इस्लामाबाद: पाकिस्तानी वायुसेना ने रक्षा दिवस के मौके पर एक नया प्रचार वीडियो जारी किया है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से तैयार किए गए इस वीडियो में भारत को लेकर कई दावे किए गए हैं. हालांकि, वीडियो में पाकिस्तान ने तुर्की के कई ऐसे हथियार और ड्रोन भी दिखाए हैं, जो अब तक सार्वजनिक तौर पर ज्यादा नजर नहीं आए थे. इसे भारत के लिए एक अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का करीबी सैन्य सहयोगी रहा है. मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी तुर्की की ओर से पाकिस्तान को सैन्य समर्थन मिलने की बात सामने आई थी.
वीडियो में कौन-कौन से हथियार दिखे?
पाकिस्तानी प्रचार वीडियो में पहली बार तुर्की की कोरकुट 35 मिमी स्वचालित वायु रक्षा तोप प्रणाली को सार्वजनिक रूप से दिखाया गया है. वीडियो से संकेत मिलता है कि यह हथियार अब पाकिस्तानी वायुसेना के पास मौजूद है. इसके अलावा तुर्की की साहिन 40 मिमी ड्रोन रोधी प्रणाली को भी वीडियो में दिखाया गया है. इसमें बायराकटार एकेएनसी और बायराकटार टीबी2 जैसे तुर्की निर्मित ड्रोन भी नजर आए. इससे पाकिस्तान और तुर्की के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का पता चलता है.
🚨🇵🇰 PAF drops pure firepower: Turkish KORKUT, HQ-17 & killer drones now online. That J-10C rocking Indian Rafale kill marks? Absolute dominance. Shockwaves just hit India hard. Skies secured. Who’s next? 🔥 pic.twitter.com/hYLxSysV8a
— 【🇵🇰 𝐏𝐀𝐊𝐈𝐒𝐓𝐀𝐍 𝐔𝐏𝐃𝐀𝐓𝐄𝐒】 (@pk_updates786) September 7, 2026
कितनी ताकतवर है कोरकुट 35?
कोरकुट 35 को तुर्की की रक्षा कंपनी एसेलसन ने तैयार किया है. यह कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे खास तौर पर पैदल सेना और बख्तरबंद सैन्य टुकड़ियों को हवाई हमलों से बचाने के लिए बनाया गया है. इसमें 35 मिमी की दो तोपें लगी हैं, जो एक मिनट में करीब 1,100 गोलियां दाग सकती हैं. इसकी प्रभावी मारक क्षमता करीब 4 किलोमीटर बताई जाती है.
भारत के खिलाफ पाकिस्तान को तुर्की का साथ
मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना ने तुर्की में बने ड्रोन का इस्तेमाल किया था. पाकिस्तानी ड्रोन के मलबे की जांच के दौरान तुर्की के असिसगार्ड सोंगर ड्रोन की पहचान होने की बात सामने आई थी. भारत के अनुसार, पाकिस्तान ने करीब 36 जगहों पर लगभग 300 से 400 ड्रोन भेजे थे. एक मीडिया ब्रीफिंग में सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने भी कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को समर्थन देने में चीन के साथ तुर्की की भी अहम भूमिका रही थी.
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