आ सकता है.
भारत पर सीधा असर
भारत उन देशों में शामिल है जो होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित होंगे. भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत तेल आयात करता है. भारत के कच्चे तेल का करीब 40-50 प्रतिशत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है, जबकि LNG की सप्लाई का लगभग 40-60 प्रतिशत इसी मार्ग से होती है.
2024 में कतर ने अकेले लगभग 10 मिलियन टन LNG भारत को सप्लाई किया. भारत सालाना लगभग 2 बिलियन बैरल तेल का आयात करता है. यदि तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो भारत के वार्षिक आयात खर्च में लगभग 2 बिलियन डॉलर का इजाफा देखने को मिलता है.
संभावित आर्थिक और ऊर्जा प्रभाव
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की स्थिति में न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के तेल और गैस बाजार में अस्थिरता पैदा हो सकती है. तेल की कीमतों में तेज उछाल, LNG आपूर्ति में रुकावट और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव इसके संभावित नतीजे होंगे. विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए देशों को ऊर्जा वैकल्पिक मार्गों और रणनीतियों की योजना तैयार करनी होगी.
इस तरह, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और इसके संचालन पर किसी भी तरह की अस्थिरता न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है.
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