इस्लामाबाद: पाकिस्तान इन दिनों फिर से एक बड़े आंतरिक संकट की ओर बढ़ता दिख रहा है. कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) की ओर से घोषित इज़राइल विरोधी मार्च के चलते इस्लामाबाद और रावलपिंडी जैसे प्रमुख शहरों में सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को अत्यधिक सख्त कर दिया है.
पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार देर रात से इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं और राजधानी इस्लामाबाद की कई मुख्य सड़कों को कंटेनरों से ब्लॉक कर दिया है. यह कदम संभावित हिंसा और अराजकता को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है.
क्यों भड़का है तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान?
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान, जो पाकिस्तान का एक कुख्यात धार्मिक और राजनीतिक संगठन है, ने शुक्रवार को राजधानी इस्लामाबाद में "लब्बैक या अक्सा मिलियन मार्च" निकालने की घोषणा की थी. यह प्रदर्शन गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष और कथित तौर पर अमेरिका समर्थित संभावित युद्धविराम समझौते के खिलाफ किया जा रहा है.
TLP का कहना है कि यह प्रस्तावित समझौता गाजा के लोगों के साथ "विश्वासघात" है और इस समझौते का समर्थन करने वाली पश्चिमी ताकतों, विशेषकर अमेरिका के खिलाफ यह एक निर्णायक विरोध है. संगठन ने अपने समर्थकों से अपील की थी कि वे शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास की ओर जुलूस निकालें.
इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू, राजधानी सील
सरकार ने हालात को नियंत्रित रखने के लिए कड़े कदम उठाए हैं:
गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह फैसला लिया गया, जिसे गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अनुमोदित किया है.
TLP और पुलिस के बीच झड़पें, कई घायल
इससे पहले लाहौर में टीएलपी समर्थकों और पुलिस बल के बीच हिंसक झड़पें हुईं. यह झड़प उस समय शुरू हुई जब पंजाब पुलिस ने टीएलपी प्रमुख साद हुसैन रिजवी को गिरफ्तार करने के लिए संगठन के मुख्यालय पर छापा मारा.
इस झड़प में दर्जनों पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और कई इलाकों में अस्थायी कर्फ्यू जैसे हालात बना दिए गए हैं.
TLP का इतिहास: अराजकता और कट्टरता
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान को पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों में से एक माना जाता है, जिसकी स्थापना 2015 में हुई थी. इस संगठन का एजेंडा मुख्यतः ईशनिंदा कानूनों की कठोरता से वकालत करना और इस्लामिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना है.
इस संगठन का अतीत हिंसक विरोध प्रदर्शनों से भरा पड़ा है:
इसी वजह से सरकार TLP को लेकर हमेशा सतर्क रहती है, और यही कारण है कि इस बार भी प्रशासन ने पहले से ही इंटरनेट और यातायात प्रतिबंध जैसे कदम उठा लिए हैं.
गाजा के बहाने अंदरूनी राजनीतिक प्रदर्शन
हालांकि TLP यह दावा कर रहा है कि उसका यह प्रदर्शन फिलिस्तीन के समर्थन में है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका असली मकसद आंतरिक राजनीतिक दबाव बनाना और कट्टर समर्थकों को सक्रिय करना है.
विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि गाजा जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना टीएलपी की रणनीति का हिस्सा है.
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