US Iran War: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गंभीर होता जा रहा है. कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं फिलहाल बेहद कमजोर दिखाई दे रही हैं और दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. अमेरिकी सेना ने लगातार बारहवीं रात ईरान के कई ठिकानों पर हमला किया, जिससे कई इलाकों में विस्फोटों की आवाजें गूंज उठीं. इन घटनाओं ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस संघर्ष पर टिकी हुई हैं.
अमेरिकी सेना का दावा
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ताजा हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि अभियान का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजों और वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है. अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री सुरक्षा बनाए रखने और वैश्विक व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा है. लगातार हो रहे इन हमलों के कारण ईरान के कई शहरों में अलर्ट बढ़ा दिया गया है और आगे भी सैन्य गतिविधियां तेज रहने की आशंका जताई जा रही है.
ईरान ने भी दिखाई आक्रामकता
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह दबाव में आने वाला नहीं है. ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह सक्रिय कर दिए हैं, जबकि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से कुवैत की दिशा में ड्रोन गतिविधियां शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है. संभावित खतरे को देखते हुए कुवैत ने भी अपने वायु रक्षा तंत्र को सक्रिय कर दिया है. इससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सैन्य सतर्कता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है.
ईरान ने दी सख्त चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि ईरान की रक्षा नीति 'आंख के बदले आंख' पर आधारित है. उनके अनुसार यदि ईरान की जमीन, सैन्य ठिकानों या महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर हमला किया जाता है तो उसका जवाब पूरी ताकत और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे किसी भी हमले में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले पक्षों को भी वैध लक्ष्य माना जाएगा. इस बयान ने क्षेत्रीय तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि देश की जनता पूरी तरह एकजुट है और राष्ट्रीय संप्रभुता तथा सुरक्षा की रक्षा के लिए किसी भी अमेरिकी कार्रवाई का मजबूती से जवाब देने को तैयार है. दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां यह संकेत दे रही हैं कि फिलहाल तनाव कम होने की संभावना बेहद कम है. यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर व्यापक असर डाल सकता है.
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