कीव/मॉस्को: यूक्रेन लगातार रूस की सबसे कमजोर कड़ी को निशाना बना रहा है और इस प्रयास में उसे काफी सफलता भी मिल रही है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ एक नए रणनीतिक मोर्चे को खोल रखा है, जिसमें रूस के ऊर्जा संसाधनों पर हमला करके उसकी आर्थिक ताकत को कमजोर करना शामिल है. इन हमलों से रूस के तेल और गैस के भंडारों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसका अनुमान कम से कम 100 अरब डॉलर के नुकसान के तौर पर लगाया जा रहा है.
सैन्य विशेषज्ञ और पूर्व नाटो अधिकारी फिलिप इन्ग्रैम ने द सन में अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यूक्रेन की यह रणनीति रूस की ‘लाइफलाइन’ यानी ऊर्जा निर्यात पर हमला कर उसे आर्थिक तौर पर कमज़ोर करने की कोशिश है. युद्ध शुरू होने से पहले, रूस के कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा तेल और गैस जैसे ऊर्जा उत्पादों के निर्यात से आता था. वर्तमान में भी रूस के बजट में ऊर्जा निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत बनी हुई है. यही वजह है कि यूक्रेन रूस के ऊर्जा संयंत्रों को लगातार निशाना बना रहा है, ताकि उसकी युद्ध क्षमता को प्रभावित किया जा सके.
रूस की अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा क्षेत्र का दबदबा
यूक्रेन के हमलों का मकसद रूस के ऊर्जा संयंत्रों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाना और इसके जरिए उसकी आर्थिक आधारशिला को कमजोर करना है. फिलिप इन्ग्रैम का कहना है कि यूक्रेन रूस की जनता को यह संदेश देना चाहता है कि वह उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने की पूरी कोशिश कर रहा है. इसके नतीजे भी सामने आ रहे हैं- रूस में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं और कई इलाकों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. इससे आम नागरिकों के जीवन में अस्थिरता और असुविधा बढ़ रही है.
यूक्रेन ने लंबे दूरी तय करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रूस के तेल और गैस के भंडारों पर लगातार निशाना साधा है. इन ड्रोन की उड़ान क्षमता 1000 किलोमीटर से अधिक है, जो उन्हें रूस के गहरे अंदर तक घुसकर हमला करने में सक्षम बनाती है.
ड्रोन हमले और हवाई युद्ध की नई परिभाषा
फिलिप इन्ग्रैम ने इस युद्ध को 'असमान युद्ध' करार दिया है, जिसमें भारी हथियारों और टैंकों के बजाय लंबी दूरी वाले ड्रोन और सटीक निशाने से रूसी ऊर्जा संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. यूक्रेन ने खासतौर पर उन रिफाइनरी यूनिट्स को निशाना बनाया है, जो कच्चे तेल को परिष्कृत उत्पादों में बदलती हैं. इन यूनिट्स की मरम्मत बेहद कठिन होती है क्योंकि इसके लिए पश्चिमी देशों की तकनीक और पार्ट्स की जरूरत होती है, जिन्हें रूस पर लगे प्रतिबंधों की वजह से हासिल करना मुश्किल है.
एक सस्ते यूक्रेनी ड्रोन से किए गए हमले से भी रिफाइनरी महीनों या सालों तक बंद रह सकती है, जिससे अरबों डॉलर का नुकसान होता है. यह रणनीति रूस की निर्यात क्षमता को ठप कर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश है.
रूस के तेल संयंत्रों पर यूक्रेन के हमले
पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के कई प्रमुख तेल और गैस संयंत्रों को निशाना बनाया है, जिनके नाम और नुकसान का विवरण इस प्रकार है:
इन हमलों में सबसे ताजा उदाहरण है सलावत रिफाइनरी, जो रूस की ऊर्जा प्रणाली में एक अहम हिस्सा है. इसे दो बार हमले का सामना करना पड़ा, जिसमें बड़े विस्फोटों ने उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है.
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