इन 10 राज्यों में सबसे ज्यादा बेरोजगार, चौंकाने वाले आंकड़ें आए सामने

भारत भले ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया हो, लेकिन युवाओं के लिए रोज़गार के मोर्चे पर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है. लेबर ब्यूरो द्वारा जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच किए गए पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे की ताज़ा रिपोर्ट में साफ़ हुआ है कि देश के कई हिस्सों में युवा बेरोजगारी अभी भी दो अंकों में बनी हुई है.

Unemployement in india these 10 states see report
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भारत भले ही दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया हो, लेकिन युवाओं के लिए रोज़गार के मोर्चे पर तस्वीर उतनी उत्साहजनक नहीं है. लेबर ब्यूरो द्वारा जुलाई 2023 से जून 2024 के बीच किए गए पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे की ताज़ा रिपोर्ट में साफ़ हुआ है कि देश के कई हिस्सों में युवा बेरोजगारी अभी भी दो अंकों में बनी हुई है.

15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में बेरोजगारी की दर कई राज्यों में बेहद चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा लक्षद्वीप का है, जहां युवा बेरोजगारी 36.2% तक दर्ज की गई है.

सबसे ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश

(15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी दर), लक्षद्वीप – 36.2%, महिला: 79.7%, पुरुष: 26.2%, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह – 33.6%, केरल – 29.9%, महिला: 47.1%, पुरुष: 19.3%, नगालैंड – 27.4%, मणिपुर – 22.9%, लद्दाख – 22.2%, अरुणाचल प्रदेश – 20.9%, गोवा – 19.1%, पंजाब – 18.8%, आंध्र प्रदेश – 17.5%. इन राज्यों में युवाओं को नौकरियों की तलाश में लंबा संघर्ष करना पड़ रहा है.

जहां हालात हैं बेहतर – सबसे कम बेरोजगारी दर वाले राज्य

मध्य प्रदेश – 2.6%, गुजरात – 3.1%, झारखंड – 3.6%, दिल्ली – 4.6%, छत्तीसगढ़ – 6.3%, दादरा व नगर हवेली – 6.6%, त्रिपुरा – 6.8%, सिक्किम – 7.7%, पश्चिम बंगाल – 9%, उत्तर प्रदेश – 9.8%. इन राज्यों में अपेक्षाकृत युवा वर्ग को रोज़गार पाने में कम मुश्किलें आ रही हैं.

महिलाओं की बेरोजगारी दर पुरुषों से अधिक

रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि महिला बेरोजगारी का स्तर 11% तक पहुंच गया है, जबकि पुरुषों में यह 9.8% पर है. यह अंतर बताता है कि महिलाओं के लिए नौकरियों की उपलब्धता और अवसरों में अभी भी कई बाधाएं हैं.

शहरी बनाम ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी

शहरी क्षेत्रों में युवाओं की बेरोजगारी दर 14.7% पर है. वहीं, ग्रामीण भारत में यह घटकर 8.5% रह जाती है. इससे साफ़ है कि शहरी युवाओं के लिए भले ही अवसर अधिक दिखते हों, लेकिन प्रतिस्पर्धा और कौशल के अंतर के कारण रोज़गार पाना ज्यादा कठिन साबित हो रहा है.

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