Iran Crude Oil: अमेरिका ने ईरान के तेल कारोबार से जुड़ी कुछ पाबंदियों में अस्थायी राहत देने का फैसला किया है. यह कदम स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद उठाया गया है. अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और पेट्रोलियम सामान के उत्पादन, बिक्री और डिलीवरी से जुड़े कुछ लेनदेन को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी जाएगी.
कब तक लागू रहेगी यह छूट?
अमेरिकी आदेश के मुताबिक, यह राहत 21 अगस्त 2026 तक लागू रहेगी. इस दौरान ईरानी तेल के उत्पादन, बिक्री, परिवहन और जहाजों के जरिए डिलीवरी से जुड़े कुछ प्रतिबंधित लेनदेन को मंजूरी दी जाएगी. हालांकि यह छूट पूरी तरह स्थायी नहीं है और तय समय तक ही मान्य रहेगी.
किन देशों पर नहीं होगा असर?
अमेरिका ने साफ किया है कि यह छूट उत्तर कोरिया और क्यूबा से जुड़े किसी भी लेनदेन पर लागू नहीं होगी. इन दोनों देशों पर पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंध जारी रहेंगे और ईरान इन देशों के साथ इस लाइसेंस के तहत कोई विशेष व्यापारिक फायदा नहीं उठा सकेगा.
उत्तर कोरिया और क्यूबा पर क्यों हैं प्रतिबंध?
अमेरिका का कहना है कि उत्तर कोरिया पर उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों की वजह से प्रतिबंध लगाए गए हैं. वहीं क्यूबा पर मानवाधिकारों, राजनीतिक दमन और अमेरिकी सुरक्षा हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रतिबंध लागू हैं.
स्विट्जरलैंड वार्ता पर ईरान का बयान
ईरान ने कहा है कि स्विट्जरलैंड में दो दिन तक चली बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, दोनों पक्षों ने कुछ जटिल मामलों पर बात की है और समझौते से जुड़े प्रावधान लागू होने के बाद आगे की वार्ताओं का रास्ता खुलेगा.
तेल निर्यात और संपत्तियों पर भी हुई चर्चा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि बातचीत में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों, तेल निर्यात और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच आगे भी बातचीत जारी रहने की उम्मीद है, जिससे कई पुराने विवादित मुद्दों का समाधान निकल सकता है.
रिश्तों में नरमी के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से दी गई यह राहत दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा सकती है. हालांकि आने वाले समय में यह देखना होगा कि दोनों पक्ष बातचीत को कितनी आगे बढ़ा पाते हैं और इसका वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर पड़ता है.
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