Virat Kohi: भारतीय क्रिकेट टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज का आगाज़ जीत के साथ किया है. वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम में खेले गए पहले मुकाबले में टीम इंडिया ने 4 विकेट से जीत दर्ज करते हुए सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली. 301 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम ने 6 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया. अब दोनों टीमों के बीच दूसरा वनडे 14 जनवरी को राजकोट में खेला जाएगा.
इस जीत के असली नायक विराट कोहली रहे, जिन्होंने दबाव भरे मुकाबले में एक बार फिर अपनी क्लास दिखाई. कोहली ने 91 गेंदों में 93 रनों की संयमित लेकिन प्रभावशाली पारी खेली, जिसमें 8 चौके और 1 छक्का शामिल था. उनकी इस पारी ने रनचेज को आसान बना दिया. इसी शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया, जो उनके वनडे करियर का 45वां ऐसा अवॉर्ड है.
अवॉर्ड्स और माइलस्टोन पर कोहली का नजरिया
मैच के बाद विराट कोहली ने बेहद सादगी भरे अंदाज़ में अपनी उपलब्धियों पर बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें खुद याद नहीं रहता कि उन्होंने कितनी बार ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवॉर्ड जीता है. कोहली के मुताबिक, वह अपने सभी ट्रॉफी गुरुग्राम में अपनी मां के पास भिजवा देते हैं, जिन्हें उन्हें संभालकर रखना बहुत पसंद है. कोहली ने कहा कि जब वह अपने पूरे क्रिकेट सफर को पीछे मुड़कर देखते हैं, तो यह किसी सपने जैसा लगता है. उन्हें हमेशा अपनी काबिलियत पर भरोसा था, लेकिन यह भी पता था कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत जरूरी है. उन्होंने माना कि भगवान ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा दिया है, जिसके लिए वह हमेशा आभारी रहेंगे.
शतक से चूकने पर क्या बोले विराट?
93 रन पर नाबाद रहने और शतक से चूकने के सवाल पर कोहली ने साफ कहा कि मौजूदा दौर के क्रिकेट में वह किसी व्यक्तिगत माइलस्टोन के बारे में नहीं सोचते. उन्होंने बताया कि अगर टीम पहले बल्लेबाजी कर रही होती, तो शायद वह और आक्रामक खेलते. लेकिन लक्ष्य का पीछा करते समय हालात के अनुसार खेलना जरूरी होता है. कोहली ने कहा कि उनके दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी—टीम को जीत के बेहद करीब पहुंचाना. अनुभव ने उन्हें यह सिखाया है कि हर गेंद पर बड़ा शॉट लगाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही समय पर सही फैसला लेना ज्यादा अहम होता है.
🗣️ If I look back at my whole journey, it's nothing short of a dream come true. ✨
— BCCI (@BCCI) January 11, 2026
🎥 Virat Kohli reflects on his incredible career after becoming the 2⃣nd highest run-getter in men's international cricket🙌👏#TeamIndia | #INDvNZ | @imVkohli | @idfcfirstbank pic.twitter.com/87BgcZlx4b
नंबर तीन पर बल्लेबाजी और काउंटर-अटैक की सोच
अपनी बल्लेबाजी रणनीति पर बात करते हुए विराट ने बताया कि नंबर तीन पर उतरने का मतलब सिर्फ टिककर खेलना नहीं होता. अगर टीम मुश्किल में हो, तो वह इंतजार करने की बजाय दबाव को काउंटर-अटैक से तोड़ने में यकीन रखते हैं. उनका मानना है कि ज्यादा रक्षात्मक होने का कोई फायदा नहीं, क्योंकि क्रिकेट में किसी भी गेंद पर कुछ भी हो सकता है. रोहित शर्मा के आउट होने के बाद मैदान में उतरते वक्त उन्होंने तय किया कि शुरुआती 20 गेंदों में थोड़ा आक्रामक खेल दिखाकर विपक्षी टीम पर दबाव बनाया जाए. यही रणनीति मैच में निर्णायक साबित हुई.
भीड़ के शोर और जिम्मेदारी पर कोहली की सोच
कोहली ने दर्शकों की प्रतिक्रियाओं को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि जब कोई खिलाड़ी आउट होकर मैदान से लौट रहा होता है, तब उसके लिए शोर अच्छा अनुभव नहीं होता. उन्होंने यह बात पहले एमएस धोनी के साथ भी होते हुए देखी है. हालांकि विराट ने यह भी माना कि दर्शकों का प्यार और समर्थन उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि बचपन से जिस खेल से वह प्यार करते आए हैं, उसी के जरिए अगर वह लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला पा रहे हैं, तो इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है. कोहली ने अंत में कहा कि वह अपना सपना जी रहे हैं और लोगों को खुश देखकर उन्हें सच्ची खुशी मिलती है.
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