भारत में तेजी से घट रही फर्टिलिटी रेट, बढ़ रही बुजुर्ग आबादी, क्या होने वाला है जापान जैसा हाल?

भारत में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब लगातार धीमी होती जा रही है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024 की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि देश का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गया है.

India Population growth decreasing elderly people are increasing rapidly
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Population Alert: भारत में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार अब लगातार धीमी होती जा रही है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) 2024 की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि देश का कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate-TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गया है. यह आंकड़ा रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से भी नीचे है. आसान भाषा में समझें तो अब भारत में महिलाएं पहले की तुलना में कम बच्चों को जन्म दे रही हैं.

जनसंख्या विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी देश में 2.1 का TFR संतुलित माना जाता है. इसका मतलब होता है कि एक पीढ़ी खुद को अगली पीढ़ी से बराबरी के स्तर पर बदल रही है. लेकिन अगर लंबे समय तक यह दर 2.1 से नीचे बनी रहती है, तो भविष्य में जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ सकती है और कई दशकों बाद आबादी घटने की स्थिति भी पैदा हो सकती है. जापान और कुछ यूरोपीय देशों में इसी तरह की स्थिति देखने को मिली है, जहां कम जन्मदर के कारण बुजुर्ग आबादी तेजी से बढ़ी और कामकाजी आबादी घटने लगी.

बिहार में सबसे ज्यादा, दिल्ली में सबसे कम जन्मदर

रिपोर्ट के अनुसार देश में अभी भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बनी हुई है. इनमें बिहार सबसे आगे है. इसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड का नंबर आता है.

बिहार का TFR 2.9 दर्ज किया गया है, जो देश में सबसे ज्यादा है. वहीं राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में यह सबसे कम 1.2 रिकॉर्ड किया गया. दिल्ली के अलावा केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में भी TFR 1.3 के आसपास है.

रिपोर्ट बताती है कि पिछले एक दशक में बिहार में जन्मदर में सबसे कम गिरावट दर्ज हुई. वर्ष 2012-14 में बिहार का TFR 3.2 था, जो 2022-24 में घटकर 2.9 हो गया. यानी करीब 9.4 प्रतिशत की कमी आई. दूसरी तरफ दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पहले से कम TFR होने के बावजूद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. दिल्ली में लगभग 29 प्रतिशत और तमिलनाडु में करीब 23 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई.

बच्चों की आबादी घट रही, कामकाजी वर्ग बढ़ रहा

जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि जिन राज्यों में लंबे समय से जन्मदर कम है, वहां बच्चों की संख्या भी घटने लगी है. तमिलनाडु में 0-14 वर्ष आयु वर्ग की आबादी कुल जनसंख्या का केवल 18 प्रतिशत रह गई है. वहीं बिहार में यह आंकड़ा 31.5 प्रतिशत है.

आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में भी बच्चों की आबादी करीब 19 प्रतिशत के आसपास पहुंच चुकी है. पूरे देश की बात करें तो भारत की लगभग 24 प्रतिशत आबादी 0-14 वर्ष आयु वर्ग में आती है.

हालांकि फिलहाल भारत के लिए राहत की बात यह है कि कामकाजी आयु वर्ग यानी 15 से 59 साल के लोगों की आबादी अभी भी बढ़ रही है. रिपोर्ट के मुताबिक देश की 66.4 प्रतिशत आबादी वर्किंग एज ग्रुप में आती है. वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 64 प्रतिशत था.

इसका मतलब है कि भारत के पास अभी भी ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ का बड़ा मौका मौजूद है. यानी बड़ी युवा आबादी आर्थिक विकास और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकती है.

तेजी से बढ़ रही बुजुर्ग आबादी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह अवसर हमेशा नहीं रहने वाला. दक्षिण भारत के कई राज्यों में कामकाजी आबादी अब स्थिर होने लगी है और बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

तमिलनाडु में 60 वर्ष से अधिक उम्र की आबादी 10.6 प्रतिशत से बढ़कर 14.2 प्रतिशत हो चुकी है. वहीं केरल में बुजुर्ग आबादी सबसे ज्यादा 15 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसके उलट असम में बुजुर्गों की आबादी सबसे कम 7.6 प्रतिशत है.

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत को बुजुर्ग आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. इनमें स्वास्थ्य सेवाएं, पेंशन व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा सबसे बड़ी चिंताएं होंगी.

अचानक कम नहीं होगी भारत की आबादी

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अभी जनसंख्या स्थिरता से काफी दूर है, क्योंकि देश में बड़ी संख्या में युवा आबादी मौजूद है जो प्रजनन आयु वर्ग में आती है. जनसंख्या और प्रजनन विशेषज्ञ प्रोफेसर अरोकीयासामी पेरियनायगम के मुताबिक आने वाले वर्षों में जन्मदर में और गिरावट हो सकती है, लेकिन फिलहाल भारत की आबादी अचानक घटने वाली नहीं है.

विशेषज्ञों का कहना है कि बेहतर शिक्षा, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, शहरीकरण, परिवार नियोजन और बढ़ती महंगाई जैसे कारणों से लोग छोटे परिवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं. यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में अब दो बच्चों से कम का परिवार सामान्य होता जा रहा है.

सरकार के सामने नई चुनौती

सरकारी आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि भारत अब जनसंख्या विस्फोट वाले दौर से आगे बढ़कर जनसंख्या संतुलन और भविष्य में बढ़ती बुजुर्ग आबादी की चुनौती वाले दौर में प्रवेश कर रहा है.

आने वाले समय में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि वह युवा आबादी को पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराए और साथ ही तेजी से बढ़ रही बुजुर्ग आबादी के लिए स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए.

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