नई दिल्ली: भारत 24 के खास कार्यक्रम 'Viksit Bharat Leadership Summit 2026' में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शिरकत की. उन्होंने इस दौरान भारत की विकास यात्रा को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि भारत 24 के इस समिट में मेरे बहुत पुराने क्योंकि एक ऐसा नाम जो मीडिया में के क्षेत्र में एक एक स्तंभ थे आज से लगभग 20 वर्ष पहले भी जगदीश जी का नाम और हम हमारी मुलाकात कई मर्तबा रांची के अंदर और दिल्ली में हुई. आज उनका अनुभव और अनुभव के माध्यम से मीडिया जगत में और विकसित भारत का जो संकल्प है उसमें उनकी भूमिका मैं आज इस मौके पर आदरणीय जगदीश चंद्र जी मनोज जी अमित ओझा जी भाइयों और बहनों संसद का सत्र चल रहा है और अभी प्रश्नकाल तुरंत खत्म हुआ आज देश से नक्सलवाद की समाप्ति उस पर एक अहम बिल आने वाला है. गृह मंत्री अमित शाह जी उस पर चर्चा करेंगे क्योंकि हम जानते हैं कि इस देश के अंदर नक्सलवाद अंतिम सासे ले रहा है और हम जिस क्षेत्र से आते हैं झारखंड से आज से कुछ साल पहले तक अखबार में अगर आ जाता था कि आज नक्सली बंदी है तो कोई आवश्यकता नहीं थी कुछ करने की.
"नक्सलवाद अंतिम सांस ले रहा है"
संजय सेठ ने कहा कि सारा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता था और पान की दुकान भी बंद हो जाती थी. लेकिन जिस प्रकार अमित शाह जी का निर्णय और संकल्प और आज उसका परिणाम है. कि पूरे देश से नक्सलवाद अंतिम साह से गिर रहा है और झारखंड में [प्रशंसा] रांची से हम सब अगर डाल्टनगंज जाना होता तो 5:00 बजे के बाद गाड़ियां बंद हो जाती थी. रांची से जमशेदपुर मात्र 2 घंटे का रास्ता होता था. रात में चलते नहीं थे. भगवान बिरसा मुंडा की जहां जन्मस्थली रांची से मात्र 40 किलोमीटर पे 5:00 बजे एक बार जाग नहीं सकते थे. पूरे झारखंड की यही स्थिति थी. किंतु अमित शाह जी के कठोर और एक संकल्प जो उन्होंने लिया नक्सलवाद की समाप्ति के और आज स्थिति है कि झारखंड के अंदर आप 12:00 बजे, 1:00 बजे, 2:00 बजे रात में ट्रैवल करो. कहीं कोई दिक्कत नहीं. कमोबेश पूरे देश की ही स्थिति है. तो मैं यह कह सकता हूं कि आज नक्सलवाद जो विकास का एक बहुत बड़ा रोड़ा था.
उन्होंने आगे कहा कि अमन चैन शांति पसंद करने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ा हर्डल था. आज वो हर्डल वो कांटा सदा सदा के लिए समाप्त हो रहा है. और जो बहकावे में आकर कलम कागज औजार के साथ उसको छोड़कर हथियार ढोना. आज वह पुनः सही रास्ते पर आ रहे हैं. समर्पण कर रहे हैं. ये एक देश के लिए बहुत अच्छा कदम है. और आज इस मौके पर जो जो विषय आपने रखा है विकसित भारत और यह विकसित भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जो संकल्प है 2047 जब हम अपनी आजादी के 100 साल बनाएंगे वो 100 साल कैसा होगा? लोग पूछते हैं हम सब से भाई ये विकसित भारत है क्या? उसका पैरामीटर क्या है? तो विकसित भारत का पैरामीटर सिर्फ दो तीन लाइनें हम आपको समझाएं कि आज जो हमारा 140 करोड़ देशवासी जिसको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं यह हमारे लिए अभिशाप नहीं है वरदान है और 140 करोड़ देशवासियों के एक परिवार के रूप में देश की उन्नति देश को आगे बढ़ाना और आज जब तो हम देखते हैं कि हमारे बच्चे दुनिया भर में हायर एजुकेशन के लिए जाते हैं.
"विकसित भारत प्रधानमंत्री जी की सोच है"
संजय सेठ ने आगे कहा कि दुनिया भर में जॉब के लिए हमारे बच्चे जाते हैं. हमारे लोग वैकेशन में कहीं वैकेशन सेलिब्रेट करना हो जाना है तो दुनिया के कई हिस्सों में जाते हैं. लेकिन विकसित भारत जो प्रधानमंत्री जी की सोच है जिस ओर देश बहुत तेजी से आगे बढ़ा है कि वह 2047 जब दुनिया दुनिया के युवा उनको हायर एजुकेशन में आना होगा तो बोलेंगे चलो भारत टूरिज्म के क्षेत्र में दुनिया भर के लोग कहीं वेकेशन पर जाना है कहां चलाएं चलो भारत. बड़ी-बड़ी कंपनियों के अंदर सीओस बनने हैं. कहां चलना? चलो भारत. नया इनोवेशन नई थकी कहां जाना? चलो भारत. यही तो विकसित भारत का संकल्प है और वह विकसित भारत का संकल्प 140 करोड़ देशवासी उनका संकल्प बन चुका है. मित्रों पूरी दुनिया के अंदर एक परसेप्शन सेट था आज से 1215 साल पहले कि भारत तो भाई जादू टोना का देश है. भारत अनपढ़ों का देश है. भारत चौराहे पे गली-गली में बेगर्स घूमते हैं. उनका देश है. भारत भारत में युवाओं पर या युवाओं का आंदोलन चलता है तो युवाओं पर लाठी चार्ज होता है. उनका देश है. लेकिन 12 वर्षों के अंदर आप सब भी विदेश जाते होंगे.
उन्होंने आगे कहा कि जब आप पहले विदेश जाते थे तो आपको उतना सीरियस नहीं लिया जाता था. कहां से आए हो भाई? ठीक है. लेकिन आज जब विदेश जाते हो देखो परसेप्शन का कमाल देखो. आज जब विदेश जाते हैं लोग वहां जाकर के पूछते हैं भाई कहां से आए हो? ओ यू आर फ्रॉम इंडिया यू आर फ्रॉम मोदी कंट्री यह है परसेप्शन और वो परसेप्शन इन 12 सालों के अंदर वो जादू टोना वाला देश से लेकर विकसित भारत पे चला गया और वह जो परसेप्शन सेट हुआ कि नहीं भारत बदल गया है वो भारत जो सिर्फ इंपोर्ट करता था इंपोर्टर होता था हर चीज का इंपोर्ट हम इंपोर्टर के रूप में दुनिया में जाने जाते थे लेकिन आज भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदली और आज दुनिया ने देखा जब करोना आया हमने उस समय भी देखा था मित्रों कि जब हैजा आया आया जब पोलियो आया दुनिया ने अपने को सुरक्षित किया उसके 12 साल बाद दुनिया ने भारत को टीका दिया जब अपने को सुरक्षित करने के बाद लेकिन कोरोना का एक्सपीरियंस जब कोरोना आया दुनिया मान के चल रही थी कि भारत इकोनॉमिक ट्रैक से डिरेल होगा भारत में लाखों करोड़ लोग मर जाएंगे और भारत विकास की पटरी से उतर जाएगा. लेकिन क्या हुआ मित्रों?
"118 देशों को वैक्सीन भारत ने दिया"
उन्होंने कहा कि जिस पोलियो के टीके के लिए जिस हैजा के टीके के लिए हम वर्षों वर्षों इंतजार करते रहे. और वो कोरोना का जो वैक्सीन आया जिस दिन दुनिया ने कोरोना के वैक्सीन का इजाजद किया हमने भी किया एक ही नहीं तीन-तीन वैक्सीन का इजाद किया और हमने तो अपने 40 करोड़ 140 करोड़ देशवासियों को तो सुरक्षित किया ही दुनिया के 118 देशों को दुनिया से के 118 देशों को वैक्सीन भारत ने किया और हम सब ने देखा कि हम आप सब भी इसके साक्षी हो गए जब कोरोना था हम सब भी रांची में थे सेवा कार्य चला रहे थे हमारे दोस्तों ने कहा कि भाई ऐसा करो ये कोवैक्सीन क्या लेना चलो स्पुतनिक लेते हैं रशिया की स्पुतनिक बहुत बढ़िया होगी हमने कहा यह तो फ्री में मिल रहा है भाई यह तो भारत सरकार के मुफ्त में मिल रहा है और वह स्पुतनिक लेने जाओगे बड़े अस्पताल में जाओगे ₹00 लगेगा क्या जरूरत है बोला नहीं नहीं क्योंकि उस समय भ्रम फैलाया गया कि भाई भारत की वैक्सीन आप नपुंसक हो जाओगे ये तो चूहे मारने वाली दवाई है क्या क्या कुछ कहा गया था और मित्रों मैं इस आप भी उस बात के गवाह होंगे मैं किसी की आलोचना नहीं करना चाहता कि इतना जरूर एक्सपीरियंस हम शेयर करना चाहते हैं कि हम सब ने जो जिसने भारत की वैक्सीन ली उसको अस्पताल नहीं जाना पड़ा और जिसने भारत की वैक्सीन नहीं लेकर दुनिया की दूसरी वैक्सीन ली उनको पुनः अस्पताल जाना पड़ा यही नया भारत का कमाल है और नया भारत बदल गया है नया भारत ना पीठ दिखाता है ना आंख चुराता है और ना किसी के सामने हाथ फैलाता है.
संजय सेठ ने आगे कहा कि नया भारत दुनिया के संपन्न से संपन्न राष्ट्र और दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र अध्यक्ष के सामने आंख में आंख डालकर बात करने वाला भारत और यह भारत जिसको कहा गया था मित्रों कि यह तो अनपढ़ों का देश है और ये अनपढ़ों का देश है. उस पर को सदा सदा के लिए मिटा दिया कि दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट करने वाला कोई देश बना तो भारत बना. यूपीआई का ट्रांजक्शन जिसको कहा गया था कि अनपढ़ों का देश है. यूपीआई का ट्रांजैक्शन ₹ लाख करोड़ डीबीटी का ट्रांजैक्शन ₹ लाख करोड़ आप हिंदुस्तान के किसी गांव टोहला पंचायत में चले जाओ. आपको चाय पीनी है, पान खाना है. आपको अदरक लेना है, सब्जी लेनी है तो रुपए देने की आवश्यकता नहीं है. उसके पास स्कैन कर लो. उसको पता ही नहीं वो अपना चाय बेच रहा है. आप स्कैन करके चले जाओ. क्या अनपढ़ों का देश है. 30 लाख 30 लाख करोड़ का यूपीआई का ट्रांजैक्शन. यही तो नया भारत है. ₹ लाख का डीबीटी क्या वह दिन आप भूल गए? देश नहीं भुला है. मित्रों, हम तो रोजाना हिंदुस्तान भर में अपने कास्टट्यूएंसी में रहते हैं तो एक दिन में दो से 250 किलोमीटर जाते हैं. मेरा क्षेत्र तो जहां पहाड़, झरने और ग्रीन वैलीज सब जगह जाते हैं. आदिवासी भैया बहन के पास भी जाते हैं. तो वो दिन देश नहीं भूला है कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मैं नाम नहीं लेना चाहता.
दिल्ली से ₹1 चलता है तो...
उन्होंने आगे कहा कि क्या कहा था उन्होंने कि ₹1 दिल्ली से चलता है तो 15 पैसे गांव में पहुंचता है और आज आज दिल्ली से ₹1 चलता है तो हिंदुस्तान के लाखों गांव में उनके झोपड़ पट्टी तक ₹1 पहुंचता है. कोई बिचौलिया नहीं. [प्रशंसा] कोई मिडिलमैन नहीं. यही तो नया भारत है. चाहे आप वृद्धा पेंशन हो, विधवा पेंशन हो, आप दिव्यांग पेंशन हो, कुछ हो. किसान सम्मान योजना कहीं एक की दलाली नहीं. कोई कोई बीच में कोई मिडिलमैन नहीं. अरे हमने वो भी समय देखा था. वृद्धा पेंशन 500 मिलता था. ब्लॉक में दलाल घूमते रहते थे. बूढ़ी आती थी. बूढ़ा आता था. बोलता दे दे दादी नानी दे और ₹300 पॉकेट में रखता तो 200 पकड़ा कर रानी को विदा कर देता था. नानी भी खुश कि 200 मिला फ्री में लेकिन दलाल भी ₹300 ले चल गया. वो समय पलट गया. समय रहा नहीं मित्रों. और वह समय अब अतीत हो चुका है. देश तरक्की के रास्ते पर अग्रसर है. आज प्रधानमंत्री ने कहा था आज हमारे हम जब दुनिया भर में जाते हैं डास्पोरा करते हैं तो हम बताते हैं उनको कि जब भारत आप छोड़ के आए हो ना वो पुराना भारत नहीं रहा होगा.
"रेलवे की स्थिति में काफी सुधार हुआ"
संजय सेठ ने रेलवे सेक्टर में हो रहे काम को लेकर कहा कि जब रेलवे पर चलने के जब रेलवे के में प्लेटफार्म पर जाते थे तो क्या स्थिति होती थी? रेल पर ट्रैवल करते थे क्या स्थिति होती थी? उनके टॉयलेट्स की स्थिति क्या होती थी? रेल की स्पीड क्या होती थी? बदल गया मित्रों. भारत के रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, एयरपोर्ट के तर अच्छे स्टेशन, अच्छे कंपार्टमेंट, अच्छी ट्रेनें वंदे भारत. आज सैकड़ों अब तो बुलेट ट्रेन की ओर देश बढ़ चला तो वह दिन दूर नहीं जब मुंबई से अहमदाबाद कुछ ही घंटों के अंदर बुलेट ट्रेन से पहुंच जाएंगे उसकी भी तैयारी चल रही है. तो कोई क्षेत्र बचा नहीं. प्रधानमंत्री ने कहा था कि भाई हवाई चप्पल वाले भी हवाई जहाज पर यात्रा करो. हमको याद है मैं जब स्कूल में पढ़ा करता था तो एयर इंडिया की टिकट आती थी जगदीश जी आपको पता है वो लाल रंग की टिकट होती थी जब हम रांची से दिल्ली आते तो रांची पटना लखनऊ देन दिल्ली उस पे कार्बन कॉपी से लिखा जाता था तो वो एक स्टेटस सिंबल हो जाता था हम उस लहरल वाले टिकट को संभाल के रखते थे अपने दोस्तों को दिखाते थे हम भाई फ्लाइट से गए थे, प्लेन में गए थे. हां, कैसा होता था टिकट भाई? इतना बड़ा इतना बढ़िया टिकट, इतना बढ़िया लाल रंग का और बहुत चिकना लोग उसको देखते थे. अभी उसको संभाल के हम रखते थे सालों भर कि भाई देखो हम फ्लाइट से गए थे दिल्ली और आज म गांव मजदूर जो रांची से चेन्नई जा रहे हैं काम. रांची से आप चंडीगढ़ जा रहे हैं. रांची से अगरतला कहीं जा रहे हैं? सिक्किम जा रहे हैं. कहीं जा रहे हैं. आम आदमी हवाई जहाज से ट्रेवल कर रहा है. और यही तो नया भारत है मित्रों. और नया भारत हम सब तो जयप्रकाश नारायण आंदोलन के एक छोटे से गिलह के रूप में हम सब ने काम किया और उस समय मिसेज गांधी प्राइम मिनिस्टर होती थी तो उनका एक ही नारा था कांग्रेस पार्टी का गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ दस्तकों तक कांग्रेस पार्टी ने सिर्फ गरीबी हटाओ के नारे से एक ही नारा उससे कई चुनाव जीते.
"27 करोड़ लोग गरीबी रेखा के बाहर आ गए"
उन्होंने आगे कहा कि गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ, गरीबी हटाओ. हटी नहीं मित्रों. और आज वही भारत है मित्रों. 27 करोड़ लोग मैं ऑन रिकॉर्ड बोल रहा हूं. 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा के बाहर आ गए. यही तो नया भारत है और नया भारत देखो हम आज आज कहते हैं ना दुनिया आज भारत की ओर क्यों देख रही है हम रक्षा के क्षेत्र में अभी आते हैं आपको बताएंगे नया भारत क्यों भारत की ओर देख रही है क्यों हमारा देश युवा देश है हमारी आधी आबादी 35 साल के नीचे है और हम इंतजार कर रहे हैं और प्रधानमंत्री का जो संकल्प है प्रधानमंत्री ने क्या कहा था पहले हम जानते हैं विवेकानंद जी ने क्या कहा था कि हम 100 ऊर्जावान ऐसे भारत मात के लाल दे दो हम भारत बदल देंगे तो मोदी जी ने कहा हमको 1 लाख ऊर्जावान दे दो हम 2047 विकसित भारत दे देंगे देश उस उधर ही बड़ा है आज जो आज की जो आबादी है 2029 में भारत की आबादी हम कितने और युवा होने जा रहे हैं. भारत की आबादी मित्रों 2029 में आधी आबादी बिलो 25 होगी. आप अंदाज लगाओ कि देश की शक्ति देश का युवा और हम हमारे पास वर्किंग हैंड कितना मजबूत होगा. कितना युवा होगा और तभी देश के प्रधानमंत्री मोदी ने वो सपना देखा है विकसित भारत का 2047 का और वो युवा जगदीश जी आपको बताएं 2013-14 में युवाओं से बात करते हैं. 2013-14 में देश के अंदर सिर्फ 1000 स्टार्टअप होते थे. 1000 आप लोग आकर लिख भी लेना.
"हमारे युवा किसी से कम नहीं"
उन्होंने आगे कहा कि मैं कोई चुनावी भाषण नहीं दे रहा हूं. ऑन रिकॉर्ड सब बोलता हूं. 1000 स्टार्टअप थे और जिसमें मात्र 400-600 तो अंतिम सांस से गिन रहा. 400 ही धरातल पे थे. आज 2.9 लाख 29 लाख 9000 स्टार्टअप है इस देश के अंदर. और मैं मैं रक्षा के क्षेत्र में जाता हूं. हमारा जो युवा काम कर रहा है अद्भुत काम कर रहा है. दुनिया के किसी भी दुनिया के किसी भी युवा से दुनिया के किसी भी स्टार्टअप से हमारा युवा कम नहीं है. और युवा जिस जिस लगन से जिस स्पीड से जिस मोटिवेशन से जिस एनर्जी से काम कर रहा अद्भुत काम कर रहा है. और अगर हम दूसरी ओर ले एमएसएम सेक्टर जो देश का निर्माण आपको याद होगा कि जब कोरोना आया था कोरोना में सारी फैक्ट्रीज बिजनेस सब बंद हो गए थे तो भारत की इकोनमी ताकत देखो हम एमएसएमई में आएंगे आपको जब कोरोना आया सब कुछ डिरे हो गया था लेकिन भारत की ताकत देखो भारत की युवाओं की ताकत देखो भारत का जो बैकबोन है इकोनमी का एमएसएम सेक्टर जैसे ही लॉकडाउन खत्म नेक्स्ट मंथ लॉकडाउन खत्म हुआ. नेक्स्ट मंथ जीएसटी कलेक्शन कितना था? ₹122000 करोड़. कोरोना खत्म हुआ और लॉकडाउन खत्म हुआ. नेक्स्ट मंथ ₹1,22,000 करोड़ जीएसटी कलेक्शन ये कौन ताकत थी? कि भारत की आर्थिक प्रगति जो बैकबोन था जो हमारा स्टक जो हमारा एमएसएम सेक्टर भारत के लोग और आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं आज जीएसटी कलेक्शन ₹195000 करोड़ ₹195000 करोड़ मेरा जीएसटी कलेक्शन है और आज जिस कहते हैं ना जो मैंने बताया ना 27 करोड़ लोग जो गरीबी रेखा से बाहर आ गए आज हमारा देश के अंदर 8 करोड़ 8 करोड़ एमएसएमबी सेक्टर है. अगर 8 करोड़ में तीन चार अगर इम्प्ल एंप्लई अब कर लो तो कितने को रोजगार दे रहा है?
एमएसएमई सेक्टर को मिला बड़ा बुस्ट
संजय सेठ ने आगे कहा कि लगभग 27 से 28 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहा है. एमएसएमई सेक्टर. यह हमारी बैकबोन है इकोनमी का और जिस जो जो आर्थिक प्रगति की ओर जो देश बढ़ा है उसका एमएसएम सेक्टर एक जीता जागता उदाहरण है और तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और निर्मला सीतारमण जी ने जो इस बार बजट पेश किया उस बजट के अंदर एमएसएमी सेक्टर को 10,000 करोड़ और 10,000 करोड़ के अलावा ₹000 करोड़ इंडिजनस के लिए है. आत्मनिर्भर भारत के लिए 12,000 करोड़ यह हमारी इकोनमी की ताकत यही नया भारत है. नया भारत का एक ताजा उदाहरण आपको इस बजट में देखने को मिला. मिला है. वो ताजा उदाहरण क्या है? मैंने जो पूर्व में चर्चा की ना कि इंपोर्टर भारत था. बदल गया भाई एक्सपोर्टर भारत हो गया और तभी जब हम एक्सपोर्ट करेंगे दुनिया भर के चाहे रक्षा के क्षेत्र में कोई भी क्षेत्र में तो हम किसका कंटेनर लेते थे हम चाइना का कंटेनर लेते थे हम दूसरे दुनिया के दूसरे देशों से अपना माल भेजने के लिए कंटेनर दूसरे देश से लेते थे किराए पे लेते थे और क्यों में लगना पड़ता था कंटेनर है नहीं इंतजार करो तभी कभी नए भारत कमाल देखो इस बजट में आप देश देश ने उसको देखा एक बहुत बड़ा आईना है हमारी इकोनॉमिक का कि हम प्रधानमंत्री मोदी ने कहा नहीं हमारा माल जो एक्सपोर्ट हो रहा है दुनिया भर में जा रहा है अब विदेशी कंटेनर से नहीं जाएगा भारत में निर्जीनस कंटेनर्स जाएगा तभी ₹100 करोड़ कंटेनर निर्माण के लिए आवंटित किया गया यही तो नया भारत है मित्रों और नए भारत में जिस स्पीड से हर क्षेत्र में हम बढ़े हैं. अगर हम रक्षा को ले ऑपरेशन सिंदूर एक बहुत बड़ा माइलस्टोन है.
"पाकिस्तान को कुछ ही घंटों के अंदर पानी पिला दिया"
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि 1947 के बाद बहुत युद्ध लड़े हमने. लेकिन यह जो यह युद्ध कहे या रिवेंज कहे यह ऐसा दुनिया इसलिए हतप्र नहीं है कि हमने भाई पाकिस्तान को कुछ ही घंटों के अंदर पानी पिला दिया. उनके डीजीएमओ हमारे डीजीएमओ के सामने लिडाउन हो गए कि भ बंद करो बंद करो बहुत हो गया. भारत की इस कारवाई से दुनिया हतप्र इसलिए है 1947 के बाद जितने भी युद्ध लड़े सब इंपोर्टेड हथियार से लड़े. यह पहला युद्ध पहला रिवेंज था. जो अपने इंडीजीनस हथियार से युद्ध लड़ा और कुछ ही घंटों के अंदर कुछ ही घंटों के अंदर पाकिस्तान को नीला दिया. इस यही ऑपरेशन सिंदूर जो पूरी दुनिया में जो वाइब्रेट हो रहा है पूरे पूरे रक्षा क्षेत्र में वाइब्रेशन आया है भारत के प्रति यही है. भारत ने अपने इंडीजीनस सिस्टम से पाकिस्तान पर नीला दिया और कमाल देखो. क्योंकि प्रधानमंत्री का जो देश की बेटियों से विश्वास उनका जो कहते हैं ना टेलीपथी है प्रधानमंत्री मोदी और देश की महिलाओं से अब अद्भुत है और तभी जब पूरी देश और दुनिया को विजय की गाथा सुनाने का बात आई तो किसने विजय की गाथा सुनाई?
"दो बेटियों ने भारत की विजय की गाथा पूरी दुनिया को सुनाई"
उन्होंने आगे कहा कि देश की दो बेटियों ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर प्रेमिका सिंह यह भारत की दो बेटियों ने भारत की विजय की गाथा पूरी दुनिया को सुनाई और आज रक्षा क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा बजट 785000 करोड़ लगभग 8 लाख करोड़ और वह समय आप तो बहुत विद्वान और बहुत तजुर्बेकार है आप तो पूरे हिंदुस्तान को जगदीश जी आप जानते हैं क्या परसेप्शन था कि भाई बॉर्डर पे सड़कें मत बनाओ यही यही सोचा था बॉर्डर पे सड़कें मत बनाओ बॉर्डर पे अच्छी सड़कें बनाओगे पुल पुलिया बनाओगे तो दुश्मन देश को बहुत आराम हो जाएगा वो अंदर घुस जाएंगे उस परसेप्शन को मोदी ने उलट के रख दिया और आज हिंदुस्तान के हजारों किलोमीटर मैं तो आपको आमंत्रित करता हूं. जाओ देखो हजारों किलोमीटर पे जो बॉर्डर के रोड्स हैं जो बॉर्डर की पुल पुलियां हैं वो विश्वस्तरीय बन रहे हैं. बीआरओ ने वो काम किया है कि जो दिल्ली की जैसी सड़कें हैं ना वैसे ही आप सड़कें बॉर्डर पे मिल जाएंगी. जहां सिक्किम में लैंडस्लाइड हो रहा है, जहां पुल टूट जा रहा है, तो उसको तुरंत ही रिपेयर एयरपोर्ट पर बर्फ जम रही है. तुरंत हटाओ. बीआरओ वो काम कर रहा है. बीआरओ ने बॉर्डर की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी और तभी इस बार के बजट में बीआरओ का बजट लगभग 7384 करोड़ रहा.
बीआरओ के काम की प्रशंसा की
संजय सेठ ने आगे कहा कि बीआरओ वह काम कर रहा है. मोदी ने क्या कहा था कि भाई वह अंतिम गांव नहीं है. वह अंतिम घर नहीं है जो बॉर्डर बैठा है. वो प्रथम गांव है और प्रथम घर है और उसको सुवारी सुविधा जो देशवासियों को मिलती है. सारी सुविधा उसको मिलनी चाहिए. वो काम बीआरओ ने कर दिया और आज रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर हम बढ़े. जैसे हमने चर्चा की स्टार्टअप की जैसे हमने चर्चा की एमएसएमई की लगभग 17,000 एमएसवी सेक्टर के यूनिट्स हमारे साथ जुड़ी है और बहुत तेजी से हम इंडिजीनस की ओर बढ़े हैं और अभी आप कहें तो अभी हमारा एमएसएम सेक्टर का शेयर हमारे डिफेंस में लगभग 21% है. राजनाथ सिंह जी के नेतृत्व में यह प्रयास हो रहा है कि इसको 50% पे लाया जाए. 2013-14 में जो रक्षा का उत्पादन था मित्रों सिर्फ 46,000 करोड़ था. 134 की बात कर रहे हैं. इन 10 सालों के अंदर 11 सालों के बाद अभी रक्षा का उत्पादन कितना है? आप सबको बहुत लोगों को पता है ₹154000 करोड़ पिछले वर्ष का बता रहा हूं. ₹154000 46000 करोड़ से जम करके ₹154000 करोड़ और उसी तरह एक्सपोर्ट भी हमारा बढ़ा. 2013-14 में ₹1000 करोड़ का हम एक्सपोर्ट करते थे रक्षा क्षेत्र का.
रक्षा क्षेत्र में बड़ा बुस्ट का प्लान
उन्होंने आगे कहा कि 2013-14 में मात्र ₹1000 करोड़ का रक्षा के आम एमुनेशन और सामान हम 1000 करोड़ का एक्सपोर्ट करते थे. अभी पिछले वर्ष का जो एक्सपोर्ट था हमारा 1000 से कितना जंप किया आप कैलकुलेटर से जोड़ लेना. 1000 करोड़ से 23622 करोड़ और इस बार का लक्ष्य 50000 करोड़ का है. अभी अप्रैल तक का और 2029 में आदरणीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी ने रखा है लक्ष्य ₹ लाख करोड़ का यह एक्सपोर्ट का म हर क्षेत्र में हर क्षेत्र में प्रगति कर रहे हैं. डीआरडीओ को क्या आज डीआरडीओ रक्षा के क्षेत्र में अद्भुत काम कर रहा है. अभी आप सब ने देखा होगा एआई समिट दुनिया के संपन्न राष्ट्र जो कहते हैं भाई टेक्नोलॉजी बहुत हाई है. हमारे पास कैलिबर की हमारे पास हुनर की हमारे पास पैसा कोई कमी नहीं है. लेकिन मास्टर स्ट्रोक किसने मारा? भारत ने मोदी ने. एआई सबमिट ने वह करके दिखाया कि 11 दुनिया के 118 देश के लोग दुनिया के 118 देश के लोग उस एआई समिट में हिस्सा लिया और 18 लगभग 20 देश के लोग राष्ट्रध्यक्ष एआई समिट में ये एआई एक ऐसा कहते हैं ना टेक्नोलॉजी जहां देश के को आगे बढ़ाना देश की नई टेक्नोलॉजी अभी कुछ लोगों ने भ्रम किया था कुछ नहीं कंप्यूटर भी आया था लोगों ने कहा कि भाई जॉब जाएगी जो आज कंप्यूटर वही जॉब दे रहा है करोड़ों करोड़ों को एआई भी यही एआई आपको हर क्षेत्र में चाहे मेडिकल का क्षेत्र हो चाहे ट्रैफिक आपको शहर में ट्रैफिक कंजेशन है ट्रैफिक को सुधारना है उसमें है रक्षा हर क्षेत्र में एआई काम करेगा और वही एआई आज आपका मास्टर स्ट्रोक किसने मारा? भारत ने मारा. यह नया भारत है और नए भारत में हर क्षेत्र में हम आगे बढ़े हैं.
"दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनेंगे"
संजय सेठ ने कहा कि मेरा समय भी खत्म हो रहा है. हमारे देश के लॉ मिनिस्टर मेघवाल जी भी आ गए. क्योंकि यह ऐसा इशू है जिस पर समय की सीमा रह नहीं जाती. आप घंटों बोल सकते हैं और घंटों कोई भाषण नहीं मोदी ने जो धरातल पर उतारा और जो ट्रैक पर इकोनमिक ट्रैक पर डिफेंस सेक्टर में हर सेक्टर में ट्रैक पर आया वो आप बता सकते हो और विकसित भारत का वो संकल्प 140 करोड़ देशवासी उस संकल्प को ले आगे बढ़े हैं और वो संकल्प हर क्षेत्र में जो जिस सेक्टर में है उसका दी बेस्ट करेंगे. आज इस मौके पर मैं आपका अभिनंदन करते हुए और इस आशा और विश्वास के साथ कि इस नए भारत और नए भारत का जो संकल्प है विकसित भारत का देश उधर बड़ा है और देश ने करके भी दिखाया है. अंत में बस यही कहना चाहेंगे कि देश जब आज से कुछ साल पहले जब मोदी जी बोल रहे थे कि भाई 5 ट्रिलियन डॉलर 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी लोग बगले झांकते थे लेकिन आज हम सब ने देखा कैसे जापान के टेक्नोलॉजी को पहचान कर हम 4 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बने और ये हम नहीं कह रहे दुनिया भर के इकोनॉमिस्ट दुनिया भर के आर्टिकल्स कॉलम्स आ रहे हैं उसमें आर इकोनॉमिस्ट बोल रहे हैं वह दिन दूर नहीं कोई एक डिकेड दो डिकेड नहीं कुछ ही महीनों के अंदर आप $5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनेंगे दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनेंगे और आप यह देश बदल गया है मित्रों देश विकास के राह पे अग्रसर है. जगदीश जी आप का यह चैनल उस विकसित भारत को भी संकल्प को पूरा करें. मीडिया हर मैंने कहा ना हर क्षेत्र अपनेप क्षेत्र में दी बेस्ट करने की कोशिश करें. आप सभी मित्रों का बहुत-बहुत धन्यवाद. जय भारत. जय हिंद. भारत माता की जय.
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