इस्लामाबाद: तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने फिर से पाकिस्तानी सेना को चेतावनी जारी की है. संगठन ने हाल ही में खैबर पख्तूनख्वां (केपी) प्रांत में अपने सशस्त्र लड़ाकों की ट्रेनिंग का वीडियो साझा किया है, जिसमें उनके कठोर और व्यापक प्रशिक्षण का दृश्य दिखाया गया है. इस वीडियो के साथ ही टीटीपी ने पाकिस्तानी सेना से कहा है कि वे अपनी चौकियों को खाली कर केपी क्षेत्र से बाहर चले जाएं.
टीटीपी ने स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तानी सेना ने यह आदेश नहीं माना, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं और संगठन उनकी पोस्टों पर हमले करने के लिए तैयार है. यह चुनौती खासतौर पर पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर के लिए गंभीर संकेत के रूप में देखी जा रही है.
टीटीपी और पाकिस्तानी सेना के बीच तनाव
टीटीपी और पाकिस्तानी सेना के बीच हाल के महीनों में तनाव लगातार बढ़ा है. संगठन ने बार-बार खैबर पख्तूनख्वां और अफगान सीमा से जुड़े इलाकों में सेना और सुरक्षा बलों पर हमला किया है. इन हमलों के कारण सेना के लिए इन क्षेत्रों में स्थायी कैंप स्थापित करना मुश्किल हो गया है.
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— Voice of Khorasan (@VoiceKhorasan1) November 1, 2025
Armed militants of Tehreek-e-Taliban Pakistan carried out intense military training in Khyber Pakhtunkhwa.
A video released by the group shows them conducting extensive and rigorous training in the area.
In the footage, they issue a clear and severe warning… pic.twitter.com/NM09UrkBBX
बीते महीने पाकिस्तानी सेना ने टीटीपी के प्रमुख नूर वली महसूद को निशाना बनाकर अफगानिस्तान के काबुल में हवाई हमले किए थे. हालांकि महसूद इन हमलों में बच गए, लेकिन इस कार्रवाई ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा दिया. इस घटना के बाद टीटीपी ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है.
खैबर पख्तूनख्वां में टीटीपी का प्रभाव
टीटीपी की सक्रियता खैबर पख्तूनख्वां प्रांत में लगातार बढ़ती जा रही है. पिछले महीनों में संगठन ने पेशावर में अपने लड़ाकों को सड़कों पर चेकपोस्ट लगाते और यातायात नियंत्रित करते हुए दिखाया था. यह दर्शाता है कि टीटीपी अब केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी इलाकों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है.
पाकिस्तानी सांसदों और अधिकारियों की रिपोर्टों के अनुसार केपी के कई इलाकों में सरकार का नियंत्रण कमजोर है. कुछ क्षेत्रों में सेना और पुलिस की उपस्थिति न के बराबर है, जबकि टीटीपी के लड़ाके ही बड़े हिस्सों में प्रशासनिक नियंत्रण बनाए हुए हैं.
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