ISRAEL IRAN WAR: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक स्तर पर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है और जलमार्ग को खोलने के लिए दिया गया उनका अल्टीमेटम अब खत्म होने के करीब पहुंच गया है.
डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए ईरान पर निशाना साधा. उन्होंने तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने अपने संदेश में संकेत दिया कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं और अमेरिका कड़ा कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.
ईरान की नाकेबंदी से बढ़ा तनाव
ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है. उसने स्पष्ट कर दिया है कि इस रास्ते से केवल उसके मित्र देशों के जहाजों को ही गुजरने की अनुमति होगी. अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए यह मार्ग फिलहाल बंद कर दिया गया है. इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर डाला है.
वैश्विक स्तर पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है. यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल एशिया और यूरोप के देशों तक पहुंचता है. ईरान की इस नाकेबंदी के बाद कई देशों में ईंधन संकट की स्थिति पैदा हो गई है. दक्षिण एशिया के देशों जैसे पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति प्रभावित होने लगी है.
बढ़ता भू-राजनीतिक संकट
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है. लगातार हो रहे सैन्य घटनाक्रम और बयानों की तल्खी से यह साफ है कि स्थिति जल्द सामान्य होने की संभावना कम है. ट्रंप की चेतावनी और ईरान के सख्त रुख ने इस संकट को और गहरा कर दिया है.
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. तेल की कीमतों में तेजी, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा और ऊर्जा संकट जैसे हालात कई देशों को प्रभावित कर सकते हैं.
कुल मिलाकर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह टकराव अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है, जिसका असर दुनिया के कई देशों पर साफ दिखाई दे रहा है.
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