उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित धराली गांव आज एक भयावह प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गया. सुबह-सुबह यहां बादल फटने की घटना ने पूरे इलाके को तबाही के मंजर में बदल दिया. जो धरती कल तक हरी-भरी थी, वह अब मलबे, कीचड़ और बर्बादी के निशानों से भर चुकी है.
धराली से सामने आया एक वीडियो इस आपदा की भयावहता बयां करने के लिए काफी है. वीडियो में एक शख्स मलबे में फंसा हुआ रेंगते हुए सुरक्षित स्थान तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. हर पत्थर के बीच से निकलते हुए उसकी हर हरकत इस जंग को दर्शाती है जो इंसान जीवन के लिए लड़ता है.
बाढ़ की चपेट में आया पूरा इलाका
धराली और आसपास के क्षेत्र में बादल फटने के बाद भारी मलबा बहकर नीचे आया, जिससे कई घर, होटल और लॉज जमींदोज हो गए. जहां कल तक रौनक और शांति थी, वहां अब मातम पसरा है. स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ ही पलों में हालात ऐसे बदले कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
#उत्तराखंड : #उत्तरकाशी के धराली गांव के ऊपर बादल फटा। बादल फटने से धारली गांव चपेट में आया।
— Ulta Chasma Uc (@ultachasmauc) August 5, 2025
60 लोगों के लापता होने की सूचना।#UTTRAKHAND #Uttarakhand #UTTARKASHI #उत्तरकाशी pic.twitter.com/SBcmRji93h
मौतें, घायल और लापता लोग: आंकड़ों से ज़्यादा बड़ी है त्रासदी
अब तक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस घटना में 4 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हैं और कई अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. राहत-बचाव कार्य में सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आईटीबीपी की टीमें लगातार जुटी हुई हैं. अब तक लगभग 20 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है.
गंगोत्री धाम से कुछ ही दूरी पर तबाही
धराली गांव गंगोत्री धाम से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यह इलाका सेना के हर्षिल कैंप से सिर्फ 4 किलोमीटर दूर है. सुखी टॉप के पास भी बादल फटने की सूचना है. खीर गंगा नदी के उफनाने से यह बाढ़ और ज्यादा खतरनाक हो गई. वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि सिर्फ 34 सेकेंड में पूरा इलाका पानी और मलबे में समा गया.
सरकारी तंत्र अलर्ट पर, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया और कहा कि वह पीड़ितों की सुरक्षा और राहत कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, मुख्य सचिव और गढ़वाल कमिश्नर के साथ मिलकर देहरादून स्थित स्टेट डिजास्टर ऑपरेशंस सेंटर से हालात पर नजर बनाए हुए हैं.
क्या है सबसे बड़ी चुनौती?
उत्तरकाशी की इस त्रासदी ने एक बार फिर उत्तराखंड की आपदा संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है. आने वाले दिनों में सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों को निकालना, रास्तों को फिर से सुचारू बनाना और प्रभावितों को पुनर्वास देना होगा. यह आपदा सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं है, बल्कि यह उस जद्दोजहद की कहानी है जो इंसान और प्रकृति के बीच संतुलन टूटने पर सामने आती है. धराली की यह त्रासदी हर किसी को सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम वाकई प्राकृतिक आपदाओं के लिए तैयार हैं?
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