महीनों तक चले कूटनीतिक तनाव, आरोप-प्रत्यारोप और क्षेत्रीय अस्थिरता के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर मुहर लग गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने औपचारिक रूप से समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस कदम को वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, लेकिन इजरायल में इस समझौते को लेकर अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है.
जहां दुनिया इस समझौते को राहत की खबर के रूप में देख रही है, वहीं इजरायल के भीतर इसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है. खास तौर पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह समझौता नई राजनीतिक चुनौतियां लेकर आया है.
सर्वे में सामने आया जनता का रुख
अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस समझौते के बाद इजरायल के सार्वजनिक प्रसारक और सर्वेक्षण संस्था कान (Kan) ने लोगों की राय जानने के लिए एक सर्वे कराया. इस सर्वे के नतीजों ने इजरायली नेतृत्व के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
मंगलवार 16 जून को किए गए इस सर्वे में कुल 555 लोगों ने भाग लिया. इनमें से केवल 18 प्रतिशत लोगों ने अमेरिका-ईरान समझौते का समर्थन किया, जबकि 55 प्रतिशत लोगों ने साफ तौर पर इसका विरोध जताया. सर्वे के नतीजे बताते हैं कि इजरायल की बड़ी आबादी इस समझौते को लेकर आश्वस्त नहीं है और उसे इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता बनी हुई है.
ईरान को लेकर कायम है सुरक्षा संबंधी चिंता
सर्वे में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा हाल ही में ईरान के सैन्य ढांचे पर किए गए हमलों के बावजूद इजरायली नागरिकों की सुरक्षा चिंताएं कम नहीं हुई हैं. लगभग 70 प्रतिशत लोगों ने माना कि उन्हें अब भी ईरान से खतरा महसूस होता है.
यह आंकड़ा दर्शाता है कि शांति समझौते के बावजूद इजरायल के भीतर ईरान को लेकर अविश्वास और सुरक्षा संबंधी आशंकाएं बरकरार हैं. बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि केवल एक समझौते से क्षेत्रीय खतरे पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकते.
ट्रंप को लेकर भी बंटी हुई है राय
सर्वेक्षण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी लोगों की अलग-अलग राय सामने आई. लगभग 40 प्रतिशत लोगों का मानना है कि समझौते के बाद भी ट्रंप को इजरायल का मजबूत और भरोसेमंद मित्र माना जाना चाहिए.
वहीं 32 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद ट्रंप का इजरायल के प्रति रुख बदल सकता है. इसके अलावा 27 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राय नहीं दी या तटस्थ बने रहे.
नेतन्याहू के लिए क्यों बढ़ रही है राजनीतिक चुनौती?
अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई सहमति का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रभाव इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर पड़ता दिखाई दे रहा है. लंबे समय से नेतन्याहू ईरान को इजरायल की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते रहे हैं. ऐसे में अमेरिका का ईरान के साथ समझौता करना इजरायली राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है.
सर्वे में सामने आए विरोध के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि इजरायली समाज का बड़ा वर्ग इस समझौते को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. ऐसे में नेतन्याहू सरकार पर सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर दबाव बढ़ सकता है.
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