इजरायल की नजरों में चढ़ा पाकिस्तान का दोस्त, ट्रंप भी खींच सकते हैं हाथ; क्या शुरू होगा नया युद्ध?

Israel Turkey Tension 2026: ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और गाजा, लेबनान समेत पश्चिम एशिया में चल रही जंग के बीच अब इजरायल और तुर्की के रिश्ते भी काफी खराब हो गए हैं. कभी अमेरिका के करीबी माने जाने वाले दोनों देशों के बीच अब सीधी टक्कर की स्थिति बनती दिख रही है.

Türkiye friend of Pakistan Israel ire even Trump might withdraw support new war begin
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Israel Turkey Tension 2026: ईरान-अमेरिका के बीच तनाव और गाजा, लेबनान समेत पश्चिम एशिया में चल रही जंग के बीच अब इजरायल और तुर्की के रिश्ते भी काफी खराब हो गए हैं. कभी अमेरिका के करीबी माने जाने वाले दोनों देशों के बीच अब सीधी टक्कर की स्थिति बनती दिख रही है. तुर्की पाकिस्तान का करीबी दोस्त है और कई मुद्दों पर भारत के खिलाफ भी बयान देता रहा है. ऐसे में इजरायल और तुर्की की बढ़ती दुश्मनी पर सभी की नजर है.

इजरायल और तुर्की में बढ़ा तनाव

इजरायल और तुर्की के बीच पिछले कई महीनों से बयानबाजी चल रही है. तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन इजरायल को आतंकी देश बता चुके हैं और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तुलना हिटलर से कर चुके हैं. वहीं, नेतन्याहू ने एर्दोगन को तानाशाह बताया है. अब यह विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है. दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा तनाव सीरिया को लेकर बढ़ा है.

सीरिया बना दोनों देशों के बीच बड़ा मुद्दा

सीरिया में बशर अल-असद की सरकार खत्म होने के बाद अहमद अल-शरा के नेतृत्व में नई सरकार बनी. तुर्की का इस नई सरकार के साथ करीबी संबंध है और वह सीरिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.

इसी बीच इजरायल ने उत्तरी सीरिया के एक एयरबेस पर हमला किया. इजरायल का कहना था कि वहां तुर्की की सेना की तैनाती की तैयारी हो रही थी, जो उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती थी. तुर्की और सीरिया ने किसी भी सैन्य तैनाती से इनकार किया, लेकिन इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया.

पाकिस्तान और सऊदी के साथ तुर्की का रक्षा समझौता

तुर्की के पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ हालिया रक्षा समझौते ने भी इजरायल की चिंता बढ़ा दी है. पाकिस्तान को तुर्की का करीबी दोस्त माना जाता है. पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं, जबकि तुर्की के पास आधुनिक हथियार और ड्रोन तकनीक है.

ऐसे में पाकिस्तान और सऊदी के साथ तुर्की की बढ़ती सैन्य साझेदारी को क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है. इजरायल को भी इस नए समीकरण पर नजर रखनी पड़ रही है.

ट्रंप के लिए भी बढ़ी मुश्किल

इजरायल और तुर्की के बीच बढ़ता तनाव अमेरिका के लिए भी चुनौती बन गया है. तुर्की नाटो का सदस्य है, जबकि इजरायल अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी है. ऐसे में अमेरिका के लिए दोनों देशों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा.

सीरिया में इजरायली हमले के बाद तुर्की में अमेरिकी राजदूत और सीरिया के लिए विशेष दूत टॉम बैरक ने भी इजरायल की कार्रवाई को तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया था.

सीरिया से लेकर भूमध्य सागर तक टकराव

इजरायल और तुर्की के बीच तनाव सिर्फ सीरिया तक सीमित नहीं है. दोनों देश हॉर्न ऑफ अफ्रीका और पूर्वी भूमध्य सागर में भी अलग-अलग पक्षों के साथ खड़े नजर आते हैं. तुर्की के सोमालिया के साथ मजबूत संबंध हैं, जबकि इजरायल के सोमालीलैंड को लेकर बढ़ते रुख पर एर्दोगन ने नाराजगी जताई है. दूसरी ओर, पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की का ग्रीस और साइप्रस के साथ पुराना विवाद है. इजरायल के इन दोनों देशों के साथ सैन्य और ऊर्जा संबंध मजबूत हो रहे हैं.

इजरायल की सीरिया में कार्रवाई के बाद तुर्की ने नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल के जरिए गिरफ्तारी की मांग भी की. तुर्की ने गाजा में कथित मानवाधिकार उल्लंघन और नरसंहार के आरोपों का हवाला दिया.

कभी दोनों देश थे करीबी दोस्त

इजरायल और तुर्की के रिश्ते हमेशा ऐसे नहीं रहे. 1948 में इजरायल की स्थापना के बाद उसे मान्यता देने वाला तुर्की पहला मुस्लिम देश था. दोनों देशों के बीच लंबे समय तक अच्छे कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध रहे.

लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद गाजा में शुरू हुई इजरायली सैन्य कार्रवाई ने रिश्तों को पूरी तरह बदल दिया. एर्दोगन ने हमास के प्रति समर्थन जताया और इजरायल पर गाजा में नरसंहार के आरोप लगाए.

दूसरी ओर, इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के आसपास किसी भी संभावित खतरे को मजबूत नहीं होने देगा. इसी वजह से वह सीरिया में तुर्की की किसी भी सैन्य मौजूदगी को लेकर सतर्क है.

क्या इजरायल और तुर्की में होगी सीधी जंग?

फिलहाल दोनों देशों के बीच सीधे युद्ध की संभावना कम मानी जा रही है. इसकी बड़ी वजह अमेरिका है, जो अपने दोनों सहयोगियों को आमने-सामने आने से रोकना चाहेगा.

हालांकि, सीरिया में जिस तरह दोनों देशों की सैन्य मौजूदगी और हित बढ़ रहे हैं, उससे खतरा बना हुआ है. अगर किसी हमले में तुर्की का सैनिक मारा जाता है या कोई बड़ी गलतफहमी पैदा होती है, तो तनाव तेजी से बढ़ सकता है. इसलिए आने वाले दिनों में सीरिया इजरायल और तुर्की के बीच टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बना रह सकता है.

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