मरने से चंद सेकंड पहले इंसान क्या सोचता है? मुर्दाघर में काम करने वाले ने बताए कई राज़

What Happens After Death: हम हर दिन किसी मंज़िल की ओर दौड़ते हैं, कभी करियर के पीछे, तो कभी पैसों के पीछे. सपनों की लंबी लिस्ट होती है और हम सोचते हैं कि जब ये सब पा लेंगे, तब जीना शुरू करेंगे.

What do people think seconds before they die A morgue worker reveals many secrets
Image Source: Freepik

What Happens After Death: हम हर दिन किसी मंज़िल की ओर दौड़ते हैं, कभी करियर के पीछे, तो कभी पैसों के पीछे. सपनों की लंबी लिस्ट होती है और हम सोचते हैं कि जब ये सब पा लेंगे, तब जीना शुरू करेंगे. लेकिन क्या कभी रुके हैं ये सोचने के लिए कि जब हम ज़िंदगी के आख़िरी मोड़ पर होंगे, तो किस बात की सबसे ज़्यादा कमी महसूस होगी?

इस सवाल का जवाब कुछ ऐसे लोग जानते हैं, जो रोज़ मौत के बहुत करीब होते हैं, एक मॉर्टिशियन (मुर्दाघर में काम करने वाले) और एक पैलिएटिव केयर नर्स. दोनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मौत से पहले इंसान किन बातों पर सबसे ज़्यादा अफसोस करता है, और उनकी कही बातें सीधे दिल को छू जाती हैं.

"लोगों को अपने रिश्तों की कमी सबसे ज़्यादा सताती है"

विक्टर एम. स्वेनी, एक अमेरिकी मॉर्टिशियन हैं, जो वर्षों से उन लोगों के आख़िरी पलों के गवाह बने हैं, जो इस दुनिया से विदा ले रहे थे. उनका कहना है कि अधिकतर लोग जीवन के अंतिम समय में अपनी नौकरियों, पदों और उपलब्धियों को याद करते हैं, लेकिन जब उनके परिवार से बात की जाती है, तो पता चलता है कि उनका रिश्ता सिर्फ प्रोफेशनल पहचान तक ही सीमित रह गया.

विक्टर कहते हैं, "जो लोग शांति के साथ इस दुनिया से जाते हैं, वे वही होते हैं जिन्होंने अपनी ज़िंदगी रिश्तों में लगाई. उन्होंने समय को अपनों के लिए जिया. और यही उन्हें आख़िरी वक़्त में राहत देता है."

"लोग अपनी नहीं, दूसरों की जिंदगी जीते-जीते मर जाते हैं" 

2024 में एक पैलिएटिव केयर नर्स ने अपने ब्लॉग में मौत के करीब पहुंचे मरीजों के अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि ज़्यादातर लोगों को इस बात का अफसोस होता है कि वे अपनी मर्जी से कभी जी ही नहीं पाए. उन्होंने कहा, "उन्होंने वही किया, जिसकी उनसे उम्मीद की गई. परिवार, समाज, सिस्टम, सबकी कसौटी पर खरा उतरते-उतरते उन्होंने खुद को कहीं खो दिया."

नर्स बताती हैं कि बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि उन्होंने इतनी मेहनत की कि अपनों के लिए वक्त ही नहीं बचा, और यही उन्हें सबसे ज़्यादा खलता है. इसके अलावा कुछ और कॉमन पछतावे भी सामने आए:

  • अपने जज़्बात खुलकर न कह पाना
  • दोस्तों से संपर्क टूट जाना
  • सपनों को अधूरा छोड़ देना
  • और सबसे ज़्यादा अपने बच्चों या पार्टनर के साथ वक्त न बिता पाना.

यह भी पढ़ें- पीएम मोदी के जन्मदिन पर पवन कल्याण ने खास अंदाज में किया विश, सोशल मीडिया पर VIDEO किया जारी