एक नहीं चलने के ये 8 तरीके...जान लेंगे तो सेहत रहेगी 'फिट', आप कौन से स्टाइल की करते हैं वॉक

Types Of Walk: फिटनेस के लिए जिम जाना जरूरी नहीं, कई बार रोज़ की एक अच्छी वॉक ही शरीर और दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए काफी होती है. चलना न सिर्फ आसान है, बल्कि उम्र, वजन या फिटनेस लेवल से परे हर किसी के लिए फायदेमंद भी है. 

Types Of Walk You will know and get fit know your style here
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Types Of Walk: फिटनेस के लिए जिम जाना जरूरी नहीं, कई बार रोज़ की एक अच्छी वॉक ही शरीर और दिमाग को दुरुस्त रखने के लिए काफी होती है. चलना न सिर्फ आसान है, बल्कि उम्र, वजन या फिटनेस लेवल से परे हर किसी के लिए फायदेमंद भी है. 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि वॉकिंग भी कई तरह की होती है और हर स्टाइल का असर अलग होता है? सोशल मीडिया पर 20 साल से ज्यादा अनुभव रखने वाले फिटनेस कोच डैन गो ने वॉकिंग के ऐसे ही 8 तरीकों के बारे में बताया है, जो फैट बर्न से लेकर हार्ट हेल्थ तक में मदद करते हैं.

वॉकिंग के अलग-अलग तरीके और उनके फायदे

जापानी इंटरवल वॉक: इस वॉकिंग स्टाइल में तेज और धीमी चाल का कॉम्बिनेशन होता है. इसमें 3 मिनट तेज़ चलना और फिर 3 मिनट आरामदायक गति से चलना शामिल है. इसी पैटर्न को करीब 30 मिनट तक दोहराया जाता है. यह तरीका हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग जैसा असर देता है. इससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है, हार्ट हेल्थ सुधरती है और फैट तेजी से बर्न होता है.

ढलान पर वॉक करना: ढलान या चढ़ाई पर चलने से शरीर की बड़ी मांसपेशियां ज्यादा सक्रिय होती हैं. खासतौर पर जांघ, कूल्हे और कोर मसल्स पर इसका असर पड़ता है. सामान्य वॉक की तुलना में इसमें कहीं ज्यादा कैलोरी बर्न होती है और घुटनों पर भी ज्यादा दबाव नहीं पड़ता. यह तरीका पैरों को मजबूत बनाने और चर्बी घटाने में मददगार है.

वजन के साथ वॉक: इसमें वेटेड जैकेट या बैग के साथ चलना होता है. शरीर के कुल वजन का 5 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त भार लेकर चलने से कैलोरी बर्न की मात्रा काफी बढ़ जाती है. इससे हड्डियां मजबूत होती हैं, बॉडी पोश्चर सुधरता है और कोर की मजबूती भी बढ़ती है.

वर्कआउट के बाद टहलना: अगर आप स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो उसके बाद हल्की वॉक करना बेहद फायदेमंद होता है. वर्कआउट के बाद शरीर फैट बर्न के लिए ज्यादा तैयार रहता है. ऐसे में वॉक करने से फैट ऑक्सीडेशन बढ़ता है और चर्बी तेजी से कम होती है.

खाने के बाद वॉक: भोजन के 15–20 मिनट बाद हल्की चाल से टहलने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रहता है. इससे इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है और पेट के आसपास जमा चर्बी कम करने में मदद मिलती है. साथ ही, यह आदत ओवरईटिंग से भी बचाती है.

12-3-30 वॉकिंग रूटीन: यह एक पॉपुलर ट्रेडमिल वर्कआउट है, जिसमें 12 प्रतिशत इनक्लाइन पर 3 मील प्रति घंटे की स्पीड से 30 मिनट तक चलना होता है. यह वॉकिंग स्टाइल मांसपेशियों को ज्यादा एक्टिव करता है और सामान्य दौड़ से भी ज्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद करता है.

NEAT वॉकिंग: इसका मतलब है रोजमर्रा के कामों के दौरान चलना. जैसे ऑफिस में काम करते हुए, फोन पर बात करते समय या टीवी देखते हुए टहलना. इससे आपकी रोज़ की स्टेप काउंट बढ़ती है और बिना अलग से एक्सरसाइज किए ज्यादा कैलोरी बर्न होती है.

पिरामिड वॉकिंग: इसमें वॉक की शुरुआत हल्की गति से होती है और हर कुछ मिनट में स्पीड और ढलान बढ़ाई जाती है. बीच में सबसे ज्यादा इंटेंसिटी होती है, फिर धीरे-धीरे कूल-डाउन किया जाता है. यह तरीका मेटाबॉलिज्म को तेज रखता है और लंबे समय तक कैलोरी बर्न करने में मदद करता है.अगर आप अब तक सिर्फ साधारण वॉक करते थे, तो इन तरीकों में से किसी एक को अपनाकर अपनी फिटनेस को नया स्तर दे सकते हैं. सही स्टाइल चुनकर की गई वॉक आपकी सेहत में बड़ा बदलाव ला सकती है.

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