अमेरिकी सेना में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है. वेनेजुएला बॉर्डर पर चल रहे संवेदनशील ऑपरेशन के बीच दक्षिणी कमान के प्रमुख एडमिरल एल्विन होल्सी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका वेनेजुएला को लेकर एक बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है. होल्सी का कार्यकाल 2027 तक का था, लेकिन रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से मतभेद के चलते उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ दिया.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एडमिरल होल्सी वेनेजुएला सीमा पर जहाजों की निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. लेकिन जब सरकार ने इस इलाके में सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई, तो उन्होंने इसका विरोध किया. होल्सी सैन्य हस्तक्षेप के पक्ष में नहीं थे, जबकि ट्रंप प्रशासन ऑपरेशन को आगे बढ़ाने पर अड़ा हुआ था. इसी मतभेद ने आखिरकार उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया.
लगातार हो रहे इस्तीफों से सैन्य ढांचे पर सवाल
बीते तीन महीनों में अमेरिका की सेना से 8 शीर्ष अधिकारियों का इस्तीफा चौंकाने वाला रहा है. इनमें जॉइंट चीफ जनरल चार्ल्स “सीक्यू” ब्राउन जूनियर, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र जनरल टीम हॉग, नौसेना संचालन प्रमुख एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी, तटरक्षक बल की प्रमुख एडमिरल लिंडा फगन और डिफेंस इनोवेशन यूनिट के प्रमुख डग बेक जैसे बड़े नाम शामिल हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन सभी इस्तीफों के पीछे सरकार से टकराव या दबाव की स्थिति बताई जा रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, कई अधिकारियों ने नीतियों को लेकर असहमति जताई, जबकि कुछ को इसलिए किनारे किया गया ताकि ट्रंप के करीबी लोगों को इन पदों पर लाया जा सके.
सरकार के सख्त रुख पर भी उठे सवाल
हाल ही में एक सैन्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बयान दिया था. "जो युद्ध के लिए तैयार नहीं हैं, उन्हें सेना में रहने का हक नहीं है." इस बयान ने सैन्य हलकों में काफी हलचल मचाई और इसके बाद इस्तीफों की रफ्तार तेज होती दिखी.
अनुभव की कमी से जूझती अमेरिकी सेना
एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए इस्तीफों के चलते अमेरिकी सेना में अनुभव की गंभीर कमी महसूस की जा रही है. जिन वरिष्ठ अधिकारियों ने पद छोड़े हैं, उनकी जगह जिन लोगों को लाया गया है, उनके पास न तो वैसा अनुभव है और न ही रणनीतिक सोच की वैसी परिपक्वता. यह स्थिति अमेरिका जैसे वैश्विक शक्ति के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है. ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मोर्चे खुले हैं, अनुभव की कमी से रणनीतिक फैसलों पर असर पड़ सकता है.
सरकार का बढ़ता दखल और ‘मागा’ अभियान पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए अधिकारियों की नियुक्ति के साथ-साथ अब सेना में सरकार का हस्तक्षेप और बढ़ेगा. इससे सैन्य स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस स्थिति का असर डोनाल्ड ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ (MAGA) अभियान पर भी पड़ सकता है, जिसकी बुनियाद मजबूत नेतृत्व और सेना के समर्थन पर टिकी हुई है.
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